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पूर्व एसओ को तीन वर्ष की सजा
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Sat, 27 Aug 2016 11:20 PM IST
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25 वर्ष पूर्व शहरोज गांव निवासी कैलाश राय के द्वारा दर्ज कराए गए मारपीट के मामले में सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रवींद्र कुमार ने तत्का-लीन थानाध्यक्ष कोपागंज को ने दोषी पाया। कोर्ट ने तत्कालीन थानाध्यक्ष को तीन वर्ष की सजा के साथ पांच हजार रूपया अर्थ दंड निर्धारित किया। जबकि इस मामले में दो अन्य आरोपियों को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। बताते चले राजनैतिक हस्तक्षेप पर पुलिस ने मामले को तीन वर्ष बाद दर्ज किया था।
मामले के अनुसार कोपागंज थाना क्षेत्र के शहरोज गांव निवासी कैलाश राय पुत्र बब्बन राय को नौ अक्तूबर 1991 को दोहरीघाट जाने के लिए कोपागंज बाजार स्थित सवारी जीप में बैठे थे। उसी समय एक सिपाही वहां पहुंचा और सीट खाली करने को कहा।
कैलाश के इंकार करने पर सिपाही उन्हें जबरन थाने ले गया। जहां थानाध्यक्ष जेपी सिंह ने उन्हें बुरी तरह से पीटा। इस दौरान कैलाश राय के हाथ पैर में फैक्चर हो गया था। लेकिन उनकी तहरीर पर पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इस मामले को तत्कालीन नेता विपक्ष मुलायम सिंह यादव ने विधान सभा में उठाया था।
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इस दौरान मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे। उन्होंने इस मामले की जांच कराने का आदेश दिया। लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। तीन वर्ष बाद वर्ष 1994 में जब मुलायम सिंह मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश जारी किया था। इस तरह से राजनैतिक हस्तक्षेप पर तीन वर्ष बाद 1994 में इस मामले की रिपोर्ट कोपागंज थाने में दर्ज हुई। जिसकी विवेचना सीबीसीआईडी ने की। विवेचना के बाद सीबीसीआईडी ने आरोप पत्र कोर्ट में सौंपा।
इसमें तत्कालीन थानाध्यक्ष जेपी सिंह, दीवान रामनरेश यादव और सिपाही श्यामबाबू मिश्रा को आरोपी बनाया गया। कोर्ट में अभियोजन की तरफ से पैरवी करते हुए एपीओ विजय प्रकाश यादव ने वादी सहित कुल सात गवाहों को पेशकर अपने पक्षों को रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों के तर्को को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद जितेंद्र प्रताप सिंह को दोषी पाते हुए तीन वर्ष की सजा के साथ ही पांच हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। जबकि दिवान रामनरेश और सिपाही श्यामबाबू मिश्र को साक्ष्य के अभाव में दोष मुक्त कर दिया।
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मामले के अनुसार कोपागंज थाना क्षेत्र के शहरोज गांव निवासी कैलाश राय पुत्र बब्बन राय को नौ अक्तूबर 1991 को दोहरीघाट जाने के लिए कोपागंज बाजार स्थित सवारी जीप में बैठे थे। उसी समय एक सिपाही वहां पहुंचा और सीट खाली करने को कहा।
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कैलाश के इंकार करने पर सिपाही उन्हें जबरन थाने ले गया। जहां थानाध्यक्ष जेपी सिंह ने उन्हें बुरी तरह से पीटा। इस दौरान कैलाश राय के हाथ पैर में फैक्चर हो गया था। लेकिन उनकी तहरीर पर पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इस मामले को तत्कालीन नेता विपक्ष मुलायम सिंह यादव ने विधान सभा में उठाया था।
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इस दौरान मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे। उन्होंने इस मामले की जांच कराने का आदेश दिया। लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। तीन वर्ष बाद वर्ष 1994 में जब मुलायम सिंह मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश जारी किया था। इस तरह से राजनैतिक हस्तक्षेप पर तीन वर्ष बाद 1994 में इस मामले की रिपोर्ट कोपागंज थाने में दर्ज हुई। जिसकी विवेचना सीबीसीआईडी ने की। विवेचना के बाद सीबीसीआईडी ने आरोप पत्र कोर्ट में सौंपा।
इसमें तत्कालीन थानाध्यक्ष जेपी सिंह, दीवान रामनरेश यादव और सिपाही श्यामबाबू मिश्रा को आरोपी बनाया गया। कोर्ट में अभियोजन की तरफ से पैरवी करते हुए एपीओ विजय प्रकाश यादव ने वादी सहित कुल सात गवाहों को पेशकर अपने पक्षों को रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों के तर्को को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद जितेंद्र प्रताप सिंह को दोषी पाते हुए तीन वर्ष की सजा के साथ ही पांच हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। जबकि दिवान रामनरेश और सिपाही श्यामबाबू मिश्र को साक्ष्य के अभाव में दोष मुक्त कर दिया।