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Mau News: जिलापूर्ति अधिकारी और लिपिक के खिलाफ एफआईआर के आदेश
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मऊ। मुख्य न्यायाधीश मजिस्ट्रेट डॉक्टर कृष्ण प्रताप सिंह ने फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर किसी दूसरे योग्य व्यक्ति के स्थान पर फर्जी तरीके से नौकरी कर राजकीय कोष से धन प्राप्त करने के मामले में जिलापूर्ति कार्यालय में कार्यरत लिपिक गगन कुमार सिंह व जिला पूर्ति अधिकारी विकास गौतम के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर को दिया है। साथ ही एफआईआर की प्रति एक सप्ताह के अंदर न्यायालय में प्रेषित करने का आदेश दिया है।
रामप्रवेश राजभर ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें उनका कहना था कि जिला पूर्ति कार्यालय में कार्यरत लिपिक गगन कुमार सिंह की नियुक्ति 1992 में गलत तरीके से की गई थी। शिकायत करने की बावजूद भी उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई की जा रही है। लिपिक को जिलापूर्ति अधिकारी विकास गौतम का संरक्षण प्राप्त है। आरोप है कि गगन कुमार सिंह की नियुक्ति तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुवेश कुमार सिंह के प्रभाव में फर्जी तरीके से की गई है। नियुक्ति के संबंध में किसी प्रकार की कोई रिक्ति न होने के कारण विज्ञापन समाचार पत्रों में प्रकाशित नहीं कराया गया था। नियुक्ति के समय गगन कुमार सिंह के पास नियुक्ति के लिए आवश्यक शैक्षिक प्रमाण पत्र नहीं थे। सीजेएम ने अपने आदेश मे उल्लेख किया है कि प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर किसी दूसरे योग्य व्यक्ति के स्थान पर फर्जी तरीके से नौकरी कर राजकीय कोष से धन प्राप्त किया जा रहा है। सीजेएम ने मामले की एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर को दिया है।
निरीक्षक मूलचंद चौरसिया के खिलाफ गैर जमानती वारंट, वेतन रोका
मऊ। विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट जनार्दन प्रसाद यादव ने हत्या के मामले में साक्ष्य देने के लिए कोर्ट में उपस्थित न होने पर मामले के तत्कालीन विवेचक निरीक्षक मूलचंद चौरसिया जो वर्तमान में बलिया जनपद में सहतवार थाना में प्रभारी निरीक्षक के पद पर तैनात हैं। उनके विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी किया है। साथ ही उनका वेतन रोकने का आदेश कोषाधिकारी बलिया को दिया है। मामले में सुनवाई के लिए 15 जुलाई की तिथि नियत की है। मामला दक्षिण टोला थाना क्षेत्र का है।
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मामले के अनुसार रामपुर चकिया निवासिनी पूनम यादव की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। वादिनी का आरोप था कि आरोपीगण अंकुर यादव आदि ने रंजिश को लेकर साजिश के तहत 10 फरवरी 23 को उसके पति विजय बहादुर यादव की चाकू से मारकर हत्या कर दिया। मामला विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट के न्यायालय में विचाराधीन चल रहा है। मामले में साक्ष्य के लिए विवेचक निरीक्षक मूलचंद चौरसिया को सम्मन भेजा गया था। जानकारी के बावजूद वह कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। इसे गंभीरता से लेते हुए विशेष न्यायाधीश ने निरीक्षक मूलचंद चौरसिया के विरुद्ध गैर जमानती वारंट के साथ ही धारा 350 सीआरपीसी के तहत नोटिस जारी किया है।
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रामप्रवेश राजभर ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें उनका कहना था कि जिला पूर्ति कार्यालय में कार्यरत लिपिक गगन कुमार सिंह की नियुक्ति 1992 में गलत तरीके से की गई थी। शिकायत करने की बावजूद भी उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई की जा रही है। लिपिक को जिलापूर्ति अधिकारी विकास गौतम का संरक्षण प्राप्त है। आरोप है कि गगन कुमार सिंह की नियुक्ति तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुवेश कुमार सिंह के प्रभाव में फर्जी तरीके से की गई है। नियुक्ति के संबंध में किसी प्रकार की कोई रिक्ति न होने के कारण विज्ञापन समाचार पत्रों में प्रकाशित नहीं कराया गया था। नियुक्ति के समय गगन कुमार सिंह के पास नियुक्ति के लिए आवश्यक शैक्षिक प्रमाण पत्र नहीं थे। सीजेएम ने अपने आदेश मे उल्लेख किया है कि प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर किसी दूसरे योग्य व्यक्ति के स्थान पर फर्जी तरीके से नौकरी कर राजकीय कोष से धन प्राप्त किया जा रहा है। सीजेएम ने मामले की एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर को दिया है।
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निरीक्षक मूलचंद चौरसिया के खिलाफ गैर जमानती वारंट, वेतन रोका
मऊ। विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट जनार्दन प्रसाद यादव ने हत्या के मामले में साक्ष्य देने के लिए कोर्ट में उपस्थित न होने पर मामले के तत्कालीन विवेचक निरीक्षक मूलचंद चौरसिया जो वर्तमान में बलिया जनपद में सहतवार थाना में प्रभारी निरीक्षक के पद पर तैनात हैं। उनके विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी किया है। साथ ही उनका वेतन रोकने का आदेश कोषाधिकारी बलिया को दिया है। मामले में सुनवाई के लिए 15 जुलाई की तिथि नियत की है। मामला दक्षिण टोला थाना क्षेत्र का है।
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मामले के अनुसार रामपुर चकिया निवासिनी पूनम यादव की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। वादिनी का आरोप था कि आरोपीगण अंकुर यादव आदि ने रंजिश को लेकर साजिश के तहत 10 फरवरी 23 को उसके पति विजय बहादुर यादव की चाकू से मारकर हत्या कर दिया। मामला विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट के न्यायालय में विचाराधीन चल रहा है। मामले में साक्ष्य के लिए विवेचक निरीक्षक मूलचंद चौरसिया को सम्मन भेजा गया था। जानकारी के बावजूद वह कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। इसे गंभीरता से लेते हुए विशेष न्यायाधीश ने निरीक्षक मूलचंद चौरसिया के विरुद्ध गैर जमानती वारंट के साथ ही धारा 350 सीआरपीसी के तहत नोटिस जारी किया है।