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काम हुआ नहीं, बिना भौतिक सत्यापन के कर दिया बीस लाख का भुगतान
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रतनपुरा/मऊ। लॉक डाउन में जहां सरकार बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने का काम कर रही हैं। वहीं चंद लोगों की कारस्तानी से सरकार के प्रयासों को पलीता लग रहा है। इसकी एक बानगी जिले के रतनपुरा ब्लाक में देखने को मिली। यहां पर बीते दिनों करीब छह करोड़ से अधिक का भुगतान मनरेगा के तहत हुए कार्यों के लिए किया गया। लेकिन काम की पड़ताल करने पर हकीकत में वहां कोई काम ही नहीं दिखा। मामला गढ़वा गांव का है जहां बिना काम के ही 19 लाख 98 हजार रुपया भुगतान का मामला सामने आया है। यही नहीं एक अन्य जगह पर एक काम पर दो बोर्ड लगाकर 10500 रुपये का भुगतान करने की बात चर्चा में है। इस बारे में बीडीओ रतनपुरा रमेश यादव ने कहा कि दो दिन का मौका दें तब हम कुछ बता पाएंगे। वहीं सीडीओ राम सिंह वर्मा ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है, लेकिन अब जानकारी हुई है तो जांच कराकर दोषियों के विरुद्घ कार्रवाई की जाएगी।
लॉकडाउन के दौरान जॉब कार्ड धारकों का बकाया भुगतान करने के लिए सरकार ने बजट जारी किया था। ताकि मजदूरों को भोजन, पानी की दिक्कत न हो। इसके साथ ही दूसरे चरण के लॉक डाउन में मनरेगा के तहत कार्यों को कराने की अनुमति दी गई। बशर्ते काम सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखकर करना था। इसी का लाभ उठाते हुए आनन-फानन में रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र में फर्जी भुगतान किया गया। पूरे ब्लाक क्षेत्र में हुए कार्यों के लिए छह करोड़ 25 लाख रुपये का भुगतान किया गया। भुगतान के बाद ऑनलाइन हुई मनरेगा की सूची का अवलोकन कर हुए कार्यों की पड़ताल की गई। इस दौरान अकेले सिर्फ गढ़वा गांव का पड़ताल करने पर पाया गया कि यहां मनरेगा के तहत विकास कार्य कर 19 लाख 98 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। यह भुगतान 11 बिंदुओं में किया गया है। पड़ताल करने पर पाया गया कि गांव में दो काम पूरा किया गया है। इसके अलावा एक काम अधूरा है। इतना ही नहीं एक काम पर दो बोर्ड लगाकर दस हजार पांच सौ रुपये का भुगतान कर दिया गया है।
गांव में रहने वाले आईएएस अधिकारी ईश्वरी पांडेय के घर के पास पिचिंग का कार्य आधा किया गया है। इसके अलावा अशोक पांडेय के घर के पास इंटरलाकिंग का कार्य पूरा हुआ है। जबकि रमाशंकर पांडेय के घर के पास से प्राथमिक विद्यालय तक इंटरलाकिंग का कार्य भी पूरा किया गया है। इसके बाद के सभी काम हवा में है। बात करने पर गांव के प्रधान मलाई यादव ने बताया कि गांव में सभी कार्य पूरा किया गया है। यह विरोधियों की साजिश है। जबकि खंड विकास अधिकारी रमेश यादव ने बताया कि हम दो दिन बाद इस संबंध में कुछ बोल पाएंगे। मुख्य विकास अधिकारी राम सिंह वर्मा ने बताया कि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं, लेकिन अब जानकारी हुई है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
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लॉकडाउन के दौरान जॉब कार्ड धारकों का बकाया भुगतान करने के लिए सरकार ने बजट जारी किया था। ताकि मजदूरों को भोजन, पानी की दिक्कत न हो। इसके साथ ही दूसरे चरण के लॉक डाउन में मनरेगा के तहत कार्यों को कराने की अनुमति दी गई। बशर्ते काम सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखकर करना था। इसी का लाभ उठाते हुए आनन-फानन में रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र में फर्जी भुगतान किया गया। पूरे ब्लाक क्षेत्र में हुए कार्यों के लिए छह करोड़ 25 लाख रुपये का भुगतान किया गया। भुगतान के बाद ऑनलाइन हुई मनरेगा की सूची का अवलोकन कर हुए कार्यों की पड़ताल की गई। इस दौरान अकेले सिर्फ गढ़वा गांव का पड़ताल करने पर पाया गया कि यहां मनरेगा के तहत विकास कार्य कर 19 लाख 98 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। यह भुगतान 11 बिंदुओं में किया गया है। पड़ताल करने पर पाया गया कि गांव में दो काम पूरा किया गया है। इसके अलावा एक काम अधूरा है। इतना ही नहीं एक काम पर दो बोर्ड लगाकर दस हजार पांच सौ रुपये का भुगतान कर दिया गया है।
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गांव में रहने वाले आईएएस अधिकारी ईश्वरी पांडेय के घर के पास पिचिंग का कार्य आधा किया गया है। इसके अलावा अशोक पांडेय के घर के पास इंटरलाकिंग का कार्य पूरा हुआ है। जबकि रमाशंकर पांडेय के घर के पास से प्राथमिक विद्यालय तक इंटरलाकिंग का कार्य भी पूरा किया गया है। इसके बाद के सभी काम हवा में है। बात करने पर गांव के प्रधान मलाई यादव ने बताया कि गांव में सभी कार्य पूरा किया गया है। यह विरोधियों की साजिश है। जबकि खंड विकास अधिकारी रमेश यादव ने बताया कि हम दो दिन बाद इस संबंध में कुछ बोल पाएंगे। मुख्य विकास अधिकारी राम सिंह वर्मा ने बताया कि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं, लेकिन अब जानकारी हुई है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
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