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वायरल बुखार की चपेट में आ रहे लोग
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मऊ। जिले सरकारी अस्पतालों से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में वायरल बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। अस्पताल की ओपीडी से लेकर पैथालोजी तक मरीजों का तांता लगा है। वहीं जिले में डेंगू और मलेरिया के प्रति स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।
डेंगू से निपटने के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड के साथ सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर बेड सुरक्षित किये गए हैं। सभी बेडों को पूरी तरह से मच्छरदानी से युक्त किया गया है। अस्पतालों में आने वाले मरीजों की सहूलियत के लिए प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी पर फीवर डेस्क बनाए गए हैं। जो बुखार के मरीजों की जांच कर रहे हैं। बुखार के बढ़ते मरीजों की संख्या के बीच लोगों में डेंगू और वायरल का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसके लिए सभी सरकारी अस्पतालों पर डेंगू एंटीजन किट से संदिग्धों की जांच की जा रही है। विभाग की माने ते अभी तक जिले में डेंगू और मलेरिया का एक भी मरीज नहीं मिला है। लेकिन विभाग द्वारा इसे लेकर सतर्कता बरती जा रही है।
जिला मलेरिया अधिकारी बेदी यादव ने बताया कि डेंगू रोग का वाहक मच्छर स्वच्छ रुके हुए कम पानी में पैदा होता है। यह घरों की छत या आसपास रखे गए नारियल की खोल, टायर, छत या बाहर रखे गए बर्तन, फ्रीज की ट्रे आदि में पनपते हैं। आमतौर पर डेंगू का मच्छर दिन में ही काटता है। यह जमीन से डेढ़ से दो फीट की उंचाई से ऊपर नहीं उड़ सकता है। डेंगू मच्छर कम पानी पनपता है। 10 दिन के भीतर ही लार्वा अंडे का रूप लेने के बाद वयस्क मच्छर बन जाता है। अभी तक जिले में एक भी केस नहीं मिला है। विभाग प्रत्येक स्थिति से निबटने के लिए तैयार है। जिले में टीम शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में लोगों को मच्छरों से होने वाले बीमारियों से बचने के उपाय सुझा रहे हैं।
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डेंगू से निपटने के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड के साथ सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर बेड सुरक्षित किये गए हैं। सभी बेडों को पूरी तरह से मच्छरदानी से युक्त किया गया है। अस्पतालों में आने वाले मरीजों की सहूलियत के लिए प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी पर फीवर डेस्क बनाए गए हैं। जो बुखार के मरीजों की जांच कर रहे हैं। बुखार के बढ़ते मरीजों की संख्या के बीच लोगों में डेंगू और वायरल का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसके लिए सभी सरकारी अस्पतालों पर डेंगू एंटीजन किट से संदिग्धों की जांच की जा रही है। विभाग की माने ते अभी तक जिले में डेंगू और मलेरिया का एक भी मरीज नहीं मिला है। लेकिन विभाग द्वारा इसे लेकर सतर्कता बरती जा रही है।
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जिला मलेरिया अधिकारी बेदी यादव ने बताया कि डेंगू रोग का वाहक मच्छर स्वच्छ रुके हुए कम पानी में पैदा होता है। यह घरों की छत या आसपास रखे गए नारियल की खोल, टायर, छत या बाहर रखे गए बर्तन, फ्रीज की ट्रे आदि में पनपते हैं। आमतौर पर डेंगू का मच्छर दिन में ही काटता है। यह जमीन से डेढ़ से दो फीट की उंचाई से ऊपर नहीं उड़ सकता है। डेंगू मच्छर कम पानी पनपता है। 10 दिन के भीतर ही लार्वा अंडे का रूप लेने के बाद वयस्क मच्छर बन जाता है। अभी तक जिले में एक भी केस नहीं मिला है। विभाग प्रत्येक स्थिति से निबटने के लिए तैयार है। जिले में टीम शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में लोगों को मच्छरों से होने वाले बीमारियों से बचने के उपाय सुझा रहे हैं।
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