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अंतिम संस्कार के लिए छोटा पड़ गया मुक्तिधाम
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दोहरीघाट। कोरोना संक्रमण काल के दौरान मुक्तिधाम पर शवों की संख्या में दिनों दिन तेजी से इजाफा हो रहा है। मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम का श्मशान छोटा पड़ जा रहा है।पिछले नौ दिनों में केवल मुुक्तिधाम पर 434 मृतकों के अंतिम संस्कार किए गए हैं। स्थान की कमी के चलते लोगों को सिंचाई विभाग के बंधे पर मृतकों की अंत्येष्टि करनी पड़ रही है।
कोरोना संक्रमण काल में जिस भारी संख्या में श्मशान पर अंतिम संस्कार के लिए मृतकों के शव आ रहे हैं , उतने कभी नहीं आए थे। यहां मुक्तिधाम श्मशान पर शवों के आने का सिलसिला दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। मंगलवार को मुक्तिधाम श्मशान घाट पर रेकार्ड 131 शवों की अंन्त्येष्टि की गई। मृतकों के शवों की अधिक संख्या के चलते यहां भारी भीड़ हो रही है। शवों को जलाने के लिये अब श्मशान घाट पर जगह कम पड़ती जा रही है। लोग एक किलोमीटर दूर तक सिंचाई विभाग के बंधे पर शवों का दाह संस्कार कर रहे हैं। लोगों को शव जलाने के लिये घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
बताते चलें कि कटान के चलते मुक्तिधाम श्मशान पर पहले से ही जगह कम थी। कटान के कारण शवों को जलाने के लिए टीन शेड की व्यवस्था की गई थी। वह कटान के चलते नदी में विलीन हो चुका है। सामान्य दिनों में यहां आने वाले शवों का आंतिम संस्कार नदी के किनारे बची जगह पर किया जाता था। आम दिनों में सामान्यतया औसतन 15 से 20 शवों के अंतिम संस्कार यहां मुक्तिधाम पर किए जाते थे, लेकिन इन दिनों रोजाना ही सौ से अधिक म़ृतकों के शव अंतिम संस्कार के लिए लाए जा रहे हैं। यहां पिछले नौ दिनों में 434 मृतकों के अंतिम संस्कार किए जा चुके हैं। इन आंकड़ों को देखकर ऐसा लगता है कि दिनों दिनों यहां आने वाले शवों की संख्या में भारी इजाफा होता जा रहा है।
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प्रतिदिन शहर के कब्रिस्तानों में दफनाएं जा रहें दस से 15 शव
मऊ। कोरोना संक्रमण का एक नया रुप चेस्ट कंजेक्शन मरीजों की दशा खराब कर रहा, जांच में निगेटिव आने वाले मरीजों के फेफड़े में यह संक्रमण सिटी स्कैन करने पर डिटेक्टट हो रहा। इसके चलते सांस की समस्या खड़ी हो रही। समय से आक्सीजन न मिलने पर मरीज की सांस दो से चार दिन में टूट जा रही है। पूर्व चेयर मैन अरशद जमाल ने बताया कि बरवक्त शहर में प्रति दिन दस से 15 मौतें हो रही है। बोले मौत का कारण सांस लेेने में तकलीफ सामने आ रही। कई मरीजों की जान बचाने के लिए वो खुद आक्सीजन की व्यवस्था करने का प्रयास किए। लेकिन संख्या ज्यादा है, इसके चलते संभव नहीं है।
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कोरोना संक्रमण काल में जिस भारी संख्या में श्मशान पर अंतिम संस्कार के लिए मृतकों के शव आ रहे हैं , उतने कभी नहीं आए थे। यहां मुक्तिधाम श्मशान पर शवों के आने का सिलसिला दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। मंगलवार को मुक्तिधाम श्मशान घाट पर रेकार्ड 131 शवों की अंन्त्येष्टि की गई। मृतकों के शवों की अधिक संख्या के चलते यहां भारी भीड़ हो रही है। शवों को जलाने के लिये अब श्मशान घाट पर जगह कम पड़ती जा रही है। लोग एक किलोमीटर दूर तक सिंचाई विभाग के बंधे पर शवों का दाह संस्कार कर रहे हैं। लोगों को शव जलाने के लिये घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
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बताते चलें कि कटान के चलते मुक्तिधाम श्मशान पर पहले से ही जगह कम थी। कटान के कारण शवों को जलाने के लिए टीन शेड की व्यवस्था की गई थी। वह कटान के चलते नदी में विलीन हो चुका है। सामान्य दिनों में यहां आने वाले शवों का आंतिम संस्कार नदी के किनारे बची जगह पर किया जाता था। आम दिनों में सामान्यतया औसतन 15 से 20 शवों के अंतिम संस्कार यहां मुक्तिधाम पर किए जाते थे, लेकिन इन दिनों रोजाना ही सौ से अधिक म़ृतकों के शव अंतिम संस्कार के लिए लाए जा रहे हैं। यहां पिछले नौ दिनों में 434 मृतकों के अंतिम संस्कार किए जा चुके हैं। इन आंकड़ों को देखकर ऐसा लगता है कि दिनों दिनों यहां आने वाले शवों की संख्या में भारी इजाफा होता जा रहा है।
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प्रतिदिन शहर के कब्रिस्तानों में दफनाएं जा रहें दस से 15 शव
मऊ। कोरोना संक्रमण का एक नया रुप चेस्ट कंजेक्शन मरीजों की दशा खराब कर रहा, जांच में निगेटिव आने वाले मरीजों के फेफड़े में यह संक्रमण सिटी स्कैन करने पर डिटेक्टट हो रहा। इसके चलते सांस की समस्या खड़ी हो रही। समय से आक्सीजन न मिलने पर मरीज की सांस दो से चार दिन में टूट जा रही है। पूर्व चेयर मैन अरशद जमाल ने बताया कि बरवक्त शहर में प्रति दिन दस से 15 मौतें हो रही है। बोले मौत का कारण सांस लेेने में तकलीफ सामने आ रही। कई मरीजों की जान बचाने के लिए वो खुद आक्सीजन की व्यवस्था करने का प्रयास किए। लेकिन संख्या ज्यादा है, इसके चलते संभव नहीं है।