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अनियमितता के आरोप में सेक्रेटरी निलंबित
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मऊ। कमीशन न मिलने पर पात्रों को भी अपात्र घोषित करने में सचिव जरा भी संकोच नहीं कर रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण में रतनपुरा ग्राम पंचायत में देखने को मिला है। रतनपुरा गांव के तीन पात्र लोगों को पात्रता के बावजूद सचिव ने दबंगई का परिचय देते हुए अपात्र घोषित कर दिया। उनकी जगह अपात्रों को आवास दे दिए गए। शिकायत होने पर कराई गई जांच में मामला उजागर हुआ।
त्रिस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने सेक्रेटरी को निलंबित कर दिया है। सेक्रेटरी को ब्लाक पर संबद्ध कर दिया गया है। प्रकरण की जांच बीडीओ मुहम्मदाबाद गोहना को सौंपी गई है। उन्हें एक माह में विस्तृत जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
रतनपुरा ग्राम पंचायत के अरिंवद राम की शिकायत पर डीएम के निर्देश पर बीडीओ रतनपुरा, सहायक विकास अधिकारी कृषि और उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी मऊ की त्रिस्तरीय जांच समिति गठित की गई। जांच समिति ने पाया कि रतनपुरा निवासी रामनाथ के दो बेटे पिता के साथ चार कमरों के पक्के मकान में रहते हैं। रामनाथ का एक बेटा अरविंद राम (बीडीसी) नहर के किनारे अव्यस्थित कटरैन और झोपड़ी में साथ रहता है।
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गांव के सचिव वरुण कुमार ने अरविंद को अपात्र घोषित कर आवास आवंटित नहीं किया। इसी प्रकार झोपड़ी डालकर रहने वाले रतनपुरा के वीरेंद्र और दुर्गा पत्नी मुन्ना गुप्ता की भी पात्रता होने के बावजूद सचिव ने अपात्र घोषित कर दिया है। इस प्रकार की गड़बड़ी के मामले में सचिव वरुण कुमार को दोषी पाया गया।
जांच समिति ने 27 सितंबर 2021 को गांव में जाकर स्थलीय जांच किया था। जांच समिति ने 14 अक्टूबर को अपनी जांच आख्या प्रस्तुत किया। डीएम द्वारा 22 अक्टूबर को अनुमोदन किए जाने के बाद संयुक्त मजिस्ट्रेट/प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी अजय कुमार गौतम ने सचिव वरुण कुमार को निलंबित कर दिया। प्रकरण की जांच खंड विकास अधिकारी मुहम्मदबाद गोहना को सौंपी गई है। इस संबंध में प्रभारी डीपीआरओ अजय कुमार गौतम का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार अनियमितता के दोषी सचिव को निलंबित किया गया है। प्रकरण विस्तृत जांच बीडीओ मुहम्मदाबाद गोहना को सौंपी गई है।
प्रधान और बीडीसी ने भी की शिकायत
रतनपुरा। गाढ़ा के प्रधान कन्हैया लाल और पूर्व प्रधान किन्नू राजभर और रतनपुरा के पूर्व प्रधान रामाश्रय मौर्य ने सचिव वरूण कुमार की कार्यप्रणाली और दबंगई की शिकायत किया है। इन लोगों का कहना है कि सचिव शासन की मंशा के विपरीत कार्य करते हैं। इससे शासन प्रशासन की छवि प्रभावित हो रही है।ये अधिकारियों की बातों की भी अनदेखी करते हैं। बीडीसी अरविंद राम का कहना है कि सचिव सरकारी योजनाओं की गाइड लाइन की तनिक परवाह नहीं करते हैं।
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त्रिस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने सेक्रेटरी को निलंबित कर दिया है। सेक्रेटरी को ब्लाक पर संबद्ध कर दिया गया है। प्रकरण की जांच बीडीओ मुहम्मदाबाद गोहना को सौंपी गई है। उन्हें एक माह में विस्तृत जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
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रतनपुरा ग्राम पंचायत के अरिंवद राम की शिकायत पर डीएम के निर्देश पर बीडीओ रतनपुरा, सहायक विकास अधिकारी कृषि और उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी मऊ की त्रिस्तरीय जांच समिति गठित की गई। जांच समिति ने पाया कि रतनपुरा निवासी रामनाथ के दो बेटे पिता के साथ चार कमरों के पक्के मकान में रहते हैं। रामनाथ का एक बेटा अरविंद राम (बीडीसी) नहर के किनारे अव्यस्थित कटरैन और झोपड़ी में साथ रहता है।
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गांव के सचिव वरुण कुमार ने अरविंद को अपात्र घोषित कर आवास आवंटित नहीं किया। इसी प्रकार झोपड़ी डालकर रहने वाले रतनपुरा के वीरेंद्र और दुर्गा पत्नी मुन्ना गुप्ता की भी पात्रता होने के बावजूद सचिव ने अपात्र घोषित कर दिया है। इस प्रकार की गड़बड़ी के मामले में सचिव वरुण कुमार को दोषी पाया गया।
जांच समिति ने 27 सितंबर 2021 को गांव में जाकर स्थलीय जांच किया था। जांच समिति ने 14 अक्टूबर को अपनी जांच आख्या प्रस्तुत किया। डीएम द्वारा 22 अक्टूबर को अनुमोदन किए जाने के बाद संयुक्त मजिस्ट्रेट/प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी अजय कुमार गौतम ने सचिव वरुण कुमार को निलंबित कर दिया। प्रकरण की जांच खंड विकास अधिकारी मुहम्मदबाद गोहना को सौंपी गई है। इस संबंध में प्रभारी डीपीआरओ अजय कुमार गौतम का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार अनियमितता के दोषी सचिव को निलंबित किया गया है। प्रकरण विस्तृत जांच बीडीओ मुहम्मदाबाद गोहना को सौंपी गई है।
प्रधान और बीडीसी ने भी की शिकायत
रतनपुरा। गाढ़ा के प्रधान कन्हैया लाल और पूर्व प्रधान किन्नू राजभर और रतनपुरा के पूर्व प्रधान रामाश्रय मौर्य ने सचिव वरूण कुमार की कार्यप्रणाली और दबंगई की शिकायत किया है। इन लोगों का कहना है कि सचिव शासन की मंशा के विपरीत कार्य करते हैं। इससे शासन प्रशासन की छवि प्रभावित हो रही है।ये अधिकारियों की बातों की भी अनदेखी करते हैं। बीडीसी अरविंद राम का कहना है कि सचिव सरकारी योजनाओं की गाइड लाइन की तनिक परवाह नहीं करते हैं।