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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mau News ›   Only 12 out of 113 tanks built in four and a half years; company to be blacklisted.

Mau News: साढ़े चार साल में 113 में सिर्फ 12 टैंक बनाए, कंपनी होगी ब्लैकलिस्टेड

Tue, 06 Oct 2026 01:07 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2026 01:07 AM IST
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Only 12 out of 113 tanks built in four and a half years; company to be blacklisted.
मऊ। साढ़े चार साल में 113 में से सिर्फ 12 ओवरहेड टैंक बनाने वाली कंपनी केएलएसआर रेंज पावर को जिले से ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी शुरू हो गई है। जल निगम के अधिशासी अभियंता ने कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के लिए मुख्यालय को पत्र भेजा है।
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मुख्यालय से लिखित अनुमति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। कंपनी की ओर से बनाए गए 12 ओवरहेड टैंकों से भी अब तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। बीते अगस्त में हुई ऑनलाइन बैठक में भी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने पर चर्चा हुई थी और इस संबंध में विभाग से पत्र मांगा गया था।
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विभागीय आंकड़ों के अनुसार, करीब 1300 करोड़ रुपये की लागत से जल जीवन मिशन फेज-5 के तहत साढ़े चार साल पहले जिले में ओवरहेड टैंक निर्माण के लिए केएलएसआर रेंज पावर को 113, जीए इंफ्रा को 200 और फेज-2 के तहत एलसी इंफ्रा को 219 टैंकों का टेंडर मिला था। केएलएसआर रेंज पावर के 113 ओवरहेड टैंकों से 321 राजस्व गांवों को लाभान्वित होना है।
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ओवरहेड टैंक निर्माण और पाइपलाइन बिछाने के लिए कंपनी को 293.70 करोड़ रुपये का टेंडर दिया गया था। इसमें से 140.10 करोड़ रुपये का भुगतान भी हो चुका है। इसके बावजूद परियोजनाओं की प्रगति बेहद धीमी है। बीते जनवरी में परियोजनाओं का काम पूरा किए बिना कंपनी के कर्मचारी मऊ स्थित कार्यालय में ताला लगाकर जल निगम को बिना सूचना दिए चले गए थे।
कार्य में लापरवाही बरतने पर जल निगम की ओर से कंपनी पर कई बार जुर्माना भी लगाया गया, लेकिन इसके बावजूद काम में सुधार नहीं हुआ। साढ़े चार साल में कंपनी केवल 12 ओवरहेड टैंकों का निर्माण कर सकी है और इनसे भी पानी की सप्लाई शुरू नहीं हुई है।

बताया गया कि कंपनी के कर्मचारियों ने विभिन्न परियोजनाओं के लिए निर्माण सामग्री और पाइप आदि खरीदकर जगह-जगह डंप कर दिए हैं, जो लंबे समय से पड़े रहने के कारण खराब हो रहे हैं। कई गांवों में रास्ते खोदकर छोड़ दिए गए हैं, जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। काम की धीमी गति के चलते कंपनी पर कई बार 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
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