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मरीज की उखड़ रही सांसे, शोपीस बने वेंटीलेटर
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मऊ। जिले में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की संभावना को लेकर स्वास्थ्य विभाग युद्धस्तर पर तैयारियों में जुुटे होने का दावा कर रहा है। दूसरी तरफ जिले के सबसे बड़े 100 बेड के जिला अस्पताल में बदहाल चिकित्सीय सुविधाएं इसे केवल कागजी साबित कर रही है। चौकाने वाली बात है कि बीते वर्ष आए तीन वेंटीलेटर को अब तक चालू नहीं किया जा सका है। ऐसे में गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद बीएचयू रेफर कर दिया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन इसके पीछे टेक्नीशियन की कमी होना बता रहा।
जिले में संक्रमण की पहली लहर के दौरान अप्रैल 2020 में जिला अस्पताल में करीब 24 लाख रुपये की लागत से तीन वेंटीलेटर खरीदा गया था, इसमें दो पोर्टबल था। जब से यह वेंटीलेटर आए तब से यह अपने स्थानों पर शोपीस बने खड़े है। जबकि इन वेंटीलेटरों का प्रयोग अस्पताल में संदिग्ध मरीजों के लिए होना चाहिए था। उधर संक्रमण की दूसरी लहर में भी यह वेंटीलेटर शोपीस बने रहे। इधर तीसरी लहर की संभावना के मद्देनजर जहां एक तरफ चिकित्सीय सुविधाएं बढ़ाने का दावा के बीच इसे शुरू कराने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन इसमें वेंटीलेटर चलाने वाले टेक्नीशियन की कमी बता रहा है।
अमर उजाला ने इस समस्या को लेकर बीते 15 अप्रैल को निष्प्रयोज्य पड़े तीन वेंटीलेटर शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया गया था। दूसरी तरफ बीमार बच्चों के लिए अस्पताल परिसर में बने पीड्रियाटिक इन्सेंटिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में दस वेंटीलेटर सुविधा है। यहां गंभीर रूप से बच्चों का उपचार भी किया जा रहा है। वेंटीलेटर की सुविधा होने से जरुरतमंद मरीजों का इसका लाभ मिल रहा है।
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सीएमएस डॉ. बृज कुमार का कहना था किजिला अस्पताल में आईसीयू नहीं बन सका है। टेक्नेशियन सहित मानव संसाधन की कमी है। इस तरह की कमी को दूर करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
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जिले में संक्रमण की पहली लहर के दौरान अप्रैल 2020 में जिला अस्पताल में करीब 24 लाख रुपये की लागत से तीन वेंटीलेटर खरीदा गया था, इसमें दो पोर्टबल था। जब से यह वेंटीलेटर आए तब से यह अपने स्थानों पर शोपीस बने खड़े है। जबकि इन वेंटीलेटरों का प्रयोग अस्पताल में संदिग्ध मरीजों के लिए होना चाहिए था। उधर संक्रमण की दूसरी लहर में भी यह वेंटीलेटर शोपीस बने रहे। इधर तीसरी लहर की संभावना के मद्देनजर जहां एक तरफ चिकित्सीय सुविधाएं बढ़ाने का दावा के बीच इसे शुरू कराने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन इसमें वेंटीलेटर चलाने वाले टेक्नीशियन की कमी बता रहा है।
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अमर उजाला ने इस समस्या को लेकर बीते 15 अप्रैल को निष्प्रयोज्य पड़े तीन वेंटीलेटर शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया गया था। दूसरी तरफ बीमार बच्चों के लिए अस्पताल परिसर में बने पीड्रियाटिक इन्सेंटिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में दस वेंटीलेटर सुविधा है। यहां गंभीर रूप से बच्चों का उपचार भी किया जा रहा है। वेंटीलेटर की सुविधा होने से जरुरतमंद मरीजों का इसका लाभ मिल रहा है।
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सीएमएस डॉ. बृज कुमार का कहना था किजिला अस्पताल में आईसीयू नहीं बन सका है। टेक्नेशियन सहित मानव संसाधन की कमी है। इस तरह की कमी को दूर करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।