मऊ। जिले मे कोरोना वायरसर का असर हर क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, हांलाकि जिले में अभी तक एक भी कोरोना वायरस का मरीज नहीं मिले हैं, लेकिन इसका असर हर जगह दिख रहा है। मऊ जंक्शन से मुंबई, दिल्ली आदि महानगरों को जाने वाले ट्रेनों पर भी इसका असर दिख रहा है। लोगों में कोरोना वायरस का डर इस कदर बढ़ रहा है कि वह रेल टिकटों को रद्द करा रहे हैं और ट्रेन जैसे सार्वजनिक यात्रा के प्रयोग करने से बच रहे है। बीते एक मार्च से बृहस्पतिवार तक 1675 लोगों ने अपना आरक्षण टिकट कैंसिल करा दिया। इससे रेलवे को करीब 16 लाख रुपये का राजस्व का नुकसान हुआ है। इसके अतिरिक्त सामान्य टिकट लेकर यात्रा कर रहे यात्रियों में 50 फीसदी तक गिरावट आई है। इससे भी रेलवे को लाखों का प्रतिदिन नुकसान हो रहा है। बताते चले कि मऊ जंक्शन से प्रतिदिन 10 हजार से ज्यादा यात्री वाराणसी, आजमगढ़, बलिया, गोरखपुर रूट पर यात्रा करते है। लेकिन बीते दस मार्च के बाद कोरोना वायरस का ऐसा भय लोगों में आया, जिससे लोग यात्रा करने से बच रहे हैं। वर्तमान में केवल मऊ जंक्शन से प्रतिदिन 5 हजार के करीब ही यात्री यात्रा कर रहे हैं। दूसरी तरफ दादर एक्सप्रेस, गोदान एक्सप्रेस, कृषक एक्सप्रेस, लिच्छवी एक्सप्रेस, साबरमति एक्सप्रेस सहित अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों में आरक्षण कराने वाले यात्री अपना टिकट निरस्त करा रहे है। बीते 18 मार्च को 400 यात्रियों ने अपना आरक्षण निरस्त कराया, वहीं बृहस्पतिवार को 150 से ज्यादा यात्रियों ने टिकट निरस्त कराया। इससे केवल दो दिनों में ही रेलवे को दो लाख 77 हजार रुपये यात्रियों को रिफंड करना पड़ा। जबकि 1 मार्च से 18 मार्च तक 1675 यात्रियों ने अपना टिकट कैंसिल कराया। इसमें 10 मार्च से 18 मार्च तक 1 हजार यात्रियों ने अपना टिकट निरस्त कराया। इससे आठ दिनों में ही रेलवे को 9 लाख 75 हजार रुपये का नुकसान हुआ। वहीं सामान्य टिकटों की आधी बिक्री होने से रेलवे को प्रतिदिन एक से डेढ़ लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। कोरोना वायरस से मऊ जंक्शन को प्रतिदिन दो से तीन लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं इंदारा जंक्शन के आरक्षण तथा सामान्य यात्रा के टिकट को जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा ओर बढ़ेगा। सूत्रों ने जानकारी दी है कि अगर इसी तरह चलता रहा तो रेलवे के नुकसान में बढ़ोतरी हो सकती है।