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राम-सुमंत संवाद
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Wed, 14 Oct 2015 11:04 PM IST
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रामलीला मेला समिति के
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तत्वावधान में नगर की प्रसिद्ध रामलीला में बुधवार को नगर के छोटका पोखरा
पर सुमंत विदाई, केवट विदाई, गंगापार की लीला हुई।
राम-सुमंत संवाद सुनकर दर्शक भाव-विह्वल हो गए।
रामलीला में सुमंत भगवान राम, लक्ष्मण सीता को छोड़कर जाने को तैयार नहीं थे। वहीं भगवान श्रीराम उन्हें व अयोध्यावासियों को समझा वापस करने की चेष्टा कर रहे थे।
भगवान श्रीराम सुमंत को विदा करने लगे। इस दौरान राम-सुमंत संवाद सुनकर दर्शक भाव विह्वल हो गए। इसके बाद सजी धजी नाव में बैठकर भगवान श्रीराम ने गंगा नदी को पार किया।
बाद में केवट ने जब भगवान राम से विदाई मांगी तो इस भक्तिमय दृश्य को देख लोग भावविभोर हो गए। दोहरीघाट में नगर पंचायत कार्यालय के प्रांगण में व्यापार मंडल तथा रामलीला समिति के तत्वावधान में चल रही रामलीला में रावण, कुंभकर्ण, विभीषण, कुंभकर्ण की तपस्या करने का मंचन किया गया।
मंचन के दौरान देवताओं व ऋषियों को रावण के अत्याचार से मुक्ति के लिए भगवान विष्णु द्वारा राजा दशरथ के घर अवतार लेने की बात कहने पर श्रद्धालु जयकारे लगाते रहे। रामलीला में रावण, कुंभकर्ण, विभीषण तीनों भाई ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप करने लगे । विभीषण ने प्रभु की भक्ति का वर मांगा।
रावण के अत्याचार को समाप्त करने के लिए भगवान ने जब देवताओं व ऋषियों को जब अयोध्या नरेश दशरथ के यहां राम के रुप में जन्म लेने का आश्वासन देते ही वातावरण जयघोष से गूंज उठा।
राम-सुमंत संवाद सुनकर दर्शक भाव-विह्वल हो गए।
रामलीला में सुमंत भगवान राम, लक्ष्मण सीता को छोड़कर जाने को तैयार नहीं थे। वहीं भगवान श्रीराम उन्हें व अयोध्यावासियों को समझा वापस करने की चेष्टा कर रहे थे।
भगवान श्रीराम सुमंत को विदा करने लगे। इस दौरान राम-सुमंत संवाद सुनकर दर्शक भाव विह्वल हो गए। इसके बाद सजी धजी नाव में बैठकर भगवान श्रीराम ने गंगा नदी को पार किया।
बाद में केवट ने जब भगवान राम से विदाई मांगी तो इस भक्तिमय दृश्य को देख लोग भावविभोर हो गए। दोहरीघाट में नगर पंचायत कार्यालय के प्रांगण में व्यापार मंडल तथा रामलीला समिति के तत्वावधान में चल रही रामलीला में रावण, कुंभकर्ण, विभीषण, कुंभकर्ण की तपस्या करने का मंचन किया गया।
मंचन के दौरान देवताओं व ऋषियों को रावण के अत्याचार से मुक्ति के लिए भगवान विष्णु द्वारा राजा दशरथ के घर अवतार लेने की बात कहने पर श्रद्धालु जयकारे लगाते रहे। रामलीला में रावण, कुंभकर्ण, विभीषण तीनों भाई ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप करने लगे । विभीषण ने प्रभु की भक्ति का वर मांगा।
रावण के अत्याचार को समाप्त करने के लिए भगवान ने जब देवताओं व ऋषियों को जब अयोध्या नरेश दशरथ के यहां राम के रुप में जन्म लेने का आश्वासन देते ही वातावरण जयघोष से गूंज उठा।