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हाहा नाला गेज पर खतरा बिंदु से सात सेमी ऊपर बह रही सरयू नदी
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दुबारी। सरयू नदी का जलस्तर खतरा बिंदु से ऊपर पहुंचने से मधुबन तहसील के देवारा के लोगों को नदी के कहर बरपाने की चिंता सताने लगी है। तीन दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क मार्ग डूब जाने से आवागमन बंद हो गया है। पर्याप्त नाव की व्यवस्था न होने से लोगों को जान जोखिम में डालकर आना जाना पड़ रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं।
सरयू नदी का जलस्तर खतरा बिंदु से सात सेमी ऊपर बहने से मधुबन तहसील क्षेत्र के देवारों के लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो मंगलवार को परसिया जयराम गिरि हाहा नाला रेगुलेटर पर 66.38 मीटर रहा। जबकि खतरा निशान 66.31 मीटर है। अब तटवर्ती क्षेत्र के लोगों को सन 1998 में आई बाढ़ की तरह नुकसान की चिंता सताने लगी है। वर्ष 1998 में नदी का जलस्तर 67.45 मीटर तक पहुंच गया था। नदी खतरा बिंदु के पार करने के बाद तीन दर्जन गांवों के संपर्क मार्ग डूब जाने से आवागमन बंद हो गया है। दुबारी से बिंदटोलिया सहित कई स्थानों पर दो फीट पानी लग गया है। सरकारी तथा मान्यता प्राप्त विद्यालयों के अध्यापकों को दुबारी बिंदटोलिया मार्ग से आना जाना मुश्किल हो गया है। हरिजन मिश्रित प्राथमिक विद्यालय के अध्यापक विद्यालय नहीं जा पाए। क्षेत्र के धुस पुरवा, भगत पुरवा ,जरलहवा पुरवा, हाता पुरवा, टाड़ी पुरवा, मनमन का पुरा, पब्बर का पुरा, बइरकंटा पुरवा , बिशुन पुरवा, सुन्नर का पुरव, खैरा, तिघरा, अहिरुपुर, बैरियाडीह, बरोहा, लौवासाथ, चक्कीमुसाडोही सहित दर्जनों गांवों की हजारों एकड़ जलमग्न हो गई है।
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सरयू नदी का जलस्तर खतरा बिंदु से सात सेमी ऊपर बहने से मधुबन तहसील क्षेत्र के देवारों के लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो मंगलवार को परसिया जयराम गिरि हाहा नाला रेगुलेटर पर 66.38 मीटर रहा। जबकि खतरा निशान 66.31 मीटर है। अब तटवर्ती क्षेत्र के लोगों को सन 1998 में आई बाढ़ की तरह नुकसान की चिंता सताने लगी है। वर्ष 1998 में नदी का जलस्तर 67.45 मीटर तक पहुंच गया था। नदी खतरा बिंदु के पार करने के बाद तीन दर्जन गांवों के संपर्क मार्ग डूब जाने से आवागमन बंद हो गया है। दुबारी से बिंदटोलिया सहित कई स्थानों पर दो फीट पानी लग गया है। सरकारी तथा मान्यता प्राप्त विद्यालयों के अध्यापकों को दुबारी बिंदटोलिया मार्ग से आना जाना मुश्किल हो गया है। हरिजन मिश्रित प्राथमिक विद्यालय के अध्यापक विद्यालय नहीं जा पाए। क्षेत्र के धुस पुरवा, भगत पुरवा ,जरलहवा पुरवा, हाता पुरवा, टाड़ी पुरवा, मनमन का पुरा, पब्बर का पुरा, बइरकंटा पुरवा , बिशुन पुरवा, सुन्नर का पुरव, खैरा, तिघरा, अहिरुपुर, बैरियाडीह, बरोहा, लौवासाथ, चक्कीमुसाडोही सहित दर्जनों गांवों की हजारों एकड़ जलमग्न हो गई है।
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