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बिंदटोलिया गांव को लीलने को बेताब है सरयू नदी
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दुबारी। मधुबन तहसील क्षेत्रके उत्तरी दिशा में स्थित धर्मपुर बिशुनपुर के बिंदटोलिया गांव के पास कटान तेज होने से आसपास के लोगों को भूमिहीन तथा बेघर होने की चिंता सताने लगी है। तीन दिन के अंदर चार कटान पीड़ितों का आशियाना नदी में विलीन हो चुका है। अब लोग सुरक्षित स्थानों को पलायन करने लगे हैं। साथ ही 18 कटान पीड़ितों ने मकानों को खाली कर दिया है। इसके बावजूद न तो प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधियों ने सुधि लेने की जहमत उठाया है।
सरयू नदी के लगातार मधुबन के देवारा में कहर बरपाने से कटान पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। क्षेत्र के धर्मपुर बिशुनपुर, दुबारी, मोलनापुर के लगभग तीन किलोमीटर के दायरे में कटान प्रतिदिन हो रही है। कहीं तीन दिन के अंदर चार आशियाने नदी में समा गए। प्रतिदिन उपजाऊं भूमि नदी में विलीन हो रही है। दुबारी के खैरा पुरवा में कटान की रफ्तार तेज हो गई है। नदी के रौद्र रुप देख लोग अपने मकानों को खाली कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं। बिंदटोलिया गांव के 18 लोगों ने मकान को खाली कर दिया है। कटान पीड़ितों का आरोप है कि जब कटान रोकने के लिए हम लोग खरपतवार तथा झाड़ियों को डाल कर कटान को रोक रहे थे। इसके बाद प्रशासन की तरफ से मिट्टी भरी बोरी पड़नी शुरू हुई तो तहसील के अधिकारी एवं राजस्व टीम और जनप्रतिनिधियों का आना जाना लगा रहता था। लेकिन कटान तेज हो गई है तो न तो कोई अधिकारी और न ही कोई जनप्रतिनिधि सुधि ले रहे हैं। विरेंद्र, महेंद्र, रविंद्र, राजेंद्र, अजीत, जयप्रकाश हरिचंद, सुरेंद्र, दीपचंद, लल्लन,बब्बन, पिंटू, जगदंबा, जीतउबंधन, हरिहर, रुदल उदयभान बहादुर, संजय, प्रदीप, दिनेश, पुर्नवासी आदि का मकान नदी में विलीन हो चुका है। लोग खानाबदोश की जिंदगी जीने को विवश हैं। नदी के कहर बरपाने का सिलसिला चलता रहा तो बिंदटोलिया का अस्तित्व मिट सकता है।
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सरयू नदी के लगातार मधुबन के देवारा में कहर बरपाने से कटान पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। क्षेत्र के धर्मपुर बिशुनपुर, दुबारी, मोलनापुर के लगभग तीन किलोमीटर के दायरे में कटान प्रतिदिन हो रही है। कहीं तीन दिन के अंदर चार आशियाने नदी में समा गए। प्रतिदिन उपजाऊं भूमि नदी में विलीन हो रही है। दुबारी के खैरा पुरवा में कटान की रफ्तार तेज हो गई है। नदी के रौद्र रुप देख लोग अपने मकानों को खाली कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं। बिंदटोलिया गांव के 18 लोगों ने मकान को खाली कर दिया है। कटान पीड़ितों का आरोप है कि जब कटान रोकने के लिए हम लोग खरपतवार तथा झाड़ियों को डाल कर कटान को रोक रहे थे। इसके बाद प्रशासन की तरफ से मिट्टी भरी बोरी पड़नी शुरू हुई तो तहसील के अधिकारी एवं राजस्व टीम और जनप्रतिनिधियों का आना जाना लगा रहता था। लेकिन कटान तेज हो गई है तो न तो कोई अधिकारी और न ही कोई जनप्रतिनिधि सुधि ले रहे हैं। विरेंद्र, महेंद्र, रविंद्र, राजेंद्र, अजीत, जयप्रकाश हरिचंद, सुरेंद्र, दीपचंद, लल्लन,बब्बन, पिंटू, जगदंबा, जीतउबंधन, हरिहर, रुदल उदयभान बहादुर, संजय, प्रदीप, दिनेश, पुर्नवासी आदि का मकान नदी में विलीन हो चुका है। लोग खानाबदोश की जिंदगी जीने को विवश हैं। नदी के कहर बरपाने का सिलसिला चलता रहा तो बिंदटोलिया का अस्तित्व मिट सकता है।
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