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सुरक्षा नियमों को ताक पर धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रहे स्कूली वाहन
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मऊ। बच्चों की जान से खिलवाड़ कर सड़कों पर दौड़ रहे अनफिट स्कूली वाहनों के खिलाफ चला अभियान खानापूर्ति ही नजर आ रहा है। सड़कों पर अभी भी बेेखौफ स्कूल संचालक अनफिट स्कूली वाहनों को सड़कों पर दौड़ा रहे हैं। विभाग की तरफ से चलाए गए अभियान के तहत वाहनों का चालान कर इतिश्री कर दी गई। हाल ही मेें गाजियाबाद जिले हुई स्कूली बस से एक छात्र की मौत की हुई घटना के बाद भी न तो विभागीय अधिकारी और न ही स्कूल संचालक गंभीर नजर आ रहे हैं। स्कूल संचालक मानक के अनुरूप स्कूल बस चलाने का दावा कर रहे हैं। विभाग की तरफ से 35 अनफिट स्कूली वाहन संचालकों को नोटिस जारी किया गया है।
जिले में 542 निजी स्कूलों मेें लगभग 700 वाहन पंजीकृत हैं। जिसमें विभागीय अभिलेखों में 367 स्कूल बसें तथा 333 छोटे वाहन स्टाफ को लाने के नाम पर पंजीकृत हैं। गाजियाबाद में स्कूली बस में बच्चे की मौत के बाद परिवहन विभाग जागा और स्कूली वाहनों की फिटनेस जांचने के लिए अभियान शुरू किया। इससे पहले न तो अभियान चलाया गया न ही वाहनों की फिटनेस की जांच की गई। केवल अनफिट वाहनों को नोटिस भेज दिया जाता था। यही वजह रही कि धड़ल्ले से अनफिट वाहनों का संचालन होता रहा। इन वाहनों की फिटनेस खत्म होने के साथ ही विंडो ग्रिल, अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बाक्स भी नहीं थे। बच्चों को भी भूसे की तरह भरकर ले जाया जाता रहा। हालांकि अभियान चलने के बाद इनमें से काफी संख्या में चालान किए गए, लेकिन वाहनों को सीज नहीं किया गया। जिसके कारण अभी भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर स्कूली वाहनों का संचालन बंद नहीं हुआ है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अभियान के चलने से पहले 350 स्कूली वाहन अनफिट चल रहे थे। अभियान के तहत 372 स्कूली वाहनों की चेकिंग की गई। जिसमें 306 स्कूल वाहन मानक के अनुरूप पाए गए। 66 अनफिट स्कूली वाहनों का चालान कर बंद कर दिया गया। तमाम अभियान चलाने के बाद भी अनफिट टेंपो, मैजिक वैन, स्कूल बस धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रहे हैं। सब कुछ जानने के बाद भी विभागीय अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
अनफिट स्कूली वाहन बढ़ते रहते हैं। 35 स्कूल वाहन संचालकों को नोटिस जारी गई है।छोटे सवारी वाहन से स्कूली बच्चे को ले जाना गैर कानूनी है। ऐसे संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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रमेश चंद्र श्रीवास्तव
एआरटीओ
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जिले में 542 निजी स्कूलों मेें लगभग 700 वाहन पंजीकृत हैं। जिसमें विभागीय अभिलेखों में 367 स्कूल बसें तथा 333 छोटे वाहन स्टाफ को लाने के नाम पर पंजीकृत हैं। गाजियाबाद में स्कूली बस में बच्चे की मौत के बाद परिवहन विभाग जागा और स्कूली वाहनों की फिटनेस जांचने के लिए अभियान शुरू किया। इससे पहले न तो अभियान चलाया गया न ही वाहनों की फिटनेस की जांच की गई। केवल अनफिट वाहनों को नोटिस भेज दिया जाता था। यही वजह रही कि धड़ल्ले से अनफिट वाहनों का संचालन होता रहा। इन वाहनों की फिटनेस खत्म होने के साथ ही विंडो ग्रिल, अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बाक्स भी नहीं थे। बच्चों को भी भूसे की तरह भरकर ले जाया जाता रहा। हालांकि अभियान चलने के बाद इनमें से काफी संख्या में चालान किए गए, लेकिन वाहनों को सीज नहीं किया गया। जिसके कारण अभी भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर स्कूली वाहनों का संचालन बंद नहीं हुआ है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अभियान के चलने से पहले 350 स्कूली वाहन अनफिट चल रहे थे। अभियान के तहत 372 स्कूली वाहनों की चेकिंग की गई। जिसमें 306 स्कूल वाहन मानक के अनुरूप पाए गए। 66 अनफिट स्कूली वाहनों का चालान कर बंद कर दिया गया। तमाम अभियान चलाने के बाद भी अनफिट टेंपो, मैजिक वैन, स्कूल बस धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रहे हैं। सब कुछ जानने के बाद भी विभागीय अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
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अनफिट स्कूली वाहन बढ़ते रहते हैं। 35 स्कूल वाहन संचालकों को नोटिस जारी गई है।छोटे सवारी वाहन से स्कूली बच्चे को ले जाना गैर कानूनी है। ऐसे संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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