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भारत के उद्योग और व्यापार को नष्ट कर रहा है चीन

Sun, 20 Oct 2019 12:18 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 20 Oct 2019 12:18 AM IST
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डीसीएसके पीजी कॉलेज मऊ के सभागार में रीजनल कंप्रिहेंसिव इकोनामिक पार्टनरशिप विषय पर आयोजित संग? - फोटो : MAU
मऊ। नगर स्थित डीसीएसके पीजी कॉलेज के सभागार में रिजनल कंप्रिहेंसिव इकोनामिक पार्टनरशिप विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें आरसीईपी की संरचना और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया। साथ ही तथा भारत के लिए इस समझौते के लाभ हानि पर विस्तार से चर्चा की गई। इस मौके पर डीसीएसके पीजी कालेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद कुमार मिश्र ने कहा कि पहले ही चीन के साथ भारत को व्यापार में लगभग 60 अरब डालर का घाटा है। यह समझौता लागू होने के बाद यह व्यापार घाटा और बढ़ जाएगा। भारतीय डेयरी और पशुपालन भी इस समझौते के अंतर्गत आते हैं और इस क्षेत्र में न्यूजीलैंड भारत के सामने चुनौती बन सकता है। समझौता होने पर जिस प्रकार चीन भारत के उद्योग और व्यापार को नष्ट कर रहा है, उसी प्रकार न्यूजीलैंड भारत के डेयरी उद्योग और उसमें मिले रोजगार पर खतरा बन जाएगा। राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर बाबूलाल ने चीन की बढ़ती राजनीतिक और सामरिक ताकत के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि यदि समय रहते भारत के नीति निर्माताओं ने चीन की महत्वाकांक्षी योजनाओं को ध्यान में नहीं रखा और चीन की सामरिक नीतियों के प्रति सचेत नहीं रहे, तो आने वाले समय में चीन भारत की संप्रभुता के लिए खतरा बन सकता है। इसी क्रम में प्रोफेसर सर्वेश पांडेय ने कहा कि जहां तक भारत के हितों की बात है तो आरसेप भारत के लिए जितना लाभदायक है उससे कहीं अधिक चुनौती है। इससे भारत की मौलिक समस्याएं और भी विकराल हो जाएंगे।संगोष्ठी को गीतांजलि, सिमरन, हर्षिता,आकांक्षा इंद्रेश, गौरव, पंकज तिवारी, रवीश तिवारी, कल्पना सिंह आदि ने संबोधित किया। संचालन डॉ. चंद प्रकाश राय ने किया।
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