तमधुबन/दुबारी। घाघरा का जलस्तर जैैसे-जैसे घटता जा रहा है, वैसे-वैसे मधुबन के देवारा क्षेत्र के बिनटोलिया में कटान तीव्र होने से तटवर्ती इलाकों के लोगों की धड़कनें भी बढ़ती ही जा रही हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर हाईस्कूल का तीन कक्ष नदी मेें विलीन हो गया। नदी के बस्ती की ओर रुख करने से लोग दहशत में जी रहे हैं। गांव के लोगों ने कटान को लेकर अनशन भी किया लेकिन कटान समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा सका है। हफ्तों से नदी के घेरे में रहने वाले 20 गांवों के संपर्क मार्गों पर आवागमन बहाल हो गया है। सैकड़ों एकड़ जलमग्न फसलों के नष्ट होने से पशुुुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है लेकिन किसानों की सुधि लेने की किसी ने जहमत तक नहीं उठाई।
गांवों में जलजमाव होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। लोग मच्छरजनित बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। लेकिन अभी तक रासायनिक दवाओं का छिड़काव नहीं किया जा सका है। परसिया जयराम गिरी हाहानाला रेगुलेटर पर नदी का जलस्तर सोमवार को 65.70 मीटर रहा। जबकि रविवार को 65.96 मीटर था। खतरा बिंदु 66.31 मीटर है। 24 घंटे मेें 26 सेमी का घटाव दर्ज किया गया। नदी बिंदटोलिया बस्ती की तरफ तेजी से कटान कर रही है। नदी डॉ. भीमराव अंबेडकर हाईस्कूल के तीन कक्ष नदी में विलीन हो गए हैं। नदी के उग्र तेवर से बिंदटोलिया गांव के लोगों की नींद उड़ गई है। ग्रामीणों की मानें तो नदी गांव से तीन किमी दूर थी लेकिन कटान करते गांव के पास आ गई है। बिनटोलिया गांव के रामबली, सुुबाष, रामसरीख, रामाकांत, जितेंद्र, अमिताभ, दिलीप आदि की मड़ई, नदी में विलीन हो चुुकी है। लोग खुले आसमान में जीवन यापन करने को विवश हैं। शिकायत के बाद भी शासन प्रशासन की तरफ से कटान रोकने के लिए उपाय तक नहीं किया जा सका है। कटान समस्या को लेकर गांव के लोगों ने अनशन किया था लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हो सका है। नदी के जलस्तर में घटाव के बाद नदी के घेरे में रहने वाले गांवों के संपर्क मार्गों पर आवागमन बहाल हो गया है। लेकिन मधुबन तहसील क्षेत्र के देवारा इलाके के चक्की मूसाडोही, भगत का पुरा, बिंदटोलिया, नई बस्ती, जरलहवा, बइरकंटा, विशुन का पुरा, पब्बर का पुरा, खैरा हरिलाल का पुरा, बिंदर का पुरा, बिशुन का पुरा, भगत का पुरा, धूस कापुरा, पब्बर का पुरा, चौहानपुर, बरोहा, कुंवरपुरवा, परसिया, गजियापुर मोलनापुर का बलुआ सहित 20 गांवों मेें गंदगी का अंबार लगा है। जगह-जगह जलभराव होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है।