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सरयू नदी का जलस्तर स्थिर लेकिन खतरा बरकरार
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दोहरीघाट/दुबारी (मऊ)। सरयू का जलस्तर शुक्रवार को पूरे दिन स्थिर रहा। जबकि बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर 70 मीटर पर रहा। पिछले 24 घंटों से नदी का जलस्तर स्थिर है लेकिन खतरा अभी भी बरकरार है। सरयू नदी का पानी लाल निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। इससे तटवर्ती इलाकों सहित ऐतिहासिक धरोहरों पर खतरा मंडरा रहा है। नदी की लहरें भारत माता मंदिर की दीवारों पर टकरा रही है। इससे मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, दुर्गा मंदिर, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला, हनुमान मंदिर, डीह बाबा का मंदिर आदि ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
वहीं घाघरा के तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नई बाजार, नवली, बहादुरपुर, सरया,पतनई, ठाकुरगांव, बीवीपुर, ताहिरपुर, जमीरा चौराडीह, कोरौली, बेलौली, पाऊस, ठिकरहिया, महुआबारी, रसूलपुर, सूरजपुर सहित विभिन्न गांवो में बाढ़ आने की आशंका से लोग दहशत में हैं। वही गावों में पशुओं के चारे की समस्या खड़ी हो गई है। नदी के बढ़ते जलस्तर व बरसात से खेतो में पानी जमा होने से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही है।
मधुबन तहसील क्षेत्र के उत्तरी दिशा में स्थित सरयू नदी का लगातार जलस्तर बढ़ने के कारण तटवर्ती क्षेत्र में अन्य क्षेत्र में दर्जनों गाँव एवं विद्यालय घाघरा के टापू में तब्दील हो गए हैं।दर्जनों गाँवों के संपर्क मार्ग और मुख्य मार्ग जलमग्न हो गए हैं। हजारों एकड़ क्षेत्रफल में फसलें डूब गई हैं। धर्मपुर के बिंटोलिया से दुबारी मोलनापुर मौजा में लगभग तीन किलोमीटर कटान जारी है, उधर घाघरा नदी का जलस्तर परसिया जयराम गिरि के हाहा नाला का रेगुलेटर पर जलस्तर 66.00 मीटर तक जा पहुंचा है। जबकि खतरा निशान 66.31 तक है जबकि दूसरे तरफ हाहा नाला मीटर 66.30 तक पहुंचने के कारण समस्या बढ़ी हैं।
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घाघरा नदी के जलस्तर बढने के कारण बिंटोलिया,न यी बस्ती, जरलहवा ,हाता, टांड़ी, खैरा, नन्द का पूरा ,बिशुन का पुरा, भगत का पूरा, बईरकंटा ,चौहानपुर चक्की मूसाडोही, लौवासाथ, अहिरुपुर आदि गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इसके अलावा धर्मपुर से सुग्गीचौरी, बिंटोलिया से नयी बस्ती, गोबरही से बईरकंटा, भगत का पुरा, बिग्रहपुर से भवरुंपुर, तिघरा से अहिरुपुर तक के मार्ग सरयू नदी के पानी में डूब गए हैं। इन गांवों का आपस में संपर्क कट गया है। इसके साथ ही प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय बैरियाडीह, प्राथमिक विद्यालय, खैरा ,हरिजन मिश्रित विद्यालय, धूस ,दुबारी गोपालपुर से लौवासाथ तक टापू बन गए हैं। पानी से घिरे इन गांवों के लिए प्रशासन द्वारा नावों का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। टापू वाले गांवों के लोग पानी में घुसकर बाजार हाट जा रहे हैं। तटवर्ती क्षेत्र के जो गांव नदी के पानी से टापू बन गए हैं। उनमें गांव के ग्रामीणों को पशुओं के लिए चारा की समस्या बढ़ी है।
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वहीं घाघरा के तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नई बाजार, नवली, बहादुरपुर, सरया,पतनई, ठाकुरगांव, बीवीपुर, ताहिरपुर, जमीरा चौराडीह, कोरौली, बेलौली, पाऊस, ठिकरहिया, महुआबारी, रसूलपुर, सूरजपुर सहित विभिन्न गांवो में बाढ़ आने की आशंका से लोग दहशत में हैं। वही गावों में पशुओं के चारे की समस्या खड़ी हो गई है। नदी के बढ़ते जलस्तर व बरसात से खेतो में पानी जमा होने से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही है।
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मधुबन तहसील क्षेत्र के उत्तरी दिशा में स्थित सरयू नदी का लगातार जलस्तर बढ़ने के कारण तटवर्ती क्षेत्र में अन्य क्षेत्र में दर्जनों गाँव एवं विद्यालय घाघरा के टापू में तब्दील हो गए हैं।दर्जनों गाँवों के संपर्क मार्ग और मुख्य मार्ग जलमग्न हो गए हैं। हजारों एकड़ क्षेत्रफल में फसलें डूब गई हैं। धर्मपुर के बिंटोलिया से दुबारी मोलनापुर मौजा में लगभग तीन किलोमीटर कटान जारी है, उधर घाघरा नदी का जलस्तर परसिया जयराम गिरि के हाहा नाला का रेगुलेटर पर जलस्तर 66.00 मीटर तक जा पहुंचा है। जबकि खतरा निशान 66.31 तक है जबकि दूसरे तरफ हाहा नाला मीटर 66.30 तक पहुंचने के कारण समस्या बढ़ी हैं।
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घाघरा नदी के जलस्तर बढने के कारण बिंटोलिया,न यी बस्ती, जरलहवा ,हाता, टांड़ी, खैरा, नन्द का पूरा ,बिशुन का पुरा, भगत का पूरा, बईरकंटा ,चौहानपुर चक्की मूसाडोही, लौवासाथ, अहिरुपुर आदि गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इसके अलावा धर्मपुर से सुग्गीचौरी, बिंटोलिया से नयी बस्ती, गोबरही से बईरकंटा, भगत का पुरा, बिग्रहपुर से भवरुंपुर, तिघरा से अहिरुपुर तक के मार्ग सरयू नदी के पानी में डूब गए हैं। इन गांवों का आपस में संपर्क कट गया है। इसके साथ ही प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय बैरियाडीह, प्राथमिक विद्यालय, खैरा ,हरिजन मिश्रित विद्यालय, धूस ,दुबारी गोपालपुर से लौवासाथ तक टापू बन गए हैं। पानी से घिरे इन गांवों के लिए प्रशासन द्वारा नावों का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। टापू वाले गांवों के लोग पानी में घुसकर बाजार हाट जा रहे हैं। तटवर्ती क्षेत्र के जो गांव नदी के पानी से टापू बन गए हैं। उनमें गांव के ग्रामीणों को पशुओं के लिए चारा की समस्या बढ़ी है।