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पाॅलीथिन ने बिगाड़ी तमसा की सेहत
मऊ/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jun 2016 11:57 PM IST
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नगर क्षेत्र स्थित तमसा नदी में फेकी गई पाॅलीथिन, जिससे नदी में बढ़ रहा प्रदूषण। अमर उजाला
प्रदेश सरकार की ओर प्रदेश में पालीथिन के प्रयोग पर प्रतिबंध का असर शहर में निहीं दिख रहा। पालीथिन के अंधाधुंध प्रयोग से तमसा का प्रवाह अवरुद्घ हो गया है। वहीं ज्यादातर शहरवासी निष्प्रयोज्य वस्तुओं को पालीथिन में भरकर नदी में फेंक देते हैं। इसके चलते यह नदी के तल में जाकर जमा हो जाता है। इसके भयावह परिणाम से अनजान यहां के रहवासी तमसा को प्रदूषित करने के साथ नदी को पाटते भी जा रहे हैं। समय रहते अगर सख्त कदम नहीं उठाया गया तो तमसा को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
वहीं पूर्व में कई सामाजिक संगठनों ने तमसा को बचाने के लिए एक अभियान छेड़ा था। लेकिन वह अभियान भी मानो अब गया है।तमसा नदी में पानी कम होने के चलते नदी का प्रवाह यूं भी कम है। लेकिन शहर के नजदीक नदी में आने जाने वाले लोग सामानों का प्रयोग करने के बाद उसे पालीथिन में भरकर नदी में फेंक देते हैं। सामानों से भरे ये पालीथिन धीरे धीरे जमा होता रहता है और बालू के साथ मिलकर भारी होता जाता है। दो साल पूर्व कई सामाजिक संगठनों ने तमसा को बचाने के लिए एक अभियान छेड़ा था।
लोगों ने नदी की साफ-सफाई की थी। शुरुआत में तत्कालीन जिलाधिकारी कुमुदलता श्रीवास्तव ने इस मुहिम का नेतृत्व किया था। फिर तो नदी सरोवरों की सफाई की मानो होड़ सी लग गई। तमसा को साफ करने के लिए भी प्रबुद्घ लोग भी सामने आए थे। लेकिन इन दो सालों में ही लोग तमसा के महत्व को भूल गए। कूड़े भरे पालीथिन तमसा में फेंके जा रहे हैं। न तो लोग स्वयं इसके भयावह परिणाम के प्रति सचेत हो रहे हैं और न ही प्रशासनिक स्तर पर इसके लिए कोई पहल या प्रयास किए जा रहे हैं। स्वयंसेवी संगठनों की ओर से भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
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वहीं पूर्व में कई सामाजिक संगठनों ने तमसा को बचाने के लिए एक अभियान छेड़ा था। लेकिन वह अभियान भी मानो अब गया है।तमसा नदी में पानी कम होने के चलते नदी का प्रवाह यूं भी कम है। लेकिन शहर के नजदीक नदी में आने जाने वाले लोग सामानों का प्रयोग करने के बाद उसे पालीथिन में भरकर नदी में फेंक देते हैं। सामानों से भरे ये पालीथिन धीरे धीरे जमा होता रहता है और बालू के साथ मिलकर भारी होता जाता है। दो साल पूर्व कई सामाजिक संगठनों ने तमसा को बचाने के लिए एक अभियान छेड़ा था।
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लोगों ने नदी की साफ-सफाई की थी। शुरुआत में तत्कालीन जिलाधिकारी कुमुदलता श्रीवास्तव ने इस मुहिम का नेतृत्व किया था। फिर तो नदी सरोवरों की सफाई की मानो होड़ सी लग गई। तमसा को साफ करने के लिए भी प्रबुद्घ लोग भी सामने आए थे। लेकिन इन दो सालों में ही लोग तमसा के महत्व को भूल गए। कूड़े भरे पालीथिन तमसा में फेंके जा रहे हैं। न तो लोग स्वयं इसके भयावह परिणाम के प्रति सचेत हो रहे हैं और न ही प्रशासनिक स्तर पर इसके लिए कोई पहल या प्रयास किए जा रहे हैं। स्वयंसेवी संगठनों की ओर से भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
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