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एसटीपी के लिए तीन वर्ष में नपा नहीं तलाश पाया जमीन
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नगर के बंधा रोड पर नदी में गिरता शहर के नाले का पानी।
- फोटो : MAU
तमसा को निर्मल बनाने का प्रयास को लेकर नगर पालिका के जिम्मेदार उदासीन हैं। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए नपा द्वारा जमीन चिहिन्त नहीं करने से यह योजना फाइल में दबी है। जबकि 2019 में एनजीटी की टीम ने निरीक्षण के दौरान इसको लेकर नाराजगी जताई थी। बावजूद जमीन चिहिन्त न होने से यह योजना अधर में है। ऐसे में तमसा नदी को प्रदूषित जल से बचाने की समस्या का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
नपा द्वारा जमीन चिहिन्त कर इसे प्लांट को बनाया गया होता तो न केवल नदी को प्रदूषित होने से रोका जा सकता था, बल्कि नगर के सीवरेज और स्टार्म वाटर ड्रेनेज के जरिए निकलने वाले जल को शोधित कर उसे कृषि कार्य के उपयोग में लाया जा सकता है। साथ ही भूगर्भ के गिरते जलस्तर को भी सुधारा जा सकता है।
2019 में एनजीटी की टीम ने तमसा नदी के साथ नगर पालिका क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान नदी के पानी का नमूना लेने के बाद एनजीटी ने जिला प्रशासन को गाइडलाइन जारी किया था कि नगर क्षेत्र से निकलने वाले गंदे पानी को सीधे नदी में न गिराया जाए, बल्कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार कर पानी को साफ करने के बाद ही नदी में गिराया जाए। एनजीटी के निर्देश पर तत्कालीन डीएम ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने इस कार्य की जिम्मेदारी जल निगम के साथ नगर पालिका को सौंपा था। उधर, कार्यदायी संस्थान जल निगम ने अपने हिस्से का कार्य पूरा कर प्रस्ताव शासन को भेज भी दिया। लेकिन करीब तीन वर्ष बाद भी नगर पालिका अपने हिस्से का काम यानी जमीन चिहिन्त करने का कार्य नहीं कर सका। फलस्वरूप यह परियोजना अधर में अटकी है।
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जल्द ही जमीन चिहिन्त किया जाएगा। वर्तमान में तमसा नदी को प्रदूषित होने से बायो रेमिडेशन तकनीकी का सहारा लिया जा रहा है। जहां पानी फिल्टर होने के बाद ही नदी में गिर रहा है।
- तैयब पालकी, नपाध्यक्ष
प्रदूषण से मुक्ति सिंचाई के लिए उपलब्ध होता पानी
ट्रीटमेंट प्लांट लगने से नगर क्षेत्र के 42 वार्डों से निकलने वाले हजारों गैलन गंदा पानी के साथ शौचालयों से निकलने वाले कचरा को संग्रहित कर उसका ट्रीटमेंट, प्लांट के जरिए किया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद निकलने वाला कचरा खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है और पानी सिंचाई के कार्य में प्रयोग किया जा सकेगा। इस परियोजना से तमसा नदी जहां स्वच्छ होती, वहीं नगर पालिका क्षेत्र के आसपास रहने वाले किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने के साथ ही खाद भी उपलब्धता होती। इससे नगर पालिका का राजस्व भी बढ़ेगा।
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नपा द्वारा जमीन चिहिन्त कर इसे प्लांट को बनाया गया होता तो न केवल नदी को प्रदूषित होने से रोका जा सकता था, बल्कि नगर के सीवरेज और स्टार्म वाटर ड्रेनेज के जरिए निकलने वाले जल को शोधित कर उसे कृषि कार्य के उपयोग में लाया जा सकता है। साथ ही भूगर्भ के गिरते जलस्तर को भी सुधारा जा सकता है।
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2019 में एनजीटी की टीम ने तमसा नदी के साथ नगर पालिका क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान नदी के पानी का नमूना लेने के बाद एनजीटी ने जिला प्रशासन को गाइडलाइन जारी किया था कि नगर क्षेत्र से निकलने वाले गंदे पानी को सीधे नदी में न गिराया जाए, बल्कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार कर पानी को साफ करने के बाद ही नदी में गिराया जाए। एनजीटी के निर्देश पर तत्कालीन डीएम ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने इस कार्य की जिम्मेदारी जल निगम के साथ नगर पालिका को सौंपा था। उधर, कार्यदायी संस्थान जल निगम ने अपने हिस्से का कार्य पूरा कर प्रस्ताव शासन को भेज भी दिया। लेकिन करीब तीन वर्ष बाद भी नगर पालिका अपने हिस्से का काम यानी जमीन चिहिन्त करने का कार्य नहीं कर सका। फलस्वरूप यह परियोजना अधर में अटकी है।
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जल्द ही जमीन चिहिन्त किया जाएगा। वर्तमान में तमसा नदी को प्रदूषित होने से बायो रेमिडेशन तकनीकी का सहारा लिया जा रहा है। जहां पानी फिल्टर होने के बाद ही नदी में गिर रहा है।
- तैयब पालकी, नपाध्यक्ष
प्रदूषण से मुक्ति सिंचाई के लिए उपलब्ध होता पानी
ट्रीटमेंट प्लांट लगने से नगर क्षेत्र के 42 वार्डों से निकलने वाले हजारों गैलन गंदा पानी के साथ शौचालयों से निकलने वाले कचरा को संग्रहित कर उसका ट्रीटमेंट, प्लांट के जरिए किया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद निकलने वाला कचरा खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है और पानी सिंचाई के कार्य में प्रयोग किया जा सकेगा। इस परियोजना से तमसा नदी जहां स्वच्छ होती, वहीं नगर पालिका क्षेत्र के आसपास रहने वाले किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने के साथ ही खाद भी उपलब्धता होती। इससे नगर पालिका का राजस्व भी बढ़ेगा।