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अब तक 11 बार सवर्णों ने मारी है बाजी

Sun, 23 Jan 2022 11:09 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jan 2022 11:09 PM IST
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So far 11 times the upper castes have won
मधुबन। अपने आप में काफी ऐतिहासिकता समेटे है मधुबन विधानसभा क्षेत्र। यहां की धरती राजनीति क्षेत्र में भी काफी रोचक भी है। 2012 से नत्थुपुर विधानसभा मधुबन विधानसभा के रूप जानी जाती है। अब तक यहां से 11 बार सवर्णों ने बाजी मारी है। अब तक यहां से चार बार सोशलिस्ट पार्टी, छह बार कांग्रेस, दो बार जनता पार्टी, तीन बार बसपा तो एक बार सपा-बसपा गठबंधन का कब्जा रहा है। मधुबन विधानसभा (2012 से पूर्व नत्थुपुर) में अबतक कुल 16 बार हुए विधानसभा चुनाव में 11 बार सवर्णों ने तो पांच बार अन्य ने बाजी मारी। आजादी के बाद हुए विधानसभा चुनाव में सोशलिस्ट पार्टी से 1952 से 1962 तक हुए तीन बार चुनाव में स्व. राम सुंदर पांडेय विधायक चुने गए। सीट के आरक्षित हो जाने के बाद सोशलिस्ट पार्टी से 1967 में मंगल देव विशारद विधायक बने। 1969 में लालसा राम कांग्रेस से विधायक बने। 1974 और 1977 के चुनाव में इसी जगदीश मिश्र विधायक बने। 1980 में कांग्रेस के टिकट पर राजकुमार राय तो वर्ष 1985 में जनता पार्टी के टिकट पर विष्णु देव गुप्ता ने जीत हासिल की। उसके बाद 1989 के मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर अमरेश चंद्र पांडेय ने बाजी मारी। दोबारा 1991 सामान्य विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज कर लोगों का विश्वास जीता। 1993 चुनाव में अनुसूचित सीट हो जाने के कारण राजेंद्र कुमार सपा-बसपा गठबंधन से विधायक बने। 1996 चुनाव में सपा से सुधाकर सिंह तो 2002 सामान्य निर्वाचन चुनाव में बसपा से कपिल देव यादव विधायक चुने गए। 2007 तथा 2012 के चुनाव में लगातार दो बार बसपा से उमेश चंद्र पांडेय विधायक बने। 2017 के विधानसभा के चुनाव में पहली बार दारा सिंह चौहान ने भाजपा को जीत दिलाई। इस बार के चुनाव में मधुबन विधानसभा का चुनाव सभी दलों के लिए चुनौती भरा है। वर्तमान में बसपा ने प्रभारी-प्रत्याशी तथा कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी का पत्ता खोला है। अभी लोगों की निगाहें अन्य दलों के प्रत्याशियों की तरफ है। 2017 में पहली बार यहां भाजपा का खाता खुला। भाजपा इस बार भी इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखना चाह रही है। वहीं सपा, बसपा तथा कांग्रेस भी अपने पुराने इतिहास को दोहराने की जुगत में है। भाजपा से कुछ ऐसे दावेदार भी लाइन में दिख रहे हैं। जिन्होंने बीते काफी समय से पार्टी को क्षेत्र में मजबूत करने के साथ ही जनाधार बढ़ाने में जुटे रहे हैं।
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