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वविदित अस्पताल के विरुद्ध कार्रवाई नहीं
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मऊ। शहर कोतवाली क्षेत्र के सहादतपुरा हाइवे स्थित विवादित नीजी अस्पताल के विरुद्ध जिला प्रशासन लीपापोती कर रहा है। बिना पंजीकरण के चलने वाले इस अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग ने कई दिन पहले ही सील कर दिया है। लेकिन इस फर्जी अस्पताल के संचालक के लिए कई दिन बाद मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। सीएमओ और शहर कोतवाल के दावे इक दूसरे के दावों का खंडन कर रहे हैं। फिल वक्त विवादित अस्पताल संचालक के विरुद्ध कार्रवाई न होने से जनपदवासियों में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया है। हाइवे पर स्थित एक अस्पताल वाराणसी के एक डाक्टर के नाम पर संचालित किया जाता है। लेकिन उस डाक्टर ने कहादिया कि उस नीजी अस्पताल से उनका कोई लेना देना नहीं है। इधर इस अस्पताल में वाराणसी के ही उस डाक्टर के नाम पर मरीजों को भर्ती कर लिया जाता है। हाल के दिनों में कई मरीजों की मौत के बाद अस्पताल में तीमरदारों ने हंगामा किया। लेकिन पुलिस ने इनमें से किसी भी शिकायत कर्ता के प्रार्थनापत्र पर अस्पताल संचालक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज नहीं किया। बाद में इस बात का खुलासा हो गया कि इस अस्पताल में जिस डाक्टर का नाम लेकर मरीजों को भर्ती किया जाता है , वे तो वाराण्सी में अपना अलग अस्पताल चलाते हैं। इसकी शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अस्पताल में छापा मारकर निरीक्षण किया और शिकायत सही पाते हुए अस्पताल को सील कर दिया। लेकिन एक सप्ताह बाद भी अस्पताल ंसचालकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज न होने से लोग हैरत में हैं। इस मामले में शनिवार को दोपहर बाद कलेक्ट्रेट में आयोजित प्रेस वार्ता में सीएमओ उा. एससी सिंह ने दावा किया कि शहर कोतवाली पुलिस को विवादित अस्पताल के संचालक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर दे दी गई है। इसके विपरीत शहर कोतवाल राम सिंह ने दावा किया कि उन्हें अब तक अस्पताल के विरुद्ध कोई तहरीर ही नहीं मिली है। दोनों के दावे एक दूसरे के दावों का खंडन कर रहे हैं। देखना है कि इस मामले में पुलिस कुछ कर पाने की हैसियत में होती है अथवा केवल वादे ही किए जाते रहेंगे।
सुभाष यादव
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सुभाष यादव