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‘रामकथा सुनने मात्र से होता है उद्धार’
Wed, 09 Jan 2019 10:54 PM IST
पवन सिंह
mau
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Published by: पवन सिंह
Updated Wed, 09 Jan 2019 10:54 PM IST
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रामकथा में प्रवचन करते अवधेश महाराज।
- फोटो : mau
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दोहरीघाट। बाजार स्थित मद्धेशिया वैश्य धर्मशाला में नौ दिवसीय राम कथा में बुधवार को अयोध्या से पधारे अवधेश महाराज ने कहा कि श्री रामचरित मानस सभी वर्णों के लिए समान है। कहा कि रामकथा के श्रवण मात्र से मानव का उद्धार हो जाता है।
उन्होंने कहा कि ब्राम्हण ऐसा ना कहें कि राम चरित मानस पर सिर्फ हमारा अधिकार है, तो दूसरी तरफ क्षत्रिय बोले कि प्रभु श्री राम रघुवंश में उत्पन्न हुए ऐसे में इस पर सिर्फ हमारा अधिकार है, वनिक कहेंगे की कथा का आयोजन हम करते हैं ऐसे में रामायण पर हमारा अधिकार है, सुप्रिया कहेंगे कि श्रीराम हमारी झोपड़ियों में घूमे थे इसलिए रामायण पर हमारा अधिकार है आने वाले समय में विभिन्न वर्णों के लोग रामायण पर अपना अधिकार ना करें उनके बीच तकरार उत्पन्न ना हो इसलिए तुलसी जी ने कहा कि मेरे रामायण का वर्णन ब्राह्मण क्षत्रिय वनिक शुद्र नहीं है बल्कि उसका वर्ण केवल मानव है। कहा कि रामचरित मानस में रामजी ने सबको स्वीकार किया है वैसे ही इस ग्रंथ ने सब को स्वीकारा है। रामराज्य करने के लिए राम ने जय से प्रत्येक को स्वीकारा वैसे ही तुलसीदास जी ने रामचरितमानस को लिखकर समस्त मानव जगत को स्वीकार कर लिया है।
इस दौरान गुलाब चंदगुप्त, ध्रुव चंद, बिनय जायसवाल, प्रशांत जायसवाल, बृजेश कुमार, मार्कंडेय राय, प्रजापति राय विनोद वर्मा, उपेंद्र जायसवाल, डॉ पदमाकर दूबे, बाबुलाल समेत कई लोग उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि ब्राम्हण ऐसा ना कहें कि राम चरित मानस पर सिर्फ हमारा अधिकार है, तो दूसरी तरफ क्षत्रिय बोले कि प्रभु श्री राम रघुवंश में उत्पन्न हुए ऐसे में इस पर सिर्फ हमारा अधिकार है, वनिक कहेंगे की कथा का आयोजन हम करते हैं ऐसे में रामायण पर हमारा अधिकार है, सुप्रिया कहेंगे कि श्रीराम हमारी झोपड़ियों में घूमे थे इसलिए रामायण पर हमारा अधिकार है आने वाले समय में विभिन्न वर्णों के लोग रामायण पर अपना अधिकार ना करें उनके बीच तकरार उत्पन्न ना हो इसलिए तुलसी जी ने कहा कि मेरे रामायण का वर्णन ब्राह्मण क्षत्रिय वनिक शुद्र नहीं है बल्कि उसका वर्ण केवल मानव है। कहा कि रामचरित मानस में रामजी ने सबको स्वीकार किया है वैसे ही इस ग्रंथ ने सब को स्वीकारा है। रामराज्य करने के लिए राम ने जय से प्रत्येक को स्वीकारा वैसे ही तुलसीदास जी ने रामचरितमानस को लिखकर समस्त मानव जगत को स्वीकार कर लिया है।
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इस दौरान गुलाब चंदगुप्त, ध्रुव चंद, बिनय जायसवाल, प्रशांत जायसवाल, बृजेश कुमार, मार्कंडेय राय, प्रजापति राय विनोद वर्मा, उपेंद्र जायसवाल, डॉ पदमाकर दूबे, बाबुलाल समेत कई लोग उपस्थित रहे।
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