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इंतजाम पर कहीं भारी पड़ न जाए लापरवाही
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Thu, 29 Sep 2016 12:09 AM IST
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रौजा स्थित दुर्गा पंडाल के सामने से गुजरा बिजली का केबल।
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नवरात्र शुरू होने में चंद दिन शेष रह गए हैं। दुर्गा पूजा पंडालों के निर्माण की कवायद शुरू हो गई है। प्रशासन की ओर से विद्युत तारों के नीचे व आसपास पंडालों के निर्माण पर रोक के बाद भी नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में विद्युत तारों के नीचे पंडाल का निर्माण शुरू हो गया है।
जिले के अधिकांश इलाकों में दशकों पूर्व खींचे गए विद्युत तार जर्जर हाल में हो गए हैं, लेकिन बिजली विभाग की ओर से पर्व के मद्देनजर पंडालों से होकर गुजरे जर्जर तारों को बदलने की कोई योजना नहीं है। संवेदनशील मामला होने के चलते अग्निशमन विभाग के अधिकारी आग से बचाव की वैकल्पिक व्यवस्था करने की रणनीति बनाने में जुटे हैं।
नवरात्र एक अक्तूबर से शुरू हो रहा है। दुर्गा पंडालों में विधि विधान से सप्तमी के दिन दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित होती हैं, लेकिन अभी से पंडालों का निर्माण शुरू हो गया है। नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में 357 दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित की जाएगी।
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थानावार स्थापित होने वाली दुर्गा प्रतिमाओं पर नजर डालें तो शहर कोतवाली में 28, दक्षिणटोला में 11, सरायलखंसी 33, घोसी में 48, दोहरीघाट में 24, कोपागंज में 47, मुहम्मदाबाद गोहना में 32, चिरैयाकोट में 20, रानीपुर में 20, मधुबन में 64 व हलधरपुर में 30 सहित 357 दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित होगी। हालत यह है कि नगर सहित जिले के अधिकांश इलाकों दशकों पूर्व विद्युतीकरण कराया गया है। विभाग की ओर से बिछाए गए तार व पोल जर्जर हाल में हैं।
उपभोक्ताओं के मुताबिक विद्युत उपकेंद्रों से गुजरी लाइनों के तार काफी ढीले हो गए हैं। तेज हवा बहते ही तारों में स्पार्किंग होने लगती है। इससे शार्ट सर्किट के चलते विद्युत आपूर्ति बाधित हो जाती है। पर्व के मद्देनजर बिजली विभाग की ओर से जर्जर तारों को बदलना तो दूर कार्ययोजना तक तैयार नहीं है। अग्निशमन विभाग की ओर से आग से बचाव के उपाय का प्लान तैयार करने में लगा हुआ है। साथ ही पदाधिकारियों को गाइडलाइन भी जारी किया है।
इस बाबत अधीक्षण अभियंता विद्युत एमके अग्रवाल का कहना है कि दुर्गा पूजा समितियों के पदाधिकारियों से विद्युत तारों के नीचे पंडाल नहीं बनाने की अपील की गई है। पदाधिकारियों द्वारा सूचना देने पर जर्जर तारों को बदल दिया जाएगा। वहीं जिला अग्निशमन अधिकारी लक्ष्मण यादव का कहना है कि पंडालों को आग से बचाव के सभी उपाय किए गए हैं। दुुुर्गा पूजा समितियों के पदाधिकारियों को गाइडलाइन उपलब्ध करा दिए गए हैं।
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जिले के अधिकांश इलाकों में दशकों पूर्व खींचे गए विद्युत तार जर्जर हाल में हो गए हैं, लेकिन बिजली विभाग की ओर से पर्व के मद्देनजर पंडालों से होकर गुजरे जर्जर तारों को बदलने की कोई योजना नहीं है। संवेदनशील मामला होने के चलते अग्निशमन विभाग के अधिकारी आग से बचाव की वैकल्पिक व्यवस्था करने की रणनीति बनाने में जुटे हैं।
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नवरात्र एक अक्तूबर से शुरू हो रहा है। दुर्गा पंडालों में विधि विधान से सप्तमी के दिन दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित होती हैं, लेकिन अभी से पंडालों का निर्माण शुरू हो गया है। नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में 357 दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित की जाएगी।
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थानावार स्थापित होने वाली दुर्गा प्रतिमाओं पर नजर डालें तो शहर कोतवाली में 28, दक्षिणटोला में 11, सरायलखंसी 33, घोसी में 48, दोहरीघाट में 24, कोपागंज में 47, मुहम्मदाबाद गोहना में 32, चिरैयाकोट में 20, रानीपुर में 20, मधुबन में 64 व हलधरपुर में 30 सहित 357 दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित होगी। हालत यह है कि नगर सहित जिले के अधिकांश इलाकों दशकों पूर्व विद्युतीकरण कराया गया है। विभाग की ओर से बिछाए गए तार व पोल जर्जर हाल में हैं।
उपभोक्ताओं के मुताबिक विद्युत उपकेंद्रों से गुजरी लाइनों के तार काफी ढीले हो गए हैं। तेज हवा बहते ही तारों में स्पार्किंग होने लगती है। इससे शार्ट सर्किट के चलते विद्युत आपूर्ति बाधित हो जाती है। पर्व के मद्देनजर बिजली विभाग की ओर से जर्जर तारों को बदलना तो दूर कार्ययोजना तक तैयार नहीं है। अग्निशमन विभाग की ओर से आग से बचाव के उपाय का प्लान तैयार करने में लगा हुआ है। साथ ही पदाधिकारियों को गाइडलाइन भी जारी किया है।
इस बाबत अधीक्षण अभियंता विद्युत एमके अग्रवाल का कहना है कि दुर्गा पूजा समितियों के पदाधिकारियों से विद्युत तारों के नीचे पंडाल नहीं बनाने की अपील की गई है। पदाधिकारियों द्वारा सूचना देने पर जर्जर तारों को बदल दिया जाएगा। वहीं जिला अग्निशमन अधिकारी लक्ष्मण यादव का कहना है कि पंडालों को आग से बचाव के सभी उपाय किए गए हैं। दुुुर्गा पूजा समितियों के पदाधिकारियों को गाइडलाइन उपलब्ध करा दिए गए हैं।