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रैन बसेरा : शराबी अंदर तो जरूरतमंद बाहर, घोसी और कोपागंज में नहीं रूकी एक भी महिला

Wed, 14 Jan 2026 12:54 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jan 2026 12:54 AM IST
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Night shelter: Drunkards inside, needy people outside; not a single woman stayed at the shelters in Ghosi and Kopaganj.
घोसी नगर पंचायत में बना रैन बसेरा बंद, बाहर अलाव तापते लोग
जिला अस्पताल, रोडवेज और कोपागंज और घोसी के चार रैन बसेरों में नहीं थी हीटर की व्यवस्था
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संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ। बेघरों, मजदूरों और जरूरतमंदों को ठंड में खुले में न सोना पड़े इसके लिए प्रशासन ने सारी सुविधाओं के साथ रैन बसेरों की व्यवस्था की है। लेकिन जानकारी के अभाव में बहुत कम लोग यहां पहुंच पा रहे हैं। संवाद न्यूज एजेंसी ने देर रात जब चार रैन बसेरों की पड़ताल की तो पता चला कि शराबी और असामाजिक तत्व रैन बसेरों के अंदर हैं वहीं आधार कार्ड न होने के कारण जरूरत मंद बाहर ही रह जा रहे हैं।
जिला अस्पताल परिसर में बने रैनबसेरे के अंदर न तो सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था थी न ही ठंड से बचाव के लिए हीटर ही लगाया गया था। इतना ही नहीं यहां रुके चार लोगों में एक ने शराब पी रखी थी। जानकारी लेने पर वह उलझने लगा। शराबी रैन बसेरे से महज तीन किमी दूर भीटी का रहने वाला था, जो शराब पीने के बाद यहां रूकने चला आया। उधर, एक ही पर्दे को आड़ कर यहां महिलाओं के लिए भी रुकने की व्यवस्था की गई थी। असुरक्षित माहौल के कारण यहां महिलाएं रुकने से परहेज करती रहीं। पूछताछ में जिला अस्पताल के रैन बसेरे के केयरटेकर ने बताया कि 20 दिसंबर से अब तक 176 पुरुष रुक चुके हैं, वहीं मात्र 19 महिलाएं ही रुकीं। वह भी कुछ देर रूक कर चली गईं। जिला अस्पताल के रैन बसेरे में सोमवार को रुके हुए चार लोग सरवन, राहुल, परवीन, चंदन थे। इसमें दो लोग तो शहर के थे।
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रोडवेज परिसर : 10 की जगह 7 ही बेड
शहर के रोडवेज के रैन बसेरे में 10 बेड के जगह सात बेड ही मिले। यहां मौजूद केयर टेकर खुद एक बेड पर सोता दिखा, बाकी 6 बेड फुल थे।यहां भी पर्दा को आड़ कर महिलाओं के रुकने की व्यवस्था की गई थी। महिला रैन बसेरे में एक बुजुर्ग व्यक्ति सोता दिखा। यहां ठंड से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। हीटर नदारद मिला।
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इनसेट
घोसी और कोपागंज का रैन बसेरा बंद मिला, एक भी महिला नहीं रुकी
घोसी और कोपागंज नगर पंचायत में बने रैन बसेरा सोमवार को बंद मिले। रैन बसेरे के सामने लोग अलाव तापते दिखे। यहां रुकनेवाला कोई नहीं था। केयरटेकर से मिली जानकारी के अनुसार यहां महिलाओं और पुरुषों के लिए 8-8 बेड की व्यवस्था की गई थी। लेकिन पूरे एक महीने में एक भी महिला यहां रुकने के लिए नहीं आई। वहीं एक महीने में कोपागंज में 21 और घोसी में 19 लोग रूके।

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आधार नहीं, इसलिए बाहर सोना पड़ रहा
शहर के दोनों रैन बसेरों में सख्त नियम है कि बिना आधार कार्ड या किसी पहचान पत्र के किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इससे प्रवासी मजदूर रैन बसेरों में नहीं जा पा रहे हैं। नतीजतन, वे ठंड में सड़कों, दुकानों के सामने या खुले में सोने को मजबूर दिखे।

वर्जन
रैन बसेरों का नियमित निरीक्षण किया जाता है, जिला अस्पताल के रैन बसेरे में असामाजिक तत्व के रूकने के मामले की जांच कराई जाएगी।
दिनेश कुमार, ईओ, नगर पालिका, मऊ
ठंड में रैन बसेरों में रूकने की व्यवस्था की गई है। फिर भी लोग कम क्यों पहुंच रहे हैं, इसकी जांच कराई जाएगी।
अनिल कुमार, ईओ, घोसी, नगर पंचायत

घोसी नगर पंचायत में बना रैन बसेरा बंद, बाहर अलाव तापते लोग

घोसी नगर पंचायत में बना रैन बसेरा बंद, बाहर अलाव तापते लोग

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