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बाल निकेतन पर ओवर ब्रिज निर्माण अफसरशाही के चलते लटका है अधर में
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मऊ। शहर के सबसे व्यस्ततम स्थान बाल निकेतन रेलवे क्रॉसिंग पर फ्लाई ओवर निर्माण कार्य अफसरशाही के चलते विलंबित हो रहा है। सेतु निगम और लोक निर्माण विभाग विलंब को लेकर एक दूसरे को जिम्मेदार बता रहे हैं। जिलाधिकारी और डीआरएम की संयुक्त बैठक में लिए गए निर्णय के बाद शासन से सहमति पत्र मिलने में 20 महीने का समय लग गया। नौ महीने का समय रेलवे ने पुल का ड्राफ्ट स्वीकृत करने में लगा दिया।
शासन से स्वीकृति मिलने के बाद अब राजस्व और लोक निर्माण विभाग की ओर से फ्लाई ओवर की जद में आने वाली भूमि और उसके मूल्य का आंकलन भेजने में देरी की जा रही है। फ्लाई ओवर का नक्शा पास होकर सेतु निगम के पास पड़ा है। राजस्व और लोकनिर्माण विभाग की ओर से लोक निर्माण विभाग की जमीन और उसके मूल्य का आंकलन मिलने के बाद सेतु निगम फिर संशोधित आंकलन शासन को भेजेगा।वहां से अनुमति मिलने के बाद फ्लाई ओवर का निर्माण शुरू कर सकेगा। उधर किसान नेता देवप्रकाश राय ने विधान सभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पूर्व फ्लाईओवर निर्माण शुरू करने की मांग की है।
बाल निकेतन क्रासिंग पर ट्रेनों के आने जाने पर 24 घंटे में कम से कम लगभग 36 बार फाटक बंद करना पड़ता है। हालांकि कोरोना संकट काल के बाद से ट्रेनों के संचालन में कुछ कमी आई है। फाटक बंद हो जाने के बाद दोनों तरफ सैकड़ों वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इसके चलते आवागमन सुचारू होने में काफी समय लग जाता है।
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इस संबंध में लोकदल के प्रदेश सचिव किसान नेता देव प्रकाश राय ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके मांग किया है कि जिला प्रशासन और रेलवे को बाल निकेतन पर फ्लाई ओवर अथवा अंडर ब्रिज बनाने का आदेश दिया जाए, जिससे लोगों को जाम से राहत मिल सके। चार मई 2018 को उच्च न्यायालय ने आदेश जारी किया कि डीएम और रेलवे के डीआरएम की संयुक्त बैठक कर फ्लाई ओवर अथवा अंडर ब्रिज बनाने का निर्णय लें। लगभग डेढ़ महीने बाद 26 जून 2018 को डीएम और डीआरएम की हुई बैठक में फ्लाई ओवर बनाने की सहमति के साथ शासन और रेलवे के उच्चाधिकारियों से स्वीकृति लेने की कवायद शुरू की गई।
दो जुलाई 2018 को तत्कालीन डीएम प्रकाश बिंदु ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण को संस्तुति के लिए पत्र भेजा। ओवर ब्रिज निर्माण की जद में आने वाले 296 अतिक्रमण कारियों को हटाने की सूचना दी गई तथा फ्लाई ओवर निर्माण में 95 करोड़ का स्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया। शासन में यह प्रकरण 20 महीनों तक लंबित रहा।
20 महीने बाद आठ अप्रैल 2020 को प्रमुख सचिव लोक निर्माण नितिन रमेश गोकर्ण ने बाल निकेतन पर फ्लाई ओवर के लिए सहमति पत्र जारी किया। सेतु निगम द्वारा बनाए गए ड्राफ्ट में कुछ संशोधन करने के लिए रेलवे के इंजीनियरों ने कहा। इस कार्य में दस महीने लगा दिए गए। ड्रॉफ्ट संशोधित होने के बाद भी अभी मामला लटका है। निर्माण की जद में आने वाले निजी लोगों के साथ ही लोक निर्माण विभाग की भी कुछ जमीन जा रही है। सेतु निगम के अफसरों का दावा है कि इसका विवरण अभी लोक निर्माण विभाग नहीं दे सका है।
क्या कहते है जिम्मेदार
यूपी सेतु निगम आजमगढ़ के परियोजना प्रबंधक आरएस राय ने बताया कि लोक निर्माण विभाग की ओर से उसकी जमीन और राजस्व विभाग की ओर से नीजी लोगों की जमीन का अंतिम विवरण नहीं मिला है। यह विवरण आए तो इसे आंकलन करके स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद फ्लाई ओवर का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
वहीं लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि लोक निर्माण विभाग की ओर से फलाई ओवर संबंधी पूरा विवरण सेतु निगम के अधिकारियों को दे दिया गया है। हमारे स्तर से अब कुछ भी विवरण भेजना बाकी नहीं है। सेतु निगम को फ्लाई ओवर का निर्माण शुरू कराना चाहिए।
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शासन से स्वीकृति मिलने के बाद अब राजस्व और लोक निर्माण विभाग की ओर से फ्लाई ओवर की जद में आने वाली भूमि और उसके मूल्य का आंकलन भेजने में देरी की जा रही है। फ्लाई ओवर का नक्शा पास होकर सेतु निगम के पास पड़ा है। राजस्व और लोकनिर्माण विभाग की ओर से लोक निर्माण विभाग की जमीन और उसके मूल्य का आंकलन मिलने के बाद सेतु निगम फिर संशोधित आंकलन शासन को भेजेगा।वहां से अनुमति मिलने के बाद फ्लाई ओवर का निर्माण शुरू कर सकेगा। उधर किसान नेता देवप्रकाश राय ने विधान सभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पूर्व फ्लाईओवर निर्माण शुरू करने की मांग की है।
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बाल निकेतन क्रासिंग पर ट्रेनों के आने जाने पर 24 घंटे में कम से कम लगभग 36 बार फाटक बंद करना पड़ता है। हालांकि कोरोना संकट काल के बाद से ट्रेनों के संचालन में कुछ कमी आई है। फाटक बंद हो जाने के बाद दोनों तरफ सैकड़ों वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इसके चलते आवागमन सुचारू होने में काफी समय लग जाता है।
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इस संबंध में लोकदल के प्रदेश सचिव किसान नेता देव प्रकाश राय ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके मांग किया है कि जिला प्रशासन और रेलवे को बाल निकेतन पर फ्लाई ओवर अथवा अंडर ब्रिज बनाने का आदेश दिया जाए, जिससे लोगों को जाम से राहत मिल सके। चार मई 2018 को उच्च न्यायालय ने आदेश जारी किया कि डीएम और रेलवे के डीआरएम की संयुक्त बैठक कर फ्लाई ओवर अथवा अंडर ब्रिज बनाने का निर्णय लें। लगभग डेढ़ महीने बाद 26 जून 2018 को डीएम और डीआरएम की हुई बैठक में फ्लाई ओवर बनाने की सहमति के साथ शासन और रेलवे के उच्चाधिकारियों से स्वीकृति लेने की कवायद शुरू की गई।
दो जुलाई 2018 को तत्कालीन डीएम प्रकाश बिंदु ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण को संस्तुति के लिए पत्र भेजा। ओवर ब्रिज निर्माण की जद में आने वाले 296 अतिक्रमण कारियों को हटाने की सूचना दी गई तथा फ्लाई ओवर निर्माण में 95 करोड़ का स्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया। शासन में यह प्रकरण 20 महीनों तक लंबित रहा।
20 महीने बाद आठ अप्रैल 2020 को प्रमुख सचिव लोक निर्माण नितिन रमेश गोकर्ण ने बाल निकेतन पर फ्लाई ओवर के लिए सहमति पत्र जारी किया। सेतु निगम द्वारा बनाए गए ड्राफ्ट में कुछ संशोधन करने के लिए रेलवे के इंजीनियरों ने कहा। इस कार्य में दस महीने लगा दिए गए। ड्रॉफ्ट संशोधित होने के बाद भी अभी मामला लटका है। निर्माण की जद में आने वाले निजी लोगों के साथ ही लोक निर्माण विभाग की भी कुछ जमीन जा रही है। सेतु निगम के अफसरों का दावा है कि इसका विवरण अभी लोक निर्माण विभाग नहीं दे सका है।
क्या कहते है जिम्मेदार
यूपी सेतु निगम आजमगढ़ के परियोजना प्रबंधक आरएस राय ने बताया कि लोक निर्माण विभाग की ओर से उसकी जमीन और राजस्व विभाग की ओर से नीजी लोगों की जमीन का अंतिम विवरण नहीं मिला है। यह विवरण आए तो इसे आंकलन करके स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद फ्लाई ओवर का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
वहीं लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि लोक निर्माण विभाग की ओर से फलाई ओवर संबंधी पूरा विवरण सेतु निगम के अधिकारियों को दे दिया गया है। हमारे स्तर से अब कुछ भी विवरण भेजना बाकी नहीं है। सेतु निगम को फ्लाई ओवर का निर्माण शुरू कराना चाहिए।