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Mau News: सदर तहसील में पांच साल से पुराने मामलों का जल्द करें निस्तारण
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मऊ। जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र ने मंगलवार को सदर तहसील का निरीक्षण किया। उप जिलाधिकारी को तहसील स्तर पर मिलने वाली शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने को कहा। जो भी व्यक्ति अपनी समस्या को लेकर आता है उसकी समस्याओं को सुने और जल्द उसका निस्तारण कराएं।
उन्होंने तहसील के सभी न्यायालयों में पांच साल से अधिक लंबित वादों के निस्तारण की स्थिति के बारे में जानकारी ली। पाया कि उप जिलाधिकारी सदर के न्यायालय में पांच साल से अधिक समय के 87 वाद लंबित हैं। उप जिलाधिकारी न्यायिक सदर न्यायालय में 135 वाद, तहसीलदार सदर न्यायालय में 84 वाद, तहसीलदार न्यायिक न्यायालय में 74 वाद, नायब तहसीलदार न्यायालय में 31 वाद, नायब तहसीलदार न्यायिक सदर न्यायालय में तीन वाद लंबित पाए गए।
तहसीलदार न्यायिक सदर न्यायालय में पांच साल सहित कुल 1371 वाद और तहसीलदार सदर न्यायालय में 1293 वाद लंबित पाए गए। ये तो सरकारी आंकड़े हैं, वास्तव में ये संख्या तीन गुनी अधिक है। न्यायालय में वादों का निस्तारण होने के बाद वादी सुनवाई के लिए ऊपर के अधिकारी के कोर्ट में अपील करता है।
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जिसके उसमें नया मुकदमा नंबर डालकर नया कर दिया जाता है, जबकि वो वही पुराना मामला है। फिर वहां वाद निस्तारित होने में चार से पांच साल का समय लग जाता है। इस पहली से दूसरी और फिर तीसरी पीढ़ी वादों के निस्तारण में तहसील का चक्कर काटती है। हालांकि जिलाधिकारी ने 5 वर्ष और उससे अधिक समय से लंबित वादों के जल्द निस्तारण करने को कहा है। नहीं करने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
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उन्होंने तहसील के सभी न्यायालयों में पांच साल से अधिक लंबित वादों के निस्तारण की स्थिति के बारे में जानकारी ली। पाया कि उप जिलाधिकारी सदर के न्यायालय में पांच साल से अधिक समय के 87 वाद लंबित हैं। उप जिलाधिकारी न्यायिक सदर न्यायालय में 135 वाद, तहसीलदार सदर न्यायालय में 84 वाद, तहसीलदार न्यायिक न्यायालय में 74 वाद, नायब तहसीलदार न्यायालय में 31 वाद, नायब तहसीलदार न्यायिक सदर न्यायालय में तीन वाद लंबित पाए गए।
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तहसीलदार न्यायिक सदर न्यायालय में पांच साल सहित कुल 1371 वाद और तहसीलदार सदर न्यायालय में 1293 वाद लंबित पाए गए। ये तो सरकारी आंकड़े हैं, वास्तव में ये संख्या तीन गुनी अधिक है। न्यायालय में वादों का निस्तारण होने के बाद वादी सुनवाई के लिए ऊपर के अधिकारी के कोर्ट में अपील करता है।
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जिसके उसमें नया मुकदमा नंबर डालकर नया कर दिया जाता है, जबकि वो वही पुराना मामला है। फिर वहां वाद निस्तारित होने में चार से पांच साल का समय लग जाता है। इस पहली से दूसरी और फिर तीसरी पीढ़ी वादों के निस्तारण में तहसील का चक्कर काटती है। हालांकि जिलाधिकारी ने 5 वर्ष और उससे अधिक समय से लंबित वादों के जल्द निस्तारण करने को कहा है। नहीं करने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।