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विकास से कोसों दूर हैं राजस्व गांव सम्मनपुरा और कड़ौरा
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Sat, 22 Aug 2015 11:37 PM IST
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सपा सरकार की महत्वाकांक्षी योजना लोहिया गांव से भी गांवों का कल्याण होता नहीं दिख रहा। रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के सम्मनपुरा व कड़ौरा राजस्व गांव में दो वर्ष पूर्व 30 लाख की लागत से कराए गए विकास कार्यों को आधा अधूरा छोड़ दिया गया है। जबकि प्रशासन ने कागज पर संतृप्त करार दिया है। अब ग्रामीण परेशान हैं।
गांवों की विकास गति तेज करने के लिए सपा शासन काल में वर्ष 2012-13 में रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र कड़ौरा तथा सम्मनपुरा राजस्व गांव को डा. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना’ के तहत चयनित किया गया।
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गांव के विकास के लिए शासन से नाली, शौचालय, आवास आदि के लिए 30 लाख रुपया स्वीकृत किया गया। लेकिन हालत यह है कि जमीनी स्तर पर सारे कार्य अधूरे छोड़ दिए गए हैं।
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हालत यह है कि कड़ौरा गांव में सीसी रोड आधा अधूरा छोड़ दिया गया है। यही नहीं अधिकांश शौचालय उपयोग करने लायक नहीं रह गए हैं। ग्राम प्रधान की मानें तो अब तक 24 शौचालयों का बजट आवंटन नहीं किया जा सका है। यही नहीं कम क्षमता का ट्रांसफार्मर लगा होने के चलते ओवरलोड से आए दिन विद्युत आपूर्ति बाधित रहती है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से जगह-जगह जलजमाव है।
इस संबंध में गांव के फूलबदन यादव, बब्बन यादव, भोला, देवेंद्र, उपेंद्र आदि का कहना है कि शासन की मंशा के अनुरूप विकास कार्य नहीं कराए गए हैं। वहीं, ग्राम प्रधान पारस यादव का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
यही हाल सम्मनपुरा लोहिया गांव का है। गांव के विकास के लिए शासन से नाली, शौचालय, आवास आदि के लिए 30 लाख रुपया स्वीकृत किया गया था। कागज पर तो सबकुछ ठीकठाक है, लेकिन विकास कार्य कहीं दिख नहीं रहा। प्रशासन की ओर से बनवाए गए अधिकांश शौचालयों को बनवाने में अनियमितता बरती गई है।
ग्रामीण उपयोग करने के बजाय लकड़ी तथा अन्य सामान रख रहे हैं। गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
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गांवों की विकास गति तेज करने के लिए सपा शासन काल में वर्ष 2012-13 में रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र कड़ौरा तथा सम्मनपुरा राजस्व गांव को डा. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना’ के तहत चयनित किया गया।
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गांव के विकास के लिए शासन से नाली, शौचालय, आवास आदि के लिए 30 लाख रुपया स्वीकृत किया गया। लेकिन हालत यह है कि जमीनी स्तर पर सारे कार्य अधूरे छोड़ दिए गए हैं।
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हालत यह है कि कड़ौरा गांव में सीसी रोड आधा अधूरा छोड़ दिया गया है। यही नहीं अधिकांश शौचालय उपयोग करने लायक नहीं रह गए हैं। ग्राम प्रधान की मानें तो अब तक 24 शौचालयों का बजट आवंटन नहीं किया जा सका है। यही नहीं कम क्षमता का ट्रांसफार्मर लगा होने के चलते ओवरलोड से आए दिन विद्युत आपूर्ति बाधित रहती है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से जगह-जगह जलजमाव है।
इस संबंध में गांव के फूलबदन यादव, बब्बन यादव, भोला, देवेंद्र, उपेंद्र आदि का कहना है कि शासन की मंशा के अनुरूप विकास कार्य नहीं कराए गए हैं। वहीं, ग्राम प्रधान पारस यादव का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
यही हाल सम्मनपुरा लोहिया गांव का है। गांव के विकास के लिए शासन से नाली, शौचालय, आवास आदि के लिए 30 लाख रुपया स्वीकृत किया गया था। कागज पर तो सबकुछ ठीकठाक है, लेकिन विकास कार्य कहीं दिख नहीं रहा। प्रशासन की ओर से बनवाए गए अधिकांश शौचालयों को बनवाने में अनियमितता बरती गई है।
ग्रामीण उपयोग करने के बजाय लकड़ी तथा अन्य सामान रख रहे हैं। गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।