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अमिला पीएचसी पर प्रसव की व्यवस्था नहीं, मरीज परेशान
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लोगों तक समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने को लेकर शासन की तरफ से लगातार प्रयास किया जा रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण सारे प्रयास विफल नजर आ रहे हैं। जिले भर में सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार के नाम पर महज खाना पूर्ति की जा रही है। मरीजों को स्वास्थ्य परीक्षण और इलाज की समुचित सुविधा नहीं मिल पा रही है। अमिला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इसका उदाहरण साबित हो रहा है।
स्थिति यह है कि अमिला पीएचसी पर सामान्य बीमारियों का ही इलाज हो रहा है। इस केंद्र पर बीते दो दशक से एक भी प्रसव नहीं हुआ है। जिम्मेदार मेडिकल उपकरण और मानव संसाधन की कमी का रोना रो रहे हैं। अमिला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर क्षेत्र के 20-30 हजार लोगों के इलाज की जिम्मेदारी है। लेकिन यह स्वास्थ्य केंद्र अपनी बदहाली पर आंसू बहाता नजर आ रहा है। पहले यह केंद्र किराये के भवन में संचालित होता था, लेकिन डेढ़ दशक पहले अस्पताल को अपना भवन मिल गया। बावजूद उपचार के नाम पर महज खानापूर्ति ही हो रही है। इस अस्पताल में इमरजेंसी सेवा उपलब्ध नहीं है। वहीं यहां प्रसव की व्यवस्था न होने से स्थानीय निवासियों को प्राइवेट अस्पतालों में काफी पैसे खर्च करना पड़ रहा है। अस्पताल में इस समय एक चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट और दो एएनएम की तैनाती है। स्थानीय लोगों ने कई बार जिम्मेदारों से यहां प्रसव कराने की व्यवस्था करने को लेकर मांग भी की गई। लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया जा सका। पीएचसी प्रभारी डा. संजय वर्मा ने बताया कि अस्पताल में प्रसव की व्यवस्था नहीं है। यहां प्रसव से संबंधित उपकरण, महिला चिकित्सक और मेडिकल स्टाफ की कमी है। जिस कारण यहां प्रसव नहीं कराया जाता है।
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स्थिति यह है कि अमिला पीएचसी पर सामान्य बीमारियों का ही इलाज हो रहा है। इस केंद्र पर बीते दो दशक से एक भी प्रसव नहीं हुआ है। जिम्मेदार मेडिकल उपकरण और मानव संसाधन की कमी का रोना रो रहे हैं। अमिला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर क्षेत्र के 20-30 हजार लोगों के इलाज की जिम्मेदारी है। लेकिन यह स्वास्थ्य केंद्र अपनी बदहाली पर आंसू बहाता नजर आ रहा है। पहले यह केंद्र किराये के भवन में संचालित होता था, लेकिन डेढ़ दशक पहले अस्पताल को अपना भवन मिल गया। बावजूद उपचार के नाम पर महज खानापूर्ति ही हो रही है। इस अस्पताल में इमरजेंसी सेवा उपलब्ध नहीं है। वहीं यहां प्रसव की व्यवस्था न होने से स्थानीय निवासियों को प्राइवेट अस्पतालों में काफी पैसे खर्च करना पड़ रहा है। अस्पताल में इस समय एक चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट और दो एएनएम की तैनाती है। स्थानीय लोगों ने कई बार जिम्मेदारों से यहां प्रसव कराने की व्यवस्था करने को लेकर मांग भी की गई। लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया जा सका। पीएचसी प्रभारी डा. संजय वर्मा ने बताया कि अस्पताल में प्रसव की व्यवस्था नहीं है। यहां प्रसव से संबंधित उपकरण, महिला चिकित्सक और मेडिकल स्टाफ की कमी है। जिस कारण यहां प्रसव नहीं कराया जाता है।
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