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झुलसे मरीजों के इलाज को नहीं है प्लास्टिक सर्जन
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मऊ। सावधान, अगर आप दीपावली में खूब आतिशबाजी की योजना बना रहे हैं तो सावधान हो जाए। किसी दुर्घटना की दशा में जनपद में आपको समुचित इलाज नहीं मिलगा। कारण कि जिला अस्पताल में बर्न यूनिट की समुचित सविधा उपलब्ध नहीं है। इससे बचने के लिए पटाखे जलाते समय आपको सावधानी और सतर्कता अनिवार्य रूप से बरतनी पड़ेगी। स्थिति यह है कि करोड़ों की लागत से बने ट्रामा विंग और बर्न यूनिट में वर्तमान में कोविड टीकाकरण और कोविड जांच की जा रही है।
दीपावली पर्व पर लापरवाही के चलते आग लगने और पटाखों से झुलसने के मामले काफी आते हैं। ऐसे में लोगों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। हालांकि अस्पताल के वार्ड में 10 बेड का वार्ड जरूर है। लेकिन अस्पताल में कोई भी प्लास्टिक सर्जन की नियुक्ति नहीं है। हालांकि दिसंबर 2016 में जिला अस्पताल में तीन करोड़ की लागत से बने 30 बेड के अत्याधुनिक बर्न यूनिट को हैंडओवर कर दिया गया था। लेकिन हैंडओवर होने के बाद से ही यहां न तो विशेषज्ञ डाक्टरों की तैनाती हुई और ना ही स्टाफ की। नियमानुसार यहां चार विशेषज्ञ चिकित्सकों और 10 स्टाफ नर्स की तैनाती होनी थी। लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते तैनाती नहीं हो सकी। कोविड काल में ट्रामा और बर्न विंग में कोविड जांच और टीकाकरण केेंद्र बना दिया गया।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. बृज कुमार का कहना है कि बर्न यूनिट में स्टाफ की तैनाती नहीं हो सकी है। कोरोना काल में ट्रामा और बर्न विंग को कोविड जांच और कीटाकरण के लिए बना दिया गया। डाक्टरों और स्टाफ की तैनाती के लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है।
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दीपावली पर्व पर लापरवाही के चलते आग लगने और पटाखों से झुलसने के मामले काफी आते हैं। ऐसे में लोगों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। हालांकि अस्पताल के वार्ड में 10 बेड का वार्ड जरूर है। लेकिन अस्पताल में कोई भी प्लास्टिक सर्जन की नियुक्ति नहीं है। हालांकि दिसंबर 2016 में जिला अस्पताल में तीन करोड़ की लागत से बने 30 बेड के अत्याधुनिक बर्न यूनिट को हैंडओवर कर दिया गया था। लेकिन हैंडओवर होने के बाद से ही यहां न तो विशेषज्ञ डाक्टरों की तैनाती हुई और ना ही स्टाफ की। नियमानुसार यहां चार विशेषज्ञ चिकित्सकों और 10 स्टाफ नर्स की तैनाती होनी थी। लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते तैनाती नहीं हो सकी। कोविड काल में ट्रामा और बर्न विंग में कोविड जांच और टीकाकरण केेंद्र बना दिया गया।
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इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. बृज कुमार का कहना है कि बर्न यूनिट में स्टाफ की तैनाती नहीं हो सकी है। कोरोना काल में ट्रामा और बर्न विंग को कोविड जांच और कीटाकरण के लिए बना दिया गया। डाक्टरों और स्टाफ की तैनाती के लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है।
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