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नमक रोटी खाऊंगा, लेकिन बाहर नहीं जाऊ ंगा
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मधुबन। ट्रेनों, बसों सहित अन्य माध्यमों से प्रवासी मजदूरों के आने का सिलसिला थम नहीं रहा। गंतव्य तक पहुंचने को परेशानहाल इन मजदूरों की बेबसी और मजबूरी समझने वाला कोई नहीं। ऐसे में गांव के प्रति अपनापन लिए यह प्रवासी तमाम दुश्वारियां उठाते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचने को बेताब हैं। यही कारण है कि अब वह शहर जाने की दुबारा हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। गुजरात के अहमदाबाद से ट्रेन से आए क्षेत्र के कुसुंडा निवासी नीरज यादव ने बताया कि वह अहमदाबाद में केबल वायर का काम करता था। लेकिन लाकडाउन के बाद परेशानी होने लगी। किसी तरह जद्दोजहद कर वह ट्रेन से मऊ पहुंचा और फिर बस से घर आया। बताया कि वह इतनी परेशानी देख चुका है कि अब शहर जाने के नाम से हिम्मत जवाब दे रही है।
गुजरात से आए परशुरामपुर निवासी दिनेश मल्ल ने बताया कि वह गुजरात में वेल्डिंग का काम करता था। लाक डाउन के बाद सारे काम बंद हो गए। जो पैसे थे उससे कुछ दिन काम चला। फिर इसके बाद कई दिन तक भूखा रहा। रास्ते में कुछ भोजन मिला। लेकिन घर तक पहुंचने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गुजरात से आए लकुरा निवासी धनंजय राजभर ने बताया कि गुजरात में सीट मेटल का कार्य करता था। लाकडाउन के बाद काम मिलना बंद हो गया। तमाम जद्दोजहद के बाद घर पहुंचा। अब यहीं नमक रोटी खाऊंगा, लेकिन दूर शहर रोजगार करने नहीं जाऊंगा। गुजरात से ही आए मुहम्मदपुर चंद्रापार निवासी रामजन्म राजभर ने बताया कि गुजरात में पैनल बोर्ड का काम करता था। लाकडाउन के बाद काम मिलना बंद हो गया। चोरी-छिपे अगर किसी ने बुला दिया तो उसके घर जाकर काम कर देते थे। इससे कुछ पैसे मिल जाते थे। जिससे काम चल जाता था लेकिन जैसे ही घर आने का मौका मिला। ट्रेन से घर आ गया। अब यहीं काम करने की सोच रहा हूं।
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गुजरात से आए परशुरामपुर निवासी दिनेश मल्ल ने बताया कि वह गुजरात में वेल्डिंग का काम करता था। लाक डाउन के बाद सारे काम बंद हो गए। जो पैसे थे उससे कुछ दिन काम चला। फिर इसके बाद कई दिन तक भूखा रहा। रास्ते में कुछ भोजन मिला। लेकिन घर तक पहुंचने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गुजरात से आए लकुरा निवासी धनंजय राजभर ने बताया कि गुजरात में सीट मेटल का कार्य करता था। लाकडाउन के बाद काम मिलना बंद हो गया। तमाम जद्दोजहद के बाद घर पहुंचा। अब यहीं नमक रोटी खाऊंगा, लेकिन दूर शहर रोजगार करने नहीं जाऊंगा। गुजरात से ही आए मुहम्मदपुर चंद्रापार निवासी रामजन्म राजभर ने बताया कि गुजरात में पैनल बोर्ड का काम करता था। लाकडाउन के बाद काम मिलना बंद हो गया। चोरी-छिपे अगर किसी ने बुला दिया तो उसके घर जाकर काम कर देते थे। इससे कुछ पैसे मिल जाते थे। जिससे काम चल जाता था लेकिन जैसे ही घर आने का मौका मिला। ट्रेन से घर आ गया। अब यहीं काम करने की सोच रहा हूं।
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