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15 से अधिक गांव नदी के घेरे में, टापू की शक्ल में हुए गांव
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दुबारी। घाघरा नदी के जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी रहने से देवारा क्षेत्र के इलाके के लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 10 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। गांवों के मुख्य संपर्क मार्ग डूब गए हैं। लोगों को कमर भर पानी से होकर आना जाना पड़ रहा है। देवारा क्षेत्र के 20 से अधिक गांव नदी के घेरे में आ जाने से टापू की शक्ल में हो गए हैं। पशुओं के लिए चारा का संकट उत्पन्न हो गया है। तहसील प्रशासन की तरफ से कागज में नावों की तैनाती कर दी है। लेकिन अभी तक नाव की व्यवस्था न होने से लोग जान जोखिम में डालकर चारा लाने को विवश हैं। 15 किमी एरिया में जलमग्न हुई हजारों एकड़ फसलों के नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है।
नदी का जलस्तर 24 घंटे में 10 सेमी की रफ्तार से बढ़ने से तटवर्ती क्षेत्रों के लोगों की नींद उड़ गई है। नदी के बाढ़ का पानी गांवों में घुस जाने से बिंटोलिया, नई बस्ती, जरलहवा, खैरा, हरिलाल का पुरा, भगत का पुरा, बईरकंटा, बिशुन पुरवा, हाता, नकीहवा, धूस, मनमन का पुरा, पब्बर का पुरा, चौहानपुर, गजियापुर छावनी, बरोहा, कुंवरपुरवा, परसिया जयराम गिरी, चक्की मूसाडोही गांव नदी के घेरे में आ जाने से टापू की शक्ल में तब्दील हो गए हैं। देवारा क्षेत्र का दुबारी-बरहजघाट मार्ग डूबने लगा है। इससे आना जाना मुश्किल हो रहा है। इसके साथ ही जलमग्न दो दर्जन संपर्क मार्ग जलमग्न होने से 15 दिनों से आवागमन ठप है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अभी तक तहसील प्रशासन की तरफ से नाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। इससे लोगों को जान जोखिम में डालकर चारा लाना पड़ रहा है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो शनिवार को हाहा नाला रेगुलेटर पर नदी का जलस्तर 66.10 मीटर रहा। जबकि शुक्रवार को 66.00 मीटर रहा। खतरा निशान 66.31 मीटर है। मधुबन तहसील के 15 किमी एरिया में जलमग्न हुए धान, बाजरा, मक्का, गन्ना सहित हजारों एकड़ फसलों के नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है।
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25 घरों में घुसा पानी, कई मंड़इयां धाराशायी:
दुबारी। घाघरा नदी के बाढ़ का पानी क्षेत्र के तिघरा गांव के तालाब में तेजी से गिर रहा है। इसके चलते तालाब के किनारे बसे हुए 25 घरों में पानी घुस गया है। इसके चलते कई मंड़इयां धाराशायी हो गई। इसके चलते लोगों को नारकीय जीवन जीना पड़ रहा है। विषैले जीव जंतुओं का खतरा बढ़ गया है। इस संबंध में श्रीकृष्ण मौर्य, बालकिशुन मौर्य, श्रीराम मौर्य, मानिकचंद राजभर, रामाशंकर राजभर, रामजीत पासवान, रामहरख गौड़, कवलदेव गौड़, सुरेश गौड़, लखंदर गौड़ का कहना है कि वर्षो पूर्व अहिरुपुर लौवासाथ के मार्ग पर पुलिया तो बन गई, लेकिन अभी तक रेगुलेटर नहीं लग सका है। इसके चलते नदी का पानी गांव तक आ जा रहा है। प्रशासन की तरफ से अभी तक सुधि नहीं ली जा सकी है।
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नदी का जलस्तर 24 घंटे में 10 सेमी की रफ्तार से बढ़ने से तटवर्ती क्षेत्रों के लोगों की नींद उड़ गई है। नदी के बाढ़ का पानी गांवों में घुस जाने से बिंटोलिया, नई बस्ती, जरलहवा, खैरा, हरिलाल का पुरा, भगत का पुरा, बईरकंटा, बिशुन पुरवा, हाता, नकीहवा, धूस, मनमन का पुरा, पब्बर का पुरा, चौहानपुर, गजियापुर छावनी, बरोहा, कुंवरपुरवा, परसिया जयराम गिरी, चक्की मूसाडोही गांव नदी के घेरे में आ जाने से टापू की शक्ल में तब्दील हो गए हैं। देवारा क्षेत्र का दुबारी-बरहजघाट मार्ग डूबने लगा है। इससे आना जाना मुश्किल हो रहा है। इसके साथ ही जलमग्न दो दर्जन संपर्क मार्ग जलमग्न होने से 15 दिनों से आवागमन ठप है।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अभी तक तहसील प्रशासन की तरफ से नाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। इससे लोगों को जान जोखिम में डालकर चारा लाना पड़ रहा है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो शनिवार को हाहा नाला रेगुलेटर पर नदी का जलस्तर 66.10 मीटर रहा। जबकि शुक्रवार को 66.00 मीटर रहा। खतरा निशान 66.31 मीटर है। मधुबन तहसील के 15 किमी एरिया में जलमग्न हुए धान, बाजरा, मक्का, गन्ना सहित हजारों एकड़ फसलों के नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है।
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25 घरों में घुसा पानी, कई मंड़इयां धाराशायी:
दुबारी। घाघरा नदी के बाढ़ का पानी क्षेत्र के तिघरा गांव के तालाब में तेजी से गिर रहा है। इसके चलते तालाब के किनारे बसे हुए 25 घरों में पानी घुस गया है। इसके चलते कई मंड़इयां धाराशायी हो गई। इसके चलते लोगों को नारकीय जीवन जीना पड़ रहा है। विषैले जीव जंतुओं का खतरा बढ़ गया है। इस संबंध में श्रीकृष्ण मौर्य, बालकिशुन मौर्य, श्रीराम मौर्य, मानिकचंद राजभर, रामाशंकर राजभर, रामजीत पासवान, रामहरख गौड़, कवलदेव गौड़, सुरेश गौड़, लखंदर गौड़ का कहना है कि वर्षो पूर्व अहिरुपुर लौवासाथ के मार्ग पर पुलिया तो बन गई, लेकिन अभी तक रेगुलेटर नहीं लग सका है। इसके चलते नदी का पानी गांव तक आ जा रहा है। प्रशासन की तरफ से अभी तक सुधि नहीं ली जा सकी है।