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बहाल की जाए पुरानी पेंशन
mau
Updated Fri, 16 Nov 2018 12:01 AM IST
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कलेक्ट्रेट पर राज्यकर्मचारी संयुक्त परिषद के तत्वावधान में पुरानी पेंशन को लेकर धरना प्रदर्शन करते कर्मचारी।
- फोटो : mau
पुरानी पेंशन बहाली सहित विभिन्न मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों ने गुरुवार को विकास भवन परिसर में धरना प्रदर्शन किया। साथ ही मुख्यमंत्री को संबोधित सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।
धरने को संबोधित करते हुए संगठन के अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली के लिए शासन स्तर से प्रदेश संगठन को आश्वासन दिया गया था, लेकिन मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। सातवें वेतन आयोग में नियमित वेतन संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नियमित किया जाए। कहा कि 25 अक्तूबर 2018 को चिकित्सा प्रतिपूर्ति संबंधित शासनादेश देकर निजी अस्पतालों में अपरिहार्य स्थिति में भी इलाज कराने जाने की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। चिकित्सा कर्मचारियों का मौलिक अधिकार है।
सरकार को सिर्फ यह देखना चाहिए कि संबंधित कर्मचारियों ने इलाज कराया है या नहीं। परवेज अहमद ने कहा कि सातवें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये किया जाए। संविदा और आउटसोर्सिंग आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, रसोइया को केंद्र एवं राज्य कर्मचारियों की भांति न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपया किया जाए। साथ ही नियमित किया जाए। चिकित्सा प्रतिपूर्ति से संबंधित 25 अक्तूबर 2018 को जारी शासनादेश वापस लिया जाए। मांगों पर विचार नहीं किया गया तो राज्यकर्मचारी आठ तथा नौ जनवरी को मांगों के समर्थन में दो दिवसीय हड़ताल पर चले जाएंगे।
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धरने को कैलाश यादव, अजीत कुमार, रामप्यारे, योगेंद्र कुमार, कमलेश, विजय कुमार, धर्म देव प्रसाद ,अतुल कुमार, चंद्र भूषण यादव, राकेश कुमार, वीरेंद्र कुमार उपाध्याय, राजेश यादव के साथ ही काफी संख्या में हड़ताली कर्मचारी शामिल रहे।
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धरने को संबोधित करते हुए संगठन के अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली के लिए शासन स्तर से प्रदेश संगठन को आश्वासन दिया गया था, लेकिन मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। सातवें वेतन आयोग में नियमित वेतन संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नियमित किया जाए। कहा कि 25 अक्तूबर 2018 को चिकित्सा प्रतिपूर्ति संबंधित शासनादेश देकर निजी अस्पतालों में अपरिहार्य स्थिति में भी इलाज कराने जाने की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। चिकित्सा कर्मचारियों का मौलिक अधिकार है।
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सरकार को सिर्फ यह देखना चाहिए कि संबंधित कर्मचारियों ने इलाज कराया है या नहीं। परवेज अहमद ने कहा कि सातवें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये किया जाए। संविदा और आउटसोर्सिंग आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, रसोइया को केंद्र एवं राज्य कर्मचारियों की भांति न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपया किया जाए। साथ ही नियमित किया जाए। चिकित्सा प्रतिपूर्ति से संबंधित 25 अक्तूबर 2018 को जारी शासनादेश वापस लिया जाए। मांगों पर विचार नहीं किया गया तो राज्यकर्मचारी आठ तथा नौ जनवरी को मांगों के समर्थन में दो दिवसीय हड़ताल पर चले जाएंगे।
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धरने को कैलाश यादव, अजीत कुमार, रामप्यारे, योगेंद्र कुमार, कमलेश, विजय कुमार, धर्म देव प्रसाद ,अतुल कुमार, चंद्र भूषण यादव, राकेश कुमार, वीरेंद्र कुमार उपाध्याय, राजेश यादव के साथ ही काफी संख्या में हड़ताली कर्मचारी शामिल रहे।