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साहब : बड़ी दूर से आए है, एक बार डॉक्टर साहब से दिखा दीजिए
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मऊ। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा मिक्सौपैथी के विरोध में 24 घंटे के विरोध का सबसे ज्यादा खमियाजा दूर दराज से आए मरीजों को भुगतना पड़ा। गलनभरी ठंड में कोहरे में अलग-अलग साधनों से जब मरीज इलाज के लिए निजी अस्पताल पहुंचे। उन्हें यहां तैनात सुरक्षा कर्मियों ने बंद की जानकारी देते हुए वापस लौटा दिया। इस दौरान कई परिजन मासूम बच्चों को लिए चिकित्सकों से इलाज कराने के लिए अस्पताल में अंदर जाने के प्यार, तकरार, मिन्नतें आदि उपायों से इलाज कराने की कोशिश की। लेकिन सफलता नहीं मिलने पर इसमें अधिकांश मरीज महिला जिला अस्पताल तथा जिला अस्पताल पहुंचकर इलाज कराया।
जिले से 35 किमी दूर स्थित मधुबन तहसील के समसपुर गांव निवासी राजकुमार अपनी मां रीमा के साथ अपना इलाज के लिए गाजीपुर तिराहा स्थित एक अस्पताल पहुंचा। काफी देर तक इंतजार के बाद उपचार न होने पर वह जिला अस्पताल पहुंचकर इलाज कराया। राजकुमार ने बताया कि उसे डॉक्टरों ने इस विरोध की जानकारी नहीं थी। इसी तरह से नगर के सदर बाजार निवासी पुष्पा ने बताया कि वह अपने मासूम की तबीयत खराब होने पर गाजीपुर तिराहा से लेकर नरई बांध तक बच्चों के तीन चार अस्पताल में इलाज के लिए भटकती रहीं।
वहीं कोपागंज निवासी रति चौहान ने बताया कि 13 दिन पूर्व उसकी पत्नी का प्रसव गाजीपुर तिराहा स्थित एक अस्पताल में हुआ था। आज वह अपने बेटे की तबियत खराब होने पर वह अस्पताल पहुंचा, लेकिन अस्पताल बंद होने पर महिला जिला अस्पताल पहुंचकर इलाज कराया। वहीं बलिया के नगरा से आए मनीष ने कहा कि उसकी पत्नी ममता का इलाज गाजीपुर तिराहा स्थित एक अस्पताल में चल रहा है। शुक्रवार को इलाज कराने के जब अस्पताल पहुंचा तो अस्पताल बंद मिला। जिसके बाद वह जिला अस्पताल पहुंचकर अपनी पत्नी का इलाज कराया।
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सरकारी अस्पतालों में 20 फीसदी तक बढ़े मरीज
मऊ। आईएमए के विरोध के चलते जिला अस्पताल, महिला जिला अस्पताल के अलावा जिले के आठ सीएचसी तथा 34 पीएचसी पर सामान्य ओपीडी से 20 प्रतिशत मरीज ज्यादा रहे। जिला अस्पताल में 250 मरीज पहुंचे, सामान्य दिनों में और ठंड तथा कोरोना संक्रमण के चलते 200 तक ही मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं महिला अस्पताल में यह संख्या 200 से ज्यादा रही। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मधुबन पर 105 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
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जिले से 35 किमी दूर स्थित मधुबन तहसील के समसपुर गांव निवासी राजकुमार अपनी मां रीमा के साथ अपना इलाज के लिए गाजीपुर तिराहा स्थित एक अस्पताल पहुंचा। काफी देर तक इंतजार के बाद उपचार न होने पर वह जिला अस्पताल पहुंचकर इलाज कराया। राजकुमार ने बताया कि उसे डॉक्टरों ने इस विरोध की जानकारी नहीं थी। इसी तरह से नगर के सदर बाजार निवासी पुष्पा ने बताया कि वह अपने मासूम की तबीयत खराब होने पर गाजीपुर तिराहा से लेकर नरई बांध तक बच्चों के तीन चार अस्पताल में इलाज के लिए भटकती रहीं।
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वहीं कोपागंज निवासी रति चौहान ने बताया कि 13 दिन पूर्व उसकी पत्नी का प्रसव गाजीपुर तिराहा स्थित एक अस्पताल में हुआ था। आज वह अपने बेटे की तबियत खराब होने पर वह अस्पताल पहुंचा, लेकिन अस्पताल बंद होने पर महिला जिला अस्पताल पहुंचकर इलाज कराया। वहीं बलिया के नगरा से आए मनीष ने कहा कि उसकी पत्नी ममता का इलाज गाजीपुर तिराहा स्थित एक अस्पताल में चल रहा है। शुक्रवार को इलाज कराने के जब अस्पताल पहुंचा तो अस्पताल बंद मिला। जिसके बाद वह जिला अस्पताल पहुंचकर अपनी पत्नी का इलाज कराया।
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सरकारी अस्पतालों में 20 फीसदी तक बढ़े मरीज
मऊ। आईएमए के विरोध के चलते जिला अस्पताल, महिला जिला अस्पताल के अलावा जिले के आठ सीएचसी तथा 34 पीएचसी पर सामान्य ओपीडी से 20 प्रतिशत मरीज ज्यादा रहे। जिला अस्पताल में 250 मरीज पहुंचे, सामान्य दिनों में और ठंड तथा कोरोना संक्रमण के चलते 200 तक ही मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं महिला अस्पताल में यह संख्या 200 से ज्यादा रही। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मधुबन पर 105 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।