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Mau News: जिले के नौ निजी मोटर ड्राइविंग स्कूलों की मान्यता खत्म
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मऊ। जिले में चल रहे नौ निजी मोटर ड्राइविंग स्कूलों की मान्यता खत्म हो गई है। निजी मोटर ड्राइविंग स्कूल संचालकों ने छह माह में हर वाहनों के लिए प्रशिक्षक नियुक्त करने और सभी को सिमुलेटर से प्रशिक्षण देने जैसी शर्तों को पूरा नहीं किया है। मात्र एक ही निजी मोटर ड्राइविंग स्कूल ही लोगों को वाहन चलाने का प्रशिक्षण दे सकता है।
मोटर ड्राइविंग स्कूल संचालकों को छह माह में हर वाहन के लिए प्रशिक्षक नियुक्त करने और सभी को सिमुलेटर से प्रशिक्षण देने का फरमान जारी किया गया था। टीम की जांच में जिले में चल रहे 10 निजी मोटर ड्राइविंग स्कूल में से नौ ड्राइविंग स्कूलों में प्रशिक्षण देने के पर्याप्त संसाधन नहीं मिले। प्रशिक्षण के नाम पर खानापूरी ही हो रही थी। मात्र एक ड्राइविंग स्कूल ही मानक पर खरा उतरा।
विभाग की तरफ से मानक को ताक पर रखकर संचालित हो रहे नौ निजी मोटर मोटर ड्राइविंग स्कूलों की मान्यता खत्म कर दिया है। नए नियम के अनुसार मोटर ड्राइविंग स्कूल संचालकों को छह माह में हर वाहनों के लिए प्रशिक्षक नियुक्त करने और सभी को सिमुलेटर से प्रशिक्षण देना होगा। 300 वर्ग फीट में व्याख्यान कक्ष, सिमुलेटर कक्ष के लिए 150 वर्ग फीट दो पहिया वाहन तथा 250 वर्ग फीट जगह मध्यम भारी वाहन के लिए अनिवार्य की गई है।
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पार्किंग किसी सार्वजनिक स्थान पर नहीं होगी। मानक संचालन प्रक्रिया के तहत छह माह में सारे इंतजाम पूरा करने वालों की ही मान्यता रहेगी। अधिकारियों की माने तो सड़क दुर्घटनाओं में कमी न आने की वजह लोगों को वाहन चलाने का सही प्रशिक्षण न मिलना माना जा रहा है। इस बाबत एआरटीओ सुहेल अहमद का कहना है कि जिले में नौ निजी मोटर ड्राइविंग स्कूलों की मान्यता खत्म कर दी गई है।
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मोटर ड्राइविंग स्कूल संचालकों को छह माह में हर वाहन के लिए प्रशिक्षक नियुक्त करने और सभी को सिमुलेटर से प्रशिक्षण देने का फरमान जारी किया गया था। टीम की जांच में जिले में चल रहे 10 निजी मोटर ड्राइविंग स्कूल में से नौ ड्राइविंग स्कूलों में प्रशिक्षण देने के पर्याप्त संसाधन नहीं मिले। प्रशिक्षण के नाम पर खानापूरी ही हो रही थी। मात्र एक ड्राइविंग स्कूल ही मानक पर खरा उतरा।
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विभाग की तरफ से मानक को ताक पर रखकर संचालित हो रहे नौ निजी मोटर मोटर ड्राइविंग स्कूलों की मान्यता खत्म कर दिया है। नए नियम के अनुसार मोटर ड्राइविंग स्कूल संचालकों को छह माह में हर वाहनों के लिए प्रशिक्षक नियुक्त करने और सभी को सिमुलेटर से प्रशिक्षण देना होगा। 300 वर्ग फीट में व्याख्यान कक्ष, सिमुलेटर कक्ष के लिए 150 वर्ग फीट दो पहिया वाहन तथा 250 वर्ग फीट जगह मध्यम भारी वाहन के लिए अनिवार्य की गई है।
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पार्किंग किसी सार्वजनिक स्थान पर नहीं होगी। मानक संचालन प्रक्रिया के तहत छह माह में सारे इंतजाम पूरा करने वालों की ही मान्यता रहेगी। अधिकारियों की माने तो सड़क दुर्घटनाओं में कमी न आने की वजह लोगों को वाहन चलाने का सही प्रशिक्षण न मिलना माना जा रहा है। इस बाबत एआरटीओ सुहेल अहमद का कहना है कि जिले में नौ निजी मोटर ड्राइविंग स्कूलों की मान्यता खत्म कर दी गई है।