रंगों और मस्ती के त्योहार होली की पूर्व संध्या पर खुमारी लोगों के सिर चढ़कर दिखी। शहर और गांवों के चौराहों और नुक्कड़ों पर हुड़दंगियों की हुड़दंग जारी रही। बाजारों में जमकर खरीदारी की। क्या बूढ़े, क्या जवान सभी होली की मस्ती के रंगों में रंगे दिखे। बच्चों और किशोरों में तो होली का उत्साह कुछ ज्यादा ही देखा गया। फैक्ट्रियों में कर्मचारियों ने साथियों को रंगों और गुलाल से सराबोर कर दिया।
रंगों के पर्व होली की तैयारी मंगलवार को पूरी कर ली गई। होली की पूर्व संध्या पर कपड़ों, रंगों और खाने पीने सहित तमाम सामानों की जमकर खरीदारी की। पूरे दिन शहर, बाजार, चट्टी चौराहों पर खासी चहल पहल रही। अधिकांश खाने पीने, कपड़ों, रंग गुलाल और किराना की दुकानों पर भीड़ देखी गई। जहां बच्चे, बुजुर्ग, जवान, महिलाएं सभी प्रकार के सामानों की खरीदारी करते देखे गए। सुगंधयुक्त गुलाल के खरीदारी करते दिखे। लूज अबीर, गुलाल तो बिक ही रहा था। लेकिन चमकदार और गहरे हरे पीले और नीले रंग के गुलाल के खरीदार ज्यादा ही थे। उधर घरों में गहिणियां तरह-तरह के मिष्ठान, पकवान और गुझिया, पापड़ बनाने में जुटी हुई थी। बच्चे सुबह से ही हमजोलियों के साथ गुलछर्रे उड़ाने में मशगुल रहे। शहर के चौराहों और नुक्कड़ों पर किशोरों, युवाओं को थिरकते हुए मस्ती कर रहे थे। दोस्त मित्र एक दूसरे के चेहरे पर रंग पोतते दिखे। शराब की बिक्री के प्रतिबंध के बाद भी नशे में मदहोश होली के फूहड़ गीत गाते हुए झूमते हुए एक दूसरे को रंग पोतते देखे जा रहे थे।