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मां के कुष्मांडा स्वरूप की हुई आराधना
mau
Updated Sat, 13 Oct 2018 12:16 AM IST
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मां कूष्ममांडा
- फोटो : mau
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शुक्रवार को दुर्गा मंदिरों में मां के कुष्मांडा स्वरूप की आराधना की गई। नगर सहित जिले के प्रमुख देवी मंदिरों में तड़के से ही मां की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। वहीं नगर सहित ग्रामीण इलाकों में रामलीला का मंचन होने से देर शाम तक चहल- पहल बढ़ गई है।
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नवरात्र के तीसरे दिन नगर के शीतला माता मंदिर, वनदेवी धाम, निधियांव गांव का अष्टभुजी मंदिर सहित विभिन्न देवी मंदिरों मेें मां दुर्गा के चौथे स्वरूप चतुर्थ कुष्मांडा की आराधना की गई। मंदिरों में मां का विधि विधान से पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। श्रद्धालु शांत भाव से अपनी बारी की प्रतीक्षा करते देखे गए।
उत्साहित श्रद्धालुओं के जयकारे से वातावरण गूंज रहा था। निधियांव स्थित अष्टभुजी मंदिर तथा वनदेवी मंदिर तथा मां कोयल मर्यादा भवानी माई मंदिर पर तड़के से ही भक्तों का रेला लगा रहा। लंबी लाइन होने से लोगों को काफी देर तक प्रतीक्षा करना पड़ रहा था। मां की दिव्य अलौकिक प्रतिमा की झलक पाते ही श्रद्धालुओं का सारा कष्ट दूर हो रहा था।
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कोई मन्नत मांगने केे लिए मां का दर्शन करने आया था, तो कोई मनोकामना पूरी होने के बाद मां की विनती के लिए आया था। कतार में खड़े श्रद्धालु मां की महिमा का गुणगान करते हुए थक नहीं रहे थे। पिपरीडीह संवाददाता के अनुसार क्षेत्र कहिनौर स्थित वनदेवी धाम पर दूरदराज से श्रद्धालुओं का सुबह से ही पूजा-अर्चना करने के लिए तांता लगा रहा। इसके साथ ही विभिन्न गांवों के दुर्गा मंदिरों में श्रद्धालुओं का रेला लगा रहा। लोगों ने विधि विधान से पूजन अर्चन किया। क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में देर रात तक रामलीला का मंचन होने से मेला जैसा दृश्य हो जा रहा है।
फतेहपुर मंडाव संवाददाता के अनुसार मधुबन तहसील क्षेत्र के कटघरा शंकर रौंजा स्थित आत्मदर्शनीय दुर्गा मंदिर का शिलान्यास 26 नवंबर 1981 को तत्कालीन पीठाधीश्वर गोरक्षनाथ संस्थान गोरखपुर के महंत अवैद्यनाथ ने किया था । तीसरे नवरात्र के दिन यहां पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा थी। लोगों की मान्यता है कि माता की पूजा अर्चना करने से सुख, शांति, यश, वैभव, और मान सम्मान की वृद्धि होती है । शारदीय नवरात्रि मे नवदुर्गा के लिए श्रद्धालुओं द्वारा दो दिन या पूरे नौ दिन का व्रत रखते है ।
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नवरात्र के तीसरे दिन नगर के शीतला माता मंदिर, वनदेवी धाम, निधियांव गांव का अष्टभुजी मंदिर सहित विभिन्न देवी मंदिरों मेें मां दुर्गा के चौथे स्वरूप चतुर्थ कुष्मांडा की आराधना की गई। मंदिरों में मां का विधि विधान से पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। श्रद्धालु शांत भाव से अपनी बारी की प्रतीक्षा करते देखे गए।
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उत्साहित श्रद्धालुओं के जयकारे से वातावरण गूंज रहा था। निधियांव स्थित अष्टभुजी मंदिर तथा वनदेवी मंदिर तथा मां कोयल मर्यादा भवानी माई मंदिर पर तड़के से ही भक्तों का रेला लगा रहा। लंबी लाइन होने से लोगों को काफी देर तक प्रतीक्षा करना पड़ रहा था। मां की दिव्य अलौकिक प्रतिमा की झलक पाते ही श्रद्धालुओं का सारा कष्ट दूर हो रहा था।
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कोई मन्नत मांगने केे लिए मां का दर्शन करने आया था, तो कोई मनोकामना पूरी होने के बाद मां की विनती के लिए आया था। कतार में खड़े श्रद्धालु मां की महिमा का गुणगान करते हुए थक नहीं रहे थे। पिपरीडीह संवाददाता के अनुसार क्षेत्र कहिनौर स्थित वनदेवी धाम पर दूरदराज से श्रद्धालुओं का सुबह से ही पूजा-अर्चना करने के लिए तांता लगा रहा। इसके साथ ही विभिन्न गांवों के दुर्गा मंदिरों में श्रद्धालुओं का रेला लगा रहा। लोगों ने विधि विधान से पूजन अर्चन किया। क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में देर रात तक रामलीला का मंचन होने से मेला जैसा दृश्य हो जा रहा है।
फतेहपुर मंडाव संवाददाता के अनुसार मधुबन तहसील क्षेत्र के कटघरा शंकर रौंजा स्थित आत्मदर्शनीय दुर्गा मंदिर का शिलान्यास 26 नवंबर 1981 को तत्कालीन पीठाधीश्वर गोरक्षनाथ संस्थान गोरखपुर के महंत अवैद्यनाथ ने किया था । तीसरे नवरात्र के दिन यहां पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा थी। लोगों की मान्यता है कि माता की पूजा अर्चना करने से सुख, शांति, यश, वैभव, और मान सम्मान की वृद्धि होती है । शारदीय नवरात्रि मे नवदुर्गा के लिए श्रद्धालुओं द्वारा दो दिन या पूरे नौ दिन का व्रत रखते है ।