{"_id":"2692545e40bde2c2ba069eb55a94d2a7","slug":"ritual-programme-hindi-news-2","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘भक्तों से दूर नहीं हैं भगवान’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘भक्तों से दूर नहीं हैं भगवान’
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Fri, 03 Apr 2015 12:06 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोपागंज स्थित प्राचीन गौरीशंकर मंदिर में दिव्य ज्ञान ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित श्रीहरि कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन गुरुवार को साध्वी प्रज्ञा भारती ने लोगों से प्रेम और भक्ति का महत्व समझाया। कहा प्रेम और भक्ति के बिना मनुष्य की भक्ति तेल और पानी की तरह है।
कथा के दौरान लोगों को केवट प्रसंग का वर्णन करते हुए प्रज्ञा भारती ने कहा कि जब प्रभु श्रीराम केवट के सामने गए तो केवट ने कहा कि प्रभु आज समाज आपको भगवान मानता है।
ऐसे में आपके पांव धोने के पूर्व मैं आपको नाव पर नहीं चढ़ा सकता। केवट के प्रेम भक्ति में आकर प्रभु श्रीराम अपना पैर धुलवा लेते हैं। बताया कि गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा है कि - जाने बिन न होय परतीति, बिन परतीति होय नहीं प्रीति अर्थात बिना भक्ति के भगवान को पाना मुश्किल है।
विज्ञापन
भगवान को देखने के लिए दिव्य दृष्टि की आवश्यकता होती है। जैसे दही के अंदर व्याप्त सूक्ष्म जीव को देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी यंत्र की आवश्यकता होती है वैसे ही ईश्वर को देखने के लिए तीसरा नेत्र जरुरी होता है। कथा के दौरान ब्रम्हेशनंद महात्मा विष्णु के अलावा गणेश राय,
विनोद तिवारी, राजेंद्र शर्मा, दुर्गेश गुप्ता, डा. अजय यादव, भोला सिंह सहित तमाम पुरुष व महिलाएं मौजूद रहे। े आयोजक प्रमोद राय ने सभी श्रोताओं के प्रति आभार प्रकट किया।
विज्ञापन
कथा के दौरान लोगों को केवट प्रसंग का वर्णन करते हुए प्रज्ञा भारती ने कहा कि जब प्रभु श्रीराम केवट के सामने गए तो केवट ने कहा कि प्रभु आज समाज आपको भगवान मानता है।
विज्ञापन
ऐसे में आपके पांव धोने के पूर्व मैं आपको नाव पर नहीं चढ़ा सकता। केवट के प्रेम भक्ति में आकर प्रभु श्रीराम अपना पैर धुलवा लेते हैं। बताया कि गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा है कि - जाने बिन न होय परतीति, बिन परतीति होय नहीं प्रीति अर्थात बिना भक्ति के भगवान को पाना मुश्किल है।
विज्ञापन
भगवान को देखने के लिए दिव्य दृष्टि की आवश्यकता होती है। जैसे दही के अंदर व्याप्त सूक्ष्म जीव को देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी यंत्र की आवश्यकता होती है वैसे ही ईश्वर को देखने के लिए तीसरा नेत्र जरुरी होता है। कथा के दौरान ब्रम्हेशनंद महात्मा विष्णु के अलावा गणेश राय,
विनोद तिवारी, राजेंद्र शर्मा, दुर्गेश गुप्ता, डा. अजय यादव, भोला सिंह सहित तमाम पुरुष व महिलाएं मौजूद रहे। े आयोजक प्रमोद राय ने सभी श्रोताओं के प्रति आभार प्रकट किया।