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Mau News: जमीन पर पड़े शहीद सैनिकों के शव देखकर बढ़ता था गुस्सा और जोश

Thu, 08 May 2025 12:04 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 08 May 2025 12:04 AM IST
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Seeing the bodies of martyred soldiers lying on the ground, anger and enthusiasm increased
पिपरीडीह। साल 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई जंग में लड़ाई लड़ने और दुश्मनों का छक्के छुड़ाने वाले राष्ट्रपति पदक से पुरस्कृत मऊ सदर तहसील के खरगजेपुर गांव के मौजा मजखनी निवासी लेफ्टिनेंट कैप्टन पलटू सिंह लड़ाई के 54 साल बाद भी युद्ध के मंजर को याद कर उत्साहित हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि 1971 की जंग 14 दिनों तक चली। भारतीय सेना के आरमर कोर में तैनात सूबेदार मेजर पलटू सिंह ने बताया कि वह मैकेनिकल यूनिट में तैनात थे। बताया कि मैं सेना के फ्रंट कोर को सपोर्ट करता था। बताया कि जंग के दौरान दुश्मन के जहाज जब कभी भी भारत की सीमा के करीब आते तो मुस्तैद भारतीय एयरफोर्स के विमान उन्हें खदेड़ देते थे।
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उन्होंने बताया कि युद्ध के दौरान रात में काफी डर और भय का माहौल था। दुश्मन की मिसाइल और बमबारी कब मौत का सबब बन जाएगी। इसको लेकर हमेशा जान हथेली पर रहती थी। बताया कि उनके यूनिट में ही 14 सैनिक शहीद हुए थे। उनकी शहादत का दृश्य आज भी आंखों के सामने घूमता है। मैदान में शहीद सैनिकों को देखकर गुस्सा के साथ जोश बढ़ जाता था। भारत की तरफ से जवाबी कार्रवाई में हजरीरें पाकिस्तानी सैनिक भी मारे गए। कहा कि भारत की कार्रवाई से आतंकवादियों और दुश्मनों का हौसला पस्त हो गया है। बोला कि आमने-सामने की जंग में पाकिस्तान कहीं भी भारतीय सैनिकों और एयर फोर्स के सामने नहीं टिक पाएगा।
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