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दुलदुल को पिलाया दूध, मांगी मन्नतें
mau
Updated Fri, 14 Sep 2018 10:59 PM IST
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घोसी के बड़ागांव में दुलदुल के जुलूस में नौहाखानी करते अजादार।
- फोटो : mau
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नगर के बड़ा गांव स्थित स्व. मोहम्मद हसन के मकान से गुरुवार की रात्रि 9:30 बजे जुलजनाह (दुलदुल) और अलम का जुलूस निकाला गया। परम्परागत रास्तों से गुजरते हुए दुलदुल को अकीदतमंदों ने दूध पिलाया और मन्नतें मांगी। इस दौरान रास्ते भर अंजुमनों ने नौहा पढ़ा और मातम से कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। देर रात एक बजे सदर इमाम बारगाह पर पहुंच कर जुलूस खत्म हुआ।
जुलूस से पहले मौलाना हसन असग़र शबीब ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि 28 रजब सन 60 हिजरी को हजरत इमाम हुसैन काफिला लेकर मदीने से चले थे। दो मोहर्रम 61 हिजरी को इमाम हुसैन का घोड़ा एक स्थान पे रुक जाता है। आप ने एक के बाद एक नौ घोड़े बदले लेकिन कोई भी आगे नहीं बढ़ा। आप ने वहां लोगो से जगह का नाम पूछा तो एक बूढ़े बूढ़े आदमी ने कहा मौला इसे कर्बला कहते हैं। कर्बला का नाम सुन इमाम हुसैन घोड़े से उतरे और एक मुट्ठी मिट्टी लेकर सूंघी और कहा की यही वो जगह है जहां हमारे ख़ैमे लगेंगे। इस तरह हुसैनी काफिला 2 मोहर्रम को कर्बला पहुंचा और नहरे फोरात के किनारे खैमे लगाए गए।
इसी की याद में निकाले गए जुलूस में अंजुमन सज्जादिया के नौहों ‘इशारा करता है जानी रोबाब झूले से मैं लाके छोड़ूंगा सौ इन्कलाब झूले से’ और फिर ‘सिमों से लिपटी ये फरियाद करती है दुखतर ऐ राहवार न बाबा को लेके जा मेरे’ पढ़ा तो मौजूद अजादार रो पड़े। इस दौरान गजनफर अब्बास, साजिद हुसैन, शमीम हैदर, शाहिद हुसैन, तफहीम हैदर, जफर अब्बास, अली हैदर, गुलाम हैदर, अहमद औन, लुकमान हैदर, नफीस असगर, खमखार हुसैन, सफदर हुसैन, नसीम, मजहर हुसैन, सिब्ते हसन,इब्ने हसन, काजिम हुसैन आदि मौजूद थे।
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जुलूस से पहले मौलाना हसन असग़र शबीब ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि 28 रजब सन 60 हिजरी को हजरत इमाम हुसैन काफिला लेकर मदीने से चले थे। दो मोहर्रम 61 हिजरी को इमाम हुसैन का घोड़ा एक स्थान पे रुक जाता है। आप ने एक के बाद एक नौ घोड़े बदले लेकिन कोई भी आगे नहीं बढ़ा। आप ने वहां लोगो से जगह का नाम पूछा तो एक बूढ़े बूढ़े आदमी ने कहा मौला इसे कर्बला कहते हैं। कर्बला का नाम सुन इमाम हुसैन घोड़े से उतरे और एक मुट्ठी मिट्टी लेकर सूंघी और कहा की यही वो जगह है जहां हमारे ख़ैमे लगेंगे। इस तरह हुसैनी काफिला 2 मोहर्रम को कर्बला पहुंचा और नहरे फोरात के किनारे खैमे लगाए गए।
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इसी की याद में निकाले गए जुलूस में अंजुमन सज्जादिया के नौहों ‘इशारा करता है जानी रोबाब झूले से मैं लाके छोड़ूंगा सौ इन्कलाब झूले से’ और फिर ‘सिमों से लिपटी ये फरियाद करती है दुखतर ऐ राहवार न बाबा को लेके जा मेरे’ पढ़ा तो मौजूद अजादार रो पड़े। इस दौरान गजनफर अब्बास, साजिद हुसैन, शमीम हैदर, शाहिद हुसैन, तफहीम हैदर, जफर अब्बास, अली हैदर, गुलाम हैदर, अहमद औन, लुकमान हैदर, नफीस असगर, खमखार हुसैन, सफदर हुसैन, नसीम, मजहर हुसैन, सिब्ते हसन,इब्ने हसन, काजिम हुसैन आदि मौजूद थे।
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