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मानसून सिर पर, नहीं हो सका जर्जर भवनों का चिन्हांकन
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मऊ। मानसून आने ही वाला है, लेकिन नगरपालिका ने इसे लेकर कोई तैयारी ही नहीं किया है।नगरपालिका ने न तो जर्जर मकानों को चिह्नीकरण का कार्य शुरु ही नहीं किया है।इसके अतिरिक्त नालों की सफाई का काम भी नही शुरू किया है। मानसून पूर्व पहली ही बरसात ने नगरपालिका की तैयारियों की पोल खोल दिया है।
एक जर्जर मकान गिरने से चार लोग घायल हो गए। जबकि शहर के नाले उफना गए और नालों का गंदा पानी सड़कों पर आ गया। नगर पालिका के 42 वार्डो में कई जर्जर भवन हैं, जो आंधी-बारिश में कभी भी धराशाई हो सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो जनहानि की आंशका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद नगर पालिका प्रशासन और अन्य जिम्मेदार इसकी अनदेखी कर रहे हैं।
बीते शुक्रवार को बारिश से शहर के अलीनगर मुहल्ले में एक जर्जर भवन की छत गिर गई थी। इससे चार लोग दबकर घायल हो गए थे।माना जाता है कि 15 जून से मानसून का आगमन हो जाता है, ऐसे में मानसून में केवल एक सप्ताह शेष रह गए है। बावजूद नगर पालिका द्वारा जर्जर भवनों को चिह्नित करने के लिए कोई कवायद नहीं किया गया है। शुक्रवार को हुए हादसे के बाद कोई कवायद न होने से बड़ा सवाल उठ रहा है कि खतरे को भांपने के बाद भी जिम्मेदारों ने कोई पहल नहीं की है।
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नगर में जिम्मेदारों की लापरवाही से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। हादसे की चिंता से नगरवासियों में भय व्याप्त है। वहीं इस बाबत नपाध्यक्ष तैयब पालकी का कहना है कि जर्जर भवनों को चिहिन्त करने के लिए टीम गठित कर दिया गया। जो कि नगर के विभिन्न क्षेत्रों में बने जर्जर भवनों को चिह्नित कर उसकी सूची तैयार कर रही है।
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एक जर्जर मकान गिरने से चार लोग घायल हो गए। जबकि शहर के नाले उफना गए और नालों का गंदा पानी सड़कों पर आ गया। नगर पालिका के 42 वार्डो में कई जर्जर भवन हैं, जो आंधी-बारिश में कभी भी धराशाई हो सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो जनहानि की आंशका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद नगर पालिका प्रशासन और अन्य जिम्मेदार इसकी अनदेखी कर रहे हैं।
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बीते शुक्रवार को बारिश से शहर के अलीनगर मुहल्ले में एक जर्जर भवन की छत गिर गई थी। इससे चार लोग दबकर घायल हो गए थे।माना जाता है कि 15 जून से मानसून का आगमन हो जाता है, ऐसे में मानसून में केवल एक सप्ताह शेष रह गए है। बावजूद नगर पालिका द्वारा जर्जर भवनों को चिह्नित करने के लिए कोई कवायद नहीं किया गया है। शुक्रवार को हुए हादसे के बाद कोई कवायद न होने से बड़ा सवाल उठ रहा है कि खतरे को भांपने के बाद भी जिम्मेदारों ने कोई पहल नहीं की है।
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नगर में जिम्मेदारों की लापरवाही से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। हादसे की चिंता से नगरवासियों में भय व्याप्त है। वहीं इस बाबत नपाध्यक्ष तैयब पालकी का कहना है कि जर्जर भवनों को चिहिन्त करने के लिए टीम गठित कर दिया गया। जो कि नगर के विभिन्न क्षेत्रों में बने जर्जर भवनों को चिह्नित कर उसकी सूची तैयार कर रही है।