रिश्तों का खून: मऊ में भतीजे ने ली मुंबई से आए चाचा की जान, चचेरी बहनों को भी मारपीट कर किया घायल
यूपी के मऊ जिले के गहनी गांव में सोमवार दोपहर एक युवक ने फावड़े से वार कर चाचा को मौत के घाट उतार दिया। जमीन के विवाद में खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया।
विस्तार
यूपी के मऊ जिले के गहनी गांव में सोमवार दोपहर जमीनी विवाद को लेकर एक युवक ने अपने चाचा पर फावड़े से हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। बीचबचाव में आई चचेरी बहनों को भी मारपीट कर घायल कर दिया। इस खौफनाक घटना से पूरे गांव में हड़कंप की स्थिति बन गई। ग्रामीण हतप्रभ हैं। मृतक पैतृक संपत्ति के बंटवारे के लिए 15 दिन पहले मुंबई से गांव आया था।
हलधरपुर थाना क्षेत्र के गहनी गांव निवासी देवेंद्र सिंह (42) और विनोद सिंह सगे भाईं है। दोनों के बीच जमीनी विवाद चला आ रहा है। जमीन बंटवारे की नीयत से मुंबई में काम कर परिवार का भरण पोषण करने वाले देवेंद्र 15 दिन पहले गांव आए थे। जमीन बंटवारे को लेकर दोनों पक्षों में सोमवार सुबह पंचायत भी हुई थी।
तब दोनों पक्षों में आपसी सहमती बनी थी। लेकिन दोपहर में मामला बिगड़ गया। करीब एक देवेंद्र सिंह अपनी पत्नी बीनू, दोनों बेटियां सोनाली (15) भूमि (12) और 8 वर्षीय पुत्र सन्नी के साथ अपने घर के बाहर बरामदे में बैठे थे। इसी बीच विनोद सिंह का पुत्र शुभम आया और घर के सामने लगे हैंडपंप से छेड़छाड़ करने लगा। इसे देखकर देवेंद्र ने जब विरोध किया तो वह अपशब्द बोलने लगा।
विवाद बढ़ा तो आक्रोशित शुभम ने पास में रखे फावड़े से देवेंद्र सिंह के सिर पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। बीचबचाव में बेटियां आईं तो भी हमलावर ने उन दोनों को भी मारपीट कर घायल कर दिया। फावड़े के वार से देवेंद्र अचेत होकर गिर गए। थोड़ी ही देर में मौत हो गई। दोनों बेटियां और पत्नी समेत अन्य परिजनों में कोहराम मच गया। वारदात को अंजाम देकर आरोपी मौके से फरार हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
ट्रेन निरस्त नहीं होती तो बच जाती देवेंद्र की जान
जमीनी विवाद में असमय मौत के शिकार बने देवेंद्र सिंह ने बीते 18 जून को मुंबई जाने के लिए लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस में आरक्षण कराया था। लेकिन अग्निपथ को लेकर हुए बवाल के बाद रेलवे द्वारा ट्रेन को निरस्त कर दिया गया। सोमवार को विवाद में देवेंद्र की हत्या उसके भतीजे ने ही कर दी। लोगों के बीच चर्चा रही कि अगर ट्रेन निरस्त नहीं होती तो देवेंद्र सिंह की जान नहीं जाती।