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अनियमितता में प्रधान और सेक्रेटरी को दिया नोटिस
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मऊ/ अमिला। बड़राव गांव में विकास कार्यों में 14 लाख 86 हजार 911 रुपये की अनियमितता सामने आई है। मामले में ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी को जिम्मेदार माना गया है। इस दोनों से इस रकम की वसूली के लिए नोटिस दिया गया है।
ज्येष्ठ लेखा परीक्षक अतुल कुमार सिंह की ओर से 10 दिसंबर 2020 को जारी पत्र के अनुसार बड़रावं गांव में लेखा परीक्षा का आनलाइन प्रोग्राम 25 नवंबर को नियत किया गया था। इसके संबंध में बड़रांव ग्राम पंचायत के सचिव के पास अभिलेखों की सूची के साथ इंटीमेशन लेटर भी भेज दिया गया था। सचिव ने आडिट प्रोग्राम को एप्रूव्ड भी कर दिया गया था। लेकिन आडिट के लिए निर्धारित तिथि को सचिव और प्रधान द्वारा एक भी अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया। लेखा परीक्षा के लिए रिपोर्ट न तैयार कर सचिव और प्रधान ने आडिट कराने में रुचि नहीं दिखाई। इसके चलते प्रिया साफ्ट पर आय व्यय के अनुसार डाटा तैयार कर अभिलेखों के अभाव में 2019-20 में आहरित समस्त धनराशि को अनियमितता की श्रेणी में डाल दिया गया।
ज्येष्ठ लेखा परीक्षक ने लिखा है कि इसके लिए ग्राम पंचायत के सेक्रेटरी जय प्रकाश और प्रधान प्रेमवदा राय जिम्मेदार हैं। उन्होंने लिखा है कि यदि एक सप्ताह के अंदर सचिव और प्रधान 2019-20 में आहरित धन राशि को प्रमाणित कराने के लिए अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए तो 14 लाख 86 हजार 911 रुपये की रकम सचिव और प्रधान से वसूल की जाएगी। ज्येष्ठ लेखा परीक्षक ने इस पत्र की कापी खंड विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी और जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को भी भेजा है। लेकिन नियत तिथि के बाद दो सप्ताह का समय बीतने के बाद भी सचिव और प्रधान ने अभिलेखों का सत्यापान नहीं कराया है। इस बाबत खंड विकास अधिकारी निवेदिता सिंह ने पहले तो प्रकरण की जानकारी से ही इनकार कर दिया, लेकिन बाद में कहा कि अभी नोटिस दिया गया है। नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने पर विधि संगत कार्रवाई की जाएगी। उधर प्रधान प्रेमवदा राय का कहना है कि कोई वित्तीय अनियमितता नहीं की गई है।
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ज्येष्ठ लेखा परीक्षक अतुल कुमार सिंह की ओर से 10 दिसंबर 2020 को जारी पत्र के अनुसार बड़रावं गांव में लेखा परीक्षा का आनलाइन प्रोग्राम 25 नवंबर को नियत किया गया था। इसके संबंध में बड़रांव ग्राम पंचायत के सचिव के पास अभिलेखों की सूची के साथ इंटीमेशन लेटर भी भेज दिया गया था। सचिव ने आडिट प्रोग्राम को एप्रूव्ड भी कर दिया गया था। लेकिन आडिट के लिए निर्धारित तिथि को सचिव और प्रधान द्वारा एक भी अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया। लेखा परीक्षा के लिए रिपोर्ट न तैयार कर सचिव और प्रधान ने आडिट कराने में रुचि नहीं दिखाई। इसके चलते प्रिया साफ्ट पर आय व्यय के अनुसार डाटा तैयार कर अभिलेखों के अभाव में 2019-20 में आहरित समस्त धनराशि को अनियमितता की श्रेणी में डाल दिया गया।
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ज्येष्ठ लेखा परीक्षक ने लिखा है कि इसके लिए ग्राम पंचायत के सेक्रेटरी जय प्रकाश और प्रधान प्रेमवदा राय जिम्मेदार हैं। उन्होंने लिखा है कि यदि एक सप्ताह के अंदर सचिव और प्रधान 2019-20 में आहरित धन राशि को प्रमाणित कराने के लिए अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए तो 14 लाख 86 हजार 911 रुपये की रकम सचिव और प्रधान से वसूल की जाएगी। ज्येष्ठ लेखा परीक्षक ने इस पत्र की कापी खंड विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी और जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को भी भेजा है। लेकिन नियत तिथि के बाद दो सप्ताह का समय बीतने के बाद भी सचिव और प्रधान ने अभिलेखों का सत्यापान नहीं कराया है। इस बाबत खंड विकास अधिकारी निवेदिता सिंह ने पहले तो प्रकरण की जानकारी से ही इनकार कर दिया, लेकिन बाद में कहा कि अभी नोटिस दिया गया है। नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने पर विधि संगत कार्रवाई की जाएगी। उधर प्रधान प्रेमवदा राय का कहना है कि कोई वित्तीय अनियमितता नहीं की गई है।
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