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कहर बरपा रही सरयू नदी, परेशानी स्थिर नहीं
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मऊ। सरयू नदी के जलस्तर में घटाव होने के बाद भी नदी के रौद्र रुप धारण करने से तटवर्ती इलाके के लोगों की धड़कनें बढ़ती ही जा रही है। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 20 सेमी का घटाव दर्ज किया गया। नवली गांव के पास कटान तेजी से हो रही है। ग्रामीण अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर रखने लगे हैं। नदी के रुख से तटवर्ती इलाके के लोग दहशत में जी रहे हैं। नदी की लहरें भारतमाता मंदिर की दीवारों पर टकराने से ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। नदी के जलस्तर में घटाव का क्रम जारी है।
क्षेत्र के नवली गांव के सामने देवारा में उपजाऊ भूमि नदी में समाती जा रही है। नदी के जलस्तर पर नजर डाले तो बुधवार को नदी का जलस्तर 69.90 मीटर रहा। जबकि मंगलवार को 70.10 मीटर रहा। जलस्तर घटने के बाद भी बंधों पर दबाव बना हुआ है। वहीं नदी के घटने के बाद भी एक ओर जहां नगर की ऐतिहासिक धरोहरों मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, दुर्गा मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, डीह बाबा का मंदिर, लोक निर्माण का डाक बंगला, हनुमान मंदिर तथा शाही मस्जिद पर खतरा मंडरा रहा है। वहीं तटवर्ती क्षेत्रों में कटान होने से ग्रामीण सहमे हुए है। कुछ स्थानों पर घाघरा जहां तटबंध से दूर थी, लेकिन नदी तेजी से कटान करते हुए तटबंध की तरफ बढ़ रही है।
नदी बेलौली, गौरीडीह, बीबीपुर, बहादुरपुर, नवली, रामपुर धनौली, नईबाजार, चिऊटीडांड़ सहित आदि गांव की के पास कटान तेजी से कर रही है, जिससे कृषि योग्य जमीन नदी की धारा में विलीन हो रही थी। नवली गांव के पास नदी की धारा महुला गढ़वल तटबंध से कुछ ही दूरी पर है। नवली गांव के ग्रामीण श्रृंगेश, जियुत, रामदुलारी, शिला देवी, रवि, श्यामसुंदर, मयंक, दीनानाथ सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव से नदी की दूरी तीन किलोमीटर से अधिक थी, लेकिन जमीन कटती गई और दूरी घटती गई।
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वर्तमान में गांव से नदी की दूरी मात्र 70 मीटर से भी कम ही रह गई है। जलस्तर घटने के साथ ही कटान गति पकड़ रही है। दो दिन के अंदर नदी ने 10 मीटर से ज्यादा कटान हो चुका है। नदी मध्यम गति से गांव की ओर बढ़ रही है। नदी का रुख भांपकर गांव वालों ने कीमती संपत्ति सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दी है। नदी प्रतिदिन कृषि योग्य भूमि लगभग आठ से दस बीघा जमीन काट रही है।
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क्षेत्र के नवली गांव के सामने देवारा में उपजाऊ भूमि नदी में समाती जा रही है। नदी के जलस्तर पर नजर डाले तो बुधवार को नदी का जलस्तर 69.90 मीटर रहा। जबकि मंगलवार को 70.10 मीटर रहा। जलस्तर घटने के बाद भी बंधों पर दबाव बना हुआ है। वहीं नदी के घटने के बाद भी एक ओर जहां नगर की ऐतिहासिक धरोहरों मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, दुर्गा मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, डीह बाबा का मंदिर, लोक निर्माण का डाक बंगला, हनुमान मंदिर तथा शाही मस्जिद पर खतरा मंडरा रहा है। वहीं तटवर्ती क्षेत्रों में कटान होने से ग्रामीण सहमे हुए है। कुछ स्थानों पर घाघरा जहां तटबंध से दूर थी, लेकिन नदी तेजी से कटान करते हुए तटबंध की तरफ बढ़ रही है।
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नदी बेलौली, गौरीडीह, बीबीपुर, बहादुरपुर, नवली, रामपुर धनौली, नईबाजार, चिऊटीडांड़ सहित आदि गांव की के पास कटान तेजी से कर रही है, जिससे कृषि योग्य जमीन नदी की धारा में विलीन हो रही थी। नवली गांव के पास नदी की धारा महुला गढ़वल तटबंध से कुछ ही दूरी पर है। नवली गांव के ग्रामीण श्रृंगेश, जियुत, रामदुलारी, शिला देवी, रवि, श्यामसुंदर, मयंक, दीनानाथ सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव से नदी की दूरी तीन किलोमीटर से अधिक थी, लेकिन जमीन कटती गई और दूरी घटती गई।
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वर्तमान में गांव से नदी की दूरी मात्र 70 मीटर से भी कम ही रह गई है। जलस्तर घटने के साथ ही कटान गति पकड़ रही है। दो दिन के अंदर नदी ने 10 मीटर से ज्यादा कटान हो चुका है। नदी मध्यम गति से गांव की ओर बढ़ रही है। नदी का रुख भांपकर गांव वालों ने कीमती संपत्ति सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दी है। नदी प्रतिदिन कृषि योग्य भूमि लगभग आठ से दस बीघा जमीन काट रही है।