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Mau News: देश के ना केहू डिगा पाई, जबले बा संविधान का पन्ना...
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नगर के डी.सी.एस.के पीजी कॉलेज सभागार में काव्य-पुस्तिका क्रांतिदूत का लोर्कापण करते अतिथि। स
मऊ। देव श्री न्यास, मऊ एवं विद्या तिवारी मेमोरियल फाउंडेशन ट्रस्ट, गजियापुर के तत्वावधान में रविवार डीसीएस के पीजी कॉलेज सभागार में लोकार्पण और सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। इस दौरान महान मधुबन क्रांति के नायक स्व. रामसुंदर पांडेय जी के जीवन एवं संघर्षों पर आधारित, तारकेश्वर मिश्र राही द्वारा रचित काव्य पुस्तक ''क्रांतिदूत'' का लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ रामसुंदर पांडेय जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं डॉ. सूर्यभूषण द्विवेदी द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। इस दौरान कवि मुक्तेश्वर परासर को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। डॉ. सूर्यभूषण द्विवेदी ने शिवतांडव का ओजस्वी पाठ प्रस्तुत किया। डॉ. कमलेश राय ने मधुबन क्रांति के स्मरण में देश के ना केहू डिगा पाई, जबले बा संविधान का पन्ना भोजपुरी गीत सभा में सुनाया।
काव्य गोष्ठी में कवयित्री अनुप्रिया राय ''मधु'', डॉ. सूर्यभूषण द्विवेदी, युवा कवि सुमित उपाध्याय, वरिष्ठ गीतकार जितेंद्र मिश्र ''काका'', मनोज सिंह, मृत्युंजय तिवारी, रामस्नेही राय, मुक्तेश्वर परासर तथा मंच संचालक बृजेश गिरी ने अपनी देशभक्ति एवं जनसंवेदना से जुड़ी रचनाओं से समा बांध दिया।
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कथाकार व संपादक सुमित उपाध्याय ने ''क्रांतिदूत'' का परिचय देते हुए तारकेश्वर मिश्र राही के संघर्षों और पुस्तक की वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। पर्यावरणविद श्री पंकज तिवारी ने पुस्तक के अंशों का पाठ किया। पूर्व विधायक अमरेश पांडेय ने अपने पिता रामसुंदर पांडेय के संस्मरण साझा करते हुए उनके अंतिम संदेश—राजनीति में आना तो रामसुंदर पांडेय के सफेद कुर्ते पर कोई दाग न लगने देना—को दोहराया। वरिष्ठ साहित्यकार मनोज सिंह ने मधुबन क्रांति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और नई पीढ़ी को क्रांति की विचारधारा से जोड़ने के लिए अमित पांडेय के प्रयासों की सराहना की। अर्थशास्त्र के विद्वान प्रो. चंद्रप्रकाश राय ने भी विचार व्यक्त किए । साहित्यकार रामनिवास राय ने व्यंग्य रचनाएं प्रस्तुत कीं। देव श्री न्यास के संस्थापक, भाषाविद प्राचार्य डॉ. शर्वेश पाण्डेय ने सभी गणमान्य अतिथियों का आभार व्यक्त किया। संचालन बृजेश गिरी ने किया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
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कार्यक्रम का शुभारंभ रामसुंदर पांडेय जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं डॉ. सूर्यभूषण द्विवेदी द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। इस दौरान कवि मुक्तेश्वर परासर को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। डॉ. सूर्यभूषण द्विवेदी ने शिवतांडव का ओजस्वी पाठ प्रस्तुत किया। डॉ. कमलेश राय ने मधुबन क्रांति के स्मरण में देश के ना केहू डिगा पाई, जबले बा संविधान का पन्ना भोजपुरी गीत सभा में सुनाया।
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काव्य गोष्ठी में कवयित्री अनुप्रिया राय ''मधु'', डॉ. सूर्यभूषण द्विवेदी, युवा कवि सुमित उपाध्याय, वरिष्ठ गीतकार जितेंद्र मिश्र ''काका'', मनोज सिंह, मृत्युंजय तिवारी, रामस्नेही राय, मुक्तेश्वर परासर तथा मंच संचालक बृजेश गिरी ने अपनी देशभक्ति एवं जनसंवेदना से जुड़ी रचनाओं से समा बांध दिया।
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कथाकार व संपादक सुमित उपाध्याय ने ''क्रांतिदूत'' का परिचय देते हुए तारकेश्वर मिश्र राही के संघर्षों और पुस्तक की वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। पर्यावरणविद श्री पंकज तिवारी ने पुस्तक के अंशों का पाठ किया। पूर्व विधायक अमरेश पांडेय ने अपने पिता रामसुंदर पांडेय के संस्मरण साझा करते हुए उनके अंतिम संदेश—राजनीति में आना तो रामसुंदर पांडेय के सफेद कुर्ते पर कोई दाग न लगने देना—को दोहराया। वरिष्ठ साहित्यकार मनोज सिंह ने मधुबन क्रांति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और नई पीढ़ी को क्रांति की विचारधारा से जोड़ने के लिए अमित पांडेय के प्रयासों की सराहना की। अर्थशास्त्र के विद्वान प्रो. चंद्रप्रकाश राय ने भी विचार व्यक्त किए । साहित्यकार रामनिवास राय ने व्यंग्य रचनाएं प्रस्तुत कीं। देव श्री न्यास के संस्थापक, भाषाविद प्राचार्य डॉ. शर्वेश पाण्डेय ने सभी गणमान्य अतिथियों का आभार व्यक्त किया। संचालन बृजेश गिरी ने किया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।