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बड़े नोटों के बंद होने से बाजार में सन्नाटा

Wed, 09 Nov 2016 11:50 PM IST
ब्यूररो,अमर उजाला/मऊ
ब्यूररो,अमर उजाला/मऊ Updated Wed, 09 Nov 2016 11:50 PM IST
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Notes the closure of the silence in the market
500 और एक हजार के नोट बंद होने के बाद नगर क्षेत्र के आजमगढ़ तिराहा स्थित एक डिपार्टमेंटल स्टोर में पसरा सन्नाटा।
केंद्र सरकार के जारी आदेश के बाद मंगलवार की देर शाम पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट चलन से बाहर होने का असर तुरंत दिखने लगा था। लेकिन दूसरे दिन बुधवार को बाजार की बिक्री न के बराबर रही। जो भी घर से बाहर खरीदारी के लिए निकले, उनके हाथों में पांच सौ और एक हजार रुपये की नोट थी। केंद्र सरकार के इस फैसले को लेकर जिला मुख्यालय से लेकर देहात के बाजारों और चट्टी-चौराहों पर बहस शुरू हुई तो देर शाम तक थमी नहीं थी। इस दौरान कोई सरकार के फैसले को सही तो कोई गलत ठहरा रहा था। 
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जिला मुख्यालय से लेकर जिले के प्रमुख बाजारों में बुधवार को सन्नाटे की स्थिति थी। अधिकांश दूकानदारों ने तो पांच और एक हजार का नोट लिया ही नहीं। कुछ ने लिया लेकिन जितने का नोट उतने मूल्य के सामने खरीदने के शर्त पर, इस दौरान जिस सिक्के को लोग अनदेखी कर रहे थे, आज उसकी पूछ बढ़ गई थी। अस्पतालों पर भी अन्य दिनों की अपेक्षा मरीजों की भीड़ कम रही। कुछ प्राइवेट डाक्टरों ने पांच सौ के साथ हजार रुपये के नोट को चलन में रखा।
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मुहम्मदाबादगोहना संवाददाता के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा एक हजार व पांच सौ के नोटों को तत्काल प्रभाव से बंद कर देने से बुधवार को बाजारों में पूरी तरह से अफरातफरी मची रही। लोगों को अपने गंतव्य तक जाने को लेकर भी भाडे़ का इंतजाम करने में पसीना छूट गया। मिठाई, फल, मोबाइल रिचार्ज, पेट्रोल डीजल आदि भराने वाले उपभोक्ताओं को तीन से चार गुना अधिक तेल व सामान लेना पड़ा जिसको लेकर जेबे ढीली करनी पड़ी। रोज की अपेक्षा बाजारों में आम लोगों की आमद भी काफी कम रही। सबसे अधिक परेशानी आटो, बस, आदि से यात्रा करने वाले यात्रियों को भाड़ा देने को लेकर हुई। यात्रा शुरू करने से पूर्व लोग फुटकर को लेकर इधर उधर घूमते रहे लेकिन अधिकांश लोगों को निराशा ही हाथ लगी।
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