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फिल्मों के लिए संघर्ष में मसाज कर्मी बना हैप्पी
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Tue, 07 Jul 2015 12:10 AM IST
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समूहन कला संस्थान की ओर से आयोजित समूहन राष्ट्रीय भ्राम्यमान नाट्य समारोह के तीसरे दिन फिल्म अभिनेता राकेश बेदी अभिनीत ‘मसाज’ का मंचन किया गया। जिसमें एक युवक की फिल्मों में काम पाने से लेकर एक मसाज करने वाले कर्मी के सफर को समाज से जोड़कर दिखाया गया है।
विजय तेंदुलकर द्वारा लिखित नाटक ‘मसाज’ समाज के अंदर झांकने की एक खिड़की है। राकेश बेदी द्वारा विभिन्न रूपों में अभिनीत ‘मसाज’ एक मोनोलाग है। राकेश बेदी चौबीस अलग-अलग किरदारों को इस नाटक में जीते है,
जिसमें समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हैं। कथा का मूल सार हैप्पी कुमार नामक किरदार के इर्द-गिर्द गढ़ा गया है, जो फिल्मों में अभिनय करना चाहता है। लेकिन सर्प कथाओं और सेक्स विषय पर आधारित फिल्मेँ बनाने वाले निर्देशक कोहली का चौथा असिस्टेंट बन जाता है।
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अपने मन मुताबिक काम को तलाशते हुए हैप्पी एक महिला जिम में इंस्ट्रक्टर और अंतत: एक मसाज कर्मी बन जाता है। मसाज करने वाले किरदार के रूप में वह समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों से रूबरू होता है।
लगभग दो घंटे का यह नाटक समाज के उन पक्षों को सामने लाता है जिन पर यह सामाजिक तानाबाना खड़ा हुआ है और जिंदगी की व्यावहारिक सच्चाइयों को दर्शकों के सामने खड़ा करता है। हरबंश सिंह के निर्देशन में राकेश बेदी मंच पर हैप्पी कुमार के रूप में खूब जमे। मूल कहानी विजय तेंदुलकर की था और कुलदीप सिंह के संगीत ने प्रभावित किया।
नाट्य मंचन से पूर्व नाट्य समारोह की इस संध्या का शुभारंभ वरिष्ठ रंगकर्मी सुनील विश्वकर्मा ने दीप प्रज्ज्वलन से किया। आगत अतिथियों का स्वागत और प्रायोजकों का आभार ज्ञापन संस्था के निदेशक राजकुमार शाह ने किया।
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विजय तेंदुलकर द्वारा लिखित नाटक ‘मसाज’ समाज के अंदर झांकने की एक खिड़की है। राकेश बेदी द्वारा विभिन्न रूपों में अभिनीत ‘मसाज’ एक मोनोलाग है। राकेश बेदी चौबीस अलग-अलग किरदारों को इस नाटक में जीते है,
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जिसमें समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हैं। कथा का मूल सार हैप्पी कुमार नामक किरदार के इर्द-गिर्द गढ़ा गया है, जो फिल्मों में अभिनय करना चाहता है। लेकिन सर्प कथाओं और सेक्स विषय पर आधारित फिल्मेँ बनाने वाले निर्देशक कोहली का चौथा असिस्टेंट बन जाता है।
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अपने मन मुताबिक काम को तलाशते हुए हैप्पी एक महिला जिम में इंस्ट्रक्टर और अंतत: एक मसाज कर्मी बन जाता है। मसाज करने वाले किरदार के रूप में वह समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों से रूबरू होता है।
लगभग दो घंटे का यह नाटक समाज के उन पक्षों को सामने लाता है जिन पर यह सामाजिक तानाबाना खड़ा हुआ है और जिंदगी की व्यावहारिक सच्चाइयों को दर्शकों के सामने खड़ा करता है। हरबंश सिंह के निर्देशन में राकेश बेदी मंच पर हैप्पी कुमार के रूप में खूब जमे। मूल कहानी विजय तेंदुलकर की था और कुलदीप सिंह के संगीत ने प्रभावित किया।
नाट्य मंचन से पूर्व नाट्य समारोह की इस संध्या का शुभारंभ वरिष्ठ रंगकर्मी सुनील विश्वकर्मा ने दीप प्रज्ज्वलन से किया। आगत अतिथियों का स्वागत और प्रायोजकों का आभार ज्ञापन संस्था के निदेशक राजकुमार शाह ने किया।