घोसी। बड़ागांव में बुधवार की देररात इमाम जैनुल आबेदीन सज्जाद की शहादत की याद में जुल्फेकार अहमद के आवास से शबीहे ताबूत व अलम का जुलूस निकला गया। अंजुमनों ने नौहा मातम कर सैयदे सज्जाद को खिराजे अकीदत पेश की। वहीं, मौलाना ने मजलिस में उनकी शहादत बयान की। मौलाना नसीमुल हसन ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि इमाम जैनुल आबेदीन कर्बला की त्रासदी में बच जाने वाले इमाम हुसैन के एकमात्र पुत्र थे। कहा कि अपने पिता तथा पूर्वजों की ही भांति इमाम जैनुल आबेदीन भी ज्ञानी एवं उच्च विशेषताओं के स्वामी थे। तक़रीर के बाद नौहा व मातम का दौर शुरू हुआ। तफ़हीम हैदर ने ‘रो रो ये कहते हैं सज्जाद मेरे बाबा हम हो गए ग़ुरबत में बरबाद मेरे बाबा’ पढ़ा तो अजादार रो पड़े। इस दौरान ग़जनफ़र अब्बास, शमीम हैदर, शाहिद हुसैन, हुसैन फ़राज, अब्बास , मुजफ्फर हुसैन, अली हैदर, नजमुल हसन, आसिफ रजा, रजी हैदर, मालिके अश्तर, अहमद औन, मोहम्मद हैदर, शहजादे हुसैन, इशरत हुसैन, अलमदार, शब्बीर फ़ैजी, हसनैन रजा, मोहम्मद रजा एव बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग उपस्थित रहे।