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Mau News: एनीमिया के साथ थायराइड और पीसीओएस की जद में आ रहीं किशोरियां
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मऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में महिलाओं और किशोरियों के लिए चलाए जा रहे विशेष स्वास्थ्य जांच अभियान में किशोरियों में थायराइड और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की समस्या सबसे अधिक सामने आई है। सकारात्मक बात है कि इन कार्यक्रमों में एनीमिया के मरीजों के लिए स्वस्थ महिलाओं द्वारा जागरूकता दिखाते हुए 76 यूनिट भी रक्तदान किया गया है।
नोडल अधिकारी और डिप्टी सीएमओ डॉ. बीके यादव ने बताया कि बीते 17 दिसंबर से स्वास्थ्य मेला का आयोजन किया जा रहा है। अब तक 53 सरकारी अस्पतालों पर आयोजित 24 स्वास्थ्य मेला में डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर के जरिये की गई जांच से साफ हुआ है कि 10 से 18 वर्ष की किशोरियों में एनीमिया (खून की कमी) का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। वहीं ग्रामीण इलाकों में भी खान-पान में लापरवाही के कारण हर पांचवीं किशोरी ''''''''सुपर-पैरासाइट्स'''''''' (पेट के कीड़े), थायराइड और पीसीओएस जैसी साइलेंट बीमारियों की गिरफ्त में हैं। 3 हजार से अधिक महिलाओं, किशोरियों की जांच के सामने यह ग्राफ निकलकर आया है। इसमें 500 से अधिक महिलाओं-किशोरियों में खून की कमी, एक हजार से अधिक में पीसीओएस और थायराइड होना मिला है।
साइलेंट किलर बन रहीं बीमारियां
महिला विशेषज्ञ डॉ. खालिदा जिया उस्मानी ने बताया कि डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर से सटीक और त्वरित रिपोर्ट मिल रही है। जंक फूड का अत्यधिक सेवन और शारीरिक निष्क्रियता किशोरियों के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ रही है। थायराइड और पीसीओएस जैसी बीमारियां शुरुआती दौर में कोई गंभीर लक्षण नहीं दिखातीं, जिससे इन्हें साइलेंट किलर माना जा रहा है। समय पर जांच न होने से आगे चलकर यह बांझपन और मानसिक तनाव का कारण बन रही हैं।
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भोजन के सभी पोषक तत्वों को सोख लेता है सुपर-पैरासाइट्स
महिला जिला अस्पताल की विशेषज्ञ डॉ. चंद्रा सिन्हा ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि किशोरियों के पेट में ''''''''सुपर-पैरासाइट्स'''''''' यानी खतरनाक कीड़े पनप रहे हैं। खुले में बिकने वाले दूषित खाद्य पदार्थ और हाथ न धोने की आदत से ये पैरासाइट्स शरीर में प्रवेश करते हैं। ये कीड़े किशोरियों द्वारा खाए गए भोजन के सभी पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, जिससे आयरन की भारी कमी हो जाती है और डिजिटल मीटर में हीमोग्लोबिन का स्तर बेहद कम (एनीमिया) दर्ज किया जा रहा है। बताया कि फास्ट फूड की लत और खराब जीवनशैली किशोरियों के मेटाबॉलिज्म को तबाह कर रही है। डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर से एनीमिया के साथ-साथ हार्मोनल गड़बड़ी का भी अंदाजा मिल रहा है। पीसीओएस और थायराइड से बचने के लिए किशोरियों को पैकेट बंद खाने से तौबा कर हरी सब्जियां और मौसमी फल अपनाने होंगे।
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नोडल अधिकारी और डिप्टी सीएमओ डॉ. बीके यादव ने बताया कि बीते 17 दिसंबर से स्वास्थ्य मेला का आयोजन किया जा रहा है। अब तक 53 सरकारी अस्पतालों पर आयोजित 24 स्वास्थ्य मेला में डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर के जरिये की गई जांच से साफ हुआ है कि 10 से 18 वर्ष की किशोरियों में एनीमिया (खून की कमी) का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। वहीं ग्रामीण इलाकों में भी खान-पान में लापरवाही के कारण हर पांचवीं किशोरी ''''''''सुपर-पैरासाइट्स'''''''' (पेट के कीड़े), थायराइड और पीसीओएस जैसी साइलेंट बीमारियों की गिरफ्त में हैं। 3 हजार से अधिक महिलाओं, किशोरियों की जांच के सामने यह ग्राफ निकलकर आया है। इसमें 500 से अधिक महिलाओं-किशोरियों में खून की कमी, एक हजार से अधिक में पीसीओएस और थायराइड होना मिला है।
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साइलेंट किलर बन रहीं बीमारियां
महिला विशेषज्ञ डॉ. खालिदा जिया उस्मानी ने बताया कि डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर से सटीक और त्वरित रिपोर्ट मिल रही है। जंक फूड का अत्यधिक सेवन और शारीरिक निष्क्रियता किशोरियों के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ रही है। थायराइड और पीसीओएस जैसी बीमारियां शुरुआती दौर में कोई गंभीर लक्षण नहीं दिखातीं, जिससे इन्हें साइलेंट किलर माना जा रहा है। समय पर जांच न होने से आगे चलकर यह बांझपन और मानसिक तनाव का कारण बन रही हैं।
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भोजन के सभी पोषक तत्वों को सोख लेता है सुपर-पैरासाइट्स
महिला जिला अस्पताल की विशेषज्ञ डॉ. चंद्रा सिन्हा ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि किशोरियों के पेट में ''''''''सुपर-पैरासाइट्स'''''''' यानी खतरनाक कीड़े पनप रहे हैं। खुले में बिकने वाले दूषित खाद्य पदार्थ और हाथ न धोने की आदत से ये पैरासाइट्स शरीर में प्रवेश करते हैं। ये कीड़े किशोरियों द्वारा खाए गए भोजन के सभी पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, जिससे आयरन की भारी कमी हो जाती है और डिजिटल मीटर में हीमोग्लोबिन का स्तर बेहद कम (एनीमिया) दर्ज किया जा रहा है। बताया कि फास्ट फूड की लत और खराब जीवनशैली किशोरियों के मेटाबॉलिज्म को तबाह कर रही है। डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर से एनीमिया के साथ-साथ हार्मोनल गड़बड़ी का भी अंदाजा मिल रहा है। पीसीओएस और थायराइड से बचने के लिए किशोरियों को पैकेट बंद खाने से तौबा कर हरी सब्जियां और मौसमी फल अपनाने होंगे।