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नाकाफी साबित हो रही है राहत सामग्री
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
Updated Thu, 31 Aug 2017 11:50 PM IST
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मधुबन के दुबारी बंधे पर शरण लिए बाढ़ पीड़ित।
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घाघरा के तटवर्ती इलाकों में पानी हटने के बाद भी अभी लोगों की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। हालांकि प्रशासन द्वारा बाढ़ पीड़ितों को यथा संभव राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है।लेकिन बाढ़ के हालात से राहत सामग्री नाकाफी साबित हो रही है।बाढ़ के पानी के अभी घटने बढ़ने के कारण आज भी लोग बंधो तथा ऊंचे स्थानों पर झोपड़ी और प्लास्टिक आदि डालकर रहने को मजबूर हैं। जबकि चक्की मूसाडोही के लोग अभी भी जनपद देवरिया के तेलियां कला के स्कूल में शरण लिए हुए हैं।
घाघरा में आई बाढ़ से बाढ़ पीड़ितों का जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया था। दियारा में घाघरा के तटवर्ती क्षेत्रों में सबसे ज्यादा चक्की मूसाडोही,परसिया चौहानपुर, गजियापुर छावनी,गोइड़्हा,कुंवरपुरवा, बरोहा, बलुआ,मोलनापुर,बैरकंटा,भगत का पूरा, धुस,मनमन का पूरा, बिशुन का पूरा,पब्बर का पूरा, खैरा, सुंदर का पूरा,धर्मपुर टांडी के तीनों पुरवे, बिंद टोलिया नई बस्ती आदि गांव बाढ़ की जद में सबसे ज्यादा थे।
इन गांवों का संपर्क मार्ग जल भराव और पानी के तेज बहाव के कारण प्रभावित था। स्कूलों में पानी घुसने के कारण दियारा के कई स्कूल बंद कर दिए गए थे।पानी घटने लगा तो ग्रामीणों और प्रशासन ने राहत की सांस ली। बाढ़ के बढ़ते स्तर से लोंगो में खौफ की स्थिति बनी तो लोग अपना सामान भी समेटकर सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे।
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घाघरा में आई बाढ़ से बाढ़ पीड़ितों का जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया था। दियारा में घाघरा के तटवर्ती क्षेत्रों में सबसे ज्यादा चक्की मूसाडोही,परसिया चौहानपुर, गजियापुर छावनी,गोइड़्हा,कुंवरपुरवा, बरोहा, बलुआ,मोलनापुर,बैरकंटा,भगत का पूरा, धुस,मनमन का पूरा, बिशुन का पूरा,पब्बर का पूरा, खैरा, सुंदर का पूरा,धर्मपुर टांडी के तीनों पुरवे, बिंद टोलिया नई बस्ती आदि गांव बाढ़ की जद में सबसे ज्यादा थे।
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इन गांवों का संपर्क मार्ग जल भराव और पानी के तेज बहाव के कारण प्रभावित था। स्कूलों में पानी घुसने के कारण दियारा के कई स्कूल बंद कर दिए गए थे।पानी घटने लगा तो ग्रामीणों और प्रशासन ने राहत की सांस ली। बाढ़ के बढ़ते स्तर से लोंगो में खौफ की स्थिति बनी तो लोग अपना सामान भी समेटकर सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे।
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