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मानसून नजदीक फिर भी नगर पालिका नहीं चिन्ह्ति कर सका जर्जर भवनों को
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मऊ। तानाबानी की नगरी मऊ में दर्जनों जर्जर मकान मौत का सामान बनकर खड़े हैं। नियमानुसार मानसून सत्र से पूर्व नगर निकायों को इन भवनों को चिहिन्त करना होता है। लेकिन नगर पालिका मऊ सहित जिले की दूसरी कई निकायों द्वारा इस बार जर्जर भवनों को चिहिन्त करने का कार्य नहीं किया जा सका है। ऐसे में निकायों की लापरवाही बारिश में कई परिवारों के जान माल का नुकसान का कारण बन सकती है। हालात यह है कि जर्जर कई भवनों की हालत काफी दयनीय हैं। इनके आसपास से गुजरते समय लोगों के मन में भय बना रहता है कि कहीं ये गिर न जाएं।
शहर के कई हिस्सों में बनी संकरी गलियों में रोज बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना लगा रहता है। कई गलियों की हालत तो ऐसी है कि वहां दो बाइक एकसाथ नहीं जा सकतीं हैं। जबकि इन गलियों में दशकों पहले बने जर्जर मकानों में लोग रहते हैं। इसमें कई जर्जर भवनों को नगर पालिका द्वारा पूर्व में जर्जर चिहिन्त कर इसकी सूचना जिला प्रशासन को भेज चुके है। बारिश के मौसम में हर वर्ष शहर में किसी न किसी क्षेत्र में कोई जर्जर भवन गिरना आम बात है।
नगर पालिका सूत्रों की माने तो वर्ष 2018 में नगर पालिका के 18 मुहल्लें 61 मकान जर्जर भवन चिहिन्त किए गए थे, इसमें भीटी में 7, कतुआपुरा में 1, नियाजमुहम्मदपुरा में 1, औरंगाबाद में 3, मुंशीपुरा में 6, रहजनिया में 1, कासिमपुरा में 4, देवपहलवा में 1, सहादतपुरा में 7, डोमनपुरा में 4, निजामुद्दीनपुरा में 3 सहित अन्य जगहों पर है। इस वर्ष नगर पालिका द्वारा नगर के 42 वार्डो में जर्जर मकानों को चिहिन्त करने का कार्य नहीं किया जा सका है।
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जले के मुहम्मदाबाद गोहना, वलीदपुर नगर पंचायत के अलावा किसी निकाय द्वारा सर्वे कार्य इस वर्ष नहीं किया गया। मुहम्मदाबाद के ईओ रामसमुख ने बताया कि मुहम्मदाबाद नगर पंचायत में सात जर्जर भवनों को चिहिन्त किया गया है।इन भवन में रहने वाले लोगों को दूसरे जगह रहने के लिए सुझाव दिया गया है। साथ ही कुछ को पीएम आवास भी स्वीकृत हुआ है।वहीं वलीदपुर नगर पंचायत ने भी इस वर्ष दो जर्जर भवनों को चिहिन्त किया गया है।
इसी क्रम में अदरी नगर पंचायत का दावा है कि उनके क्षेत्र में एक भी जर्जर मकान नहीं है, जिनके थे उन्हें आवास मुहैया करा दिया गया। वहीं कोपागंज नगर पंचायत द्वारा इस वर्ष सर्वे कार्य नहीं किया गया। बीते वर्ष सर्वे में 5 जर्जर भवन चिहिनत किया गया था।घोसी निकाय द्वारा भी सर्वे कार्य नहीं किया गया। दोहरीघाट निकाय का दावा है कि उनके क्षेत्र में केवल एक जर्जर भवन है।
सर्वे में चलता है रसूख का प्रभाव
मऊ। नगर पालिका द्वारा जर्जर भवनों को चिह्नित करने वाले सर्वे में पारदर्शिता की जरुरत है। सूत्रों की माने तो नगर पालिका द्वारा 2019 में 49 मकानों को चिह्नित किया गया था। जबकि 2020 में यह संख्या 61 तक पहुंच गई। ऐसे में केवल एक वर्ष में 12 मकान एक वर्ष में कैसे जर्जर हो गए। सूत्रों की माने तो राजनैतिक दवाब और मिली भगत से भी जर्जर भवनों को चिहिन्त करने में भेदभाव किया जाता है। जबकि सर्वे कार्य को पूरे पारदर्शिता से किया जाए तो यह संख्या 100 से ज्यादा पहुंच सकती है।
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शहर के कई हिस्सों में बनी संकरी गलियों में रोज बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना लगा रहता है। कई गलियों की हालत तो ऐसी है कि वहां दो बाइक एकसाथ नहीं जा सकतीं हैं। जबकि इन गलियों में दशकों पहले बने जर्जर मकानों में लोग रहते हैं। इसमें कई जर्जर भवनों को नगर पालिका द्वारा पूर्व में जर्जर चिहिन्त कर इसकी सूचना जिला प्रशासन को भेज चुके है। बारिश के मौसम में हर वर्ष शहर में किसी न किसी क्षेत्र में कोई जर्जर भवन गिरना आम बात है।
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नगर पालिका सूत्रों की माने तो वर्ष 2018 में नगर पालिका के 18 मुहल्लें 61 मकान जर्जर भवन चिहिन्त किए गए थे, इसमें भीटी में 7, कतुआपुरा में 1, नियाजमुहम्मदपुरा में 1, औरंगाबाद में 3, मुंशीपुरा में 6, रहजनिया में 1, कासिमपुरा में 4, देवपहलवा में 1, सहादतपुरा में 7, डोमनपुरा में 4, निजामुद्दीनपुरा में 3 सहित अन्य जगहों पर है। इस वर्ष नगर पालिका द्वारा नगर के 42 वार्डो में जर्जर मकानों को चिहिन्त करने का कार्य नहीं किया जा सका है।
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जले के मुहम्मदाबाद गोहना, वलीदपुर नगर पंचायत के अलावा किसी निकाय द्वारा सर्वे कार्य इस वर्ष नहीं किया गया। मुहम्मदाबाद के ईओ रामसमुख ने बताया कि मुहम्मदाबाद नगर पंचायत में सात जर्जर भवनों को चिहिन्त किया गया है।इन भवन में रहने वाले लोगों को दूसरे जगह रहने के लिए सुझाव दिया गया है। साथ ही कुछ को पीएम आवास भी स्वीकृत हुआ है।वहीं वलीदपुर नगर पंचायत ने भी इस वर्ष दो जर्जर भवनों को चिहिन्त किया गया है।
इसी क्रम में अदरी नगर पंचायत का दावा है कि उनके क्षेत्र में एक भी जर्जर मकान नहीं है, जिनके थे उन्हें आवास मुहैया करा दिया गया। वहीं कोपागंज नगर पंचायत द्वारा इस वर्ष सर्वे कार्य नहीं किया गया। बीते वर्ष सर्वे में 5 जर्जर भवन चिहिनत किया गया था।घोसी निकाय द्वारा भी सर्वे कार्य नहीं किया गया। दोहरीघाट निकाय का दावा है कि उनके क्षेत्र में केवल एक जर्जर भवन है।
सर्वे में चलता है रसूख का प्रभाव
मऊ। नगर पालिका द्वारा जर्जर भवनों को चिह्नित करने वाले सर्वे में पारदर्शिता की जरुरत है। सूत्रों की माने तो नगर पालिका द्वारा 2019 में 49 मकानों को चिह्नित किया गया था। जबकि 2020 में यह संख्या 61 तक पहुंच गई। ऐसे में केवल एक वर्ष में 12 मकान एक वर्ष में कैसे जर्जर हो गए। सूत्रों की माने तो राजनैतिक दवाब और मिली भगत से भी जर्जर भवनों को चिहिन्त करने में भेदभाव किया जाता है। जबकि सर्वे कार्य को पूरे पारदर्शिता से किया जाए तो यह संख्या 100 से ज्यादा पहुंच सकती है।