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धान खरीद के नहीं लगाए गए पोस्टर
ब्यूरो, अमर उजाला/ मऊ
Updated Fri, 21 Oct 2016 11:28 PM IST
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तिल
- फोटो : getty images
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धान खरीद शुरू होने में 10 दिन ही शेष हैं, लेकिन अभी तक क्रय केंद्रों पर बैनर-पोस्टर तक नहीं लगाए जा सके हैं। किसानों की फसल का वास्तविक मूल्य दिलाने के लिए 48 केंद्र प्रस्तावित किए गए हैं। लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक पांच मिलरों को ही नामित किया जा सका है। इससे किसानों को क्रय केंद्रों पर चक्कर लगाने की संभावना प्रबल हो गई है। अधिकारियों का दावा है कि धान कुटाई में समस्या आने पर गैर जनपद भेजा जाएगा।
किसानों को धान की फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार की ओर से धान खरीद योजना शुरू की गई है। कई वर्षों से शासन प्रशासन के उदासीन रवैए से किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। राइस मिलरों पर करोड़ों का सीएमआर बकाया चल रहा है। प्रशासन की ओर से काफी संख्या में राइस मिलरों के काली सूूची में डालने से अभी तक पांच मिलरों को ही नामित किया जा सका है। जिले में एक नवंबर से धान की खरीद होनी है।
एजेंसीवार क्रय केंद्रों पर नजर डाला जाए तो विपणन के दो, पीसीएफ के 33, यूपी एग्रो के दो, कर्मचारी कल्याण निगम के दो, भारतीय खाद्य निगम के दो सहित 48 केंद्र प्रस्तावित किए गए हैं। समर्थन मूल्य कामन धान 1470 रुपये निर्धारित की गई है। शासन की ओर से इस वर्ष 25 हजार एमटी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गत वर्ष 22 हजार 900 एमटी के सापेक्ष 17 हजार एमटी की ही खरीद हो पाई थी। शासन की ओर से सभी क्रय केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं बहाल की जानी हैं।
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लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। अधिकांश साधन सहकारी समितियों पर ही क्रय केंद्र प्रस्तावित हैं, समितियां जर्जर हाल में हैं। हल्की बारिश होने पर गोदाम में रिसने लगता है। इससे सीलन से धान की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इस बाबत जिला खाद्य विपणन अधिकारी दिनेश कुमार तिवारी का कहना है कि धान खरीद की तैयारी पूरी कर ली गई है। एक नवंबर से खरीद शुरू होगी। धान कुटाई में समस्या आने पर धान को गैर जनपद की राइस मिलों को भेजा जाएगा। धान खरीद शुरू होने के दो दिन पहले बैनर पोस्टर लगा दिए जाएंगेे।
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किसानों को धान की फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार की ओर से धान खरीद योजना शुरू की गई है। कई वर्षों से शासन प्रशासन के उदासीन रवैए से किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। राइस मिलरों पर करोड़ों का सीएमआर बकाया चल रहा है। प्रशासन की ओर से काफी संख्या में राइस मिलरों के काली सूूची में डालने से अभी तक पांच मिलरों को ही नामित किया जा सका है। जिले में एक नवंबर से धान की खरीद होनी है।
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एजेंसीवार क्रय केंद्रों पर नजर डाला जाए तो विपणन के दो, पीसीएफ के 33, यूपी एग्रो के दो, कर्मचारी कल्याण निगम के दो, भारतीय खाद्य निगम के दो सहित 48 केंद्र प्रस्तावित किए गए हैं। समर्थन मूल्य कामन धान 1470 रुपये निर्धारित की गई है। शासन की ओर से इस वर्ष 25 हजार एमटी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गत वर्ष 22 हजार 900 एमटी के सापेक्ष 17 हजार एमटी की ही खरीद हो पाई थी। शासन की ओर से सभी क्रय केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं बहाल की जानी हैं।
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लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। अधिकांश साधन सहकारी समितियों पर ही क्रय केंद्र प्रस्तावित हैं, समितियां जर्जर हाल में हैं। हल्की बारिश होने पर गोदाम में रिसने लगता है। इससे सीलन से धान की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इस बाबत जिला खाद्य विपणन अधिकारी दिनेश कुमार तिवारी का कहना है कि धान खरीद की तैयारी पूरी कर ली गई है। एक नवंबर से खरीद शुरू होगी। धान कुटाई में समस्या आने पर धान को गैर जनपद की राइस मिलों को भेजा जाएगा। धान खरीद शुरू होने के दो दिन पहले बैनर पोस्टर लगा दिए जाएंगेे।